स्वच्छता और सुंदरता में अनुकरणीय है चंबा का हृदय स्थल- रेड क्रॉस

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    स्वच्छता और सुंदरता में अनुकरणीय है चंबा का हृदय स्थल- रेड क्रॉस। इतनी बड़ी धरोहर वीरान पड़ी हुई है ! काश ! यदि इस बहुमूल्य संपत्ति का सदुपयोग होता तो कितना अच्छा होता।

    [su_highlight background=”#880e09″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी@कवि:सोमवारी लाल सकलानी, निशांत[/su_highlight]

    आज सुबह 9:00 बजे कोरोना की बूस्टर डोज लेने रेड- क्रास, ब्लॉक रोड (चंबा) गया। यद्यपि उस समय यह स्थल हलचल से काफी दूर था। रेड क्रॉस में कार्यरत कर्मचारी वहां मौजूद थे। अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस की यह बिल्डिंग या स्थल और चंबा की हृदय स्थली है। 60 वर्ष से ज्यादा समय से भी शक्ति स्तंभ के रूप में अपने गौरवमयी अतीत का गुणगान कर रही है। 70 और 80 के दशक में गुलजार रहने वाली है संस्था, आज केवल कुछ कर्मचारियों के भरोसे हैं। यहां कोई डॉक्टर है नही है। किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सुविधाएं नहीं हैं। कर्मचारी हैं, उन्हें नौकरी करनी है, इसलिए अपनी सेवा में तैनात हैं।

    स्वच्छता और सुंदरता में अनुकरणीय है चंबा का हृदय स्थल- रेड क्रॉस

    चंबा शहर के अंतर्गत इतनी भूमि, इतना सुंदर भवन और इतना बड़ा आच्छादित परिसर शायद ही किसी विभाग के के पास तो होगा।

    दुर्भाग्य इस बात का है कि आज भी टिहरी के निवासियों को ईलाज के लिए देहरादून और ऋषिकेश के चक्कर मारने पड़ते हैं। चंबा में यदि मसीह अस्पताल न होता, तो न जाने कितने लोग असामयिक मृत्यु के गाल में चले गए होते। नई टिहरी स्थित बौराड़ी अस्पताल तो केवल रिफरल सेंटर से अधिक नहीं है। यह मेरा मानना है।

    रेड क्रॉस- जहां की कभी डॉक्टर छाबड़ा जैसी डॉक्टर थी। पूरे क्षेत्र के प्रसूति गृह के रूप में भी रेड क्रॉस जाना जाता था। जौनपुर -सकलाना से लेकर थौलधार ब्लॉक के असंख्य गांव, बमुंड, मनियार, मखलोगी, कुजणी पट्टी के अनेक गांव का यह आदर्श स्वास्थ्य केंद्र के रूप में, यह संस्था जानी जाती थी।

    समय के अनुसार परिस्थितियां बदली लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्थाएं टिहरी में ज्यों की त्यों रही। उनमें कोई गुणात्मक सुधार नहीं हुआ। अपने ही गढ़वाल जिले में दो-दो मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति हो चुकी है। श्रीकोट मेडिकल कॉलेज तो गतिमान है तथा कोटद्वार में भी मेडिकल कॉलेज बन जाएगा।

    इच्छाशक्ति के अभाव में टिहरी डिस्ट्रिक्ट में चिकित्सा सुविधाओं का रोना बरकरार है।

    फुर्सत के क्षणों में मैंने रेड क्रास की कर्मचारी आदरणीय चंपी देवी जी से बातचीत की। वह सुबह 9:00 बजे स्वच्छता कार्यक्रम में लगी हुई थी। यद्यपि वह अस्पताल में आया के पद पर है फिर भी बहुत ही निष्ठा और लगन के साथ सफाई के कार्य में भी लगी हुई थी। चंबा नगर का स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर होने के नाते उनकी कार्य कुशलता से मैं अत्यंत प्रसन्न हुआ और उनके बारे में जानने की उत्सुकता भी बढी।

    चंपी देवी जी पिथौरागढ़ जनपद के अस्कोट से भी दूर क्षेत्र की रहने वाली हैं। वह दो वर्ष से चंबा स्थित रेडक्रॉस में कार्यरत हैं। धारचूला से कुछ दूरी पर उनका गांव है। उनकी तीन बेटियां विवाहिता है। एक बेटा है जो आइटीबीपी में कार्यरत है।

    उत्तराखंड के सुदूरवर्ती जिले पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र के रहने वाली चंपी देवी को इतनी दूर सेवा करने में कतई मलाल नहीं है। वह मिस फ्लोरेंस नाइटेंगल की एक मिसाल हैं। चाहे वह छोटे पद पर ही कार्य क्यों न कर रही हों। उनकी कार्यकुशलता को जितना भी सलाम किया जाए कम ही कम है।

    मैंने वहां पर कार्यरत स्टाफ के अन्य उनके सहयोगियों से भी बातचीत की। उनमें से कुछ उधम सिंह नगर से हैं और कुछ उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों से।

    रेड क्रॉस की बिल्डिंग के बहाने हम व्यक्ति, व्यक्तित्व,स्थान, परिस्थितियों, क्षेत्र,और पारिस्थितिकी का आकलन करते हैं।

    60 के दशक की बनी हुई है बिल्डिंग आज भी हू ब हू उसी स्थिति में है जबकि आजादी के बाद बनी हुई अनेकों बिल्डिंगस धराशाई हो चुकी है। मैं अपने ही तल्ला चंबा में करोड़ों रुपए से बने हुए जलागम के खंडहर भावनों को देखता हूं, जो कि बमुश्किल 30 साल पहले बने थे। आज खंडोंहरों के रूप में तब्दील हो चुके हैं। यदि उन्हें भ्रष्टाचार के जीवित उदाहरण कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। यदि किसी को विश्वास न हो तो राजकीय संस्कृत महाविद्यालय के नीचे गुजरने वाली रोड से देख सकते हैं। इससे अनुमान लगा सकते हैं कि आजादी के बाद हमने क्या खोया और क्या पाया ?

    जहां हमें राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त हुई। जीवन स्तर सुधरा है, वहीं भ्रष्टाचार और ठेकेदारी प्रथा के कारण काफी नुकसान भी हुआ है।

    हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि आज हम कितने निष्ठा पूर्वक अपने कार्यों को करते हैं। यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। फिर भी रेड क्रॉस के बिल्डिंग हो या चंपी देवी की कार्यकुशलता, हमें अवश्य अपने पुरातन की याद दिलाती है। जिसके बल पर भारत कभी सोने की चिड़िया कहलाया होगा।