फायर ब्रिगेड से सेवानिवृति के पश्चात् बागवानी और स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिशाल कायम कर रहे हैं द्वितीय विश्व युद्ध के सेनानायक बहादुर सिंह के सुपुत्र सौकारसिंह चौहान

फायर ब्रिगेड से सेवानिवृति के पश्चात् बागवानी और स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिशाल कायम कर रहे हैं द्वितीय विश्व युद्ध के सेनानायक बहादुर सिंह के सुपुत्र सौकारसिंह चौहान
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#द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान #जर्मन, #जापान, #इटली आदि देशों में अपने शौर्य एवं पराक्रम की #मिशाल कायम करने वाले स्व0 बहादुर सिंह चौहान के सुपुत्र सेवानिवृत #प्रभारी अग्निशमन श्री सौकारसिंह चौहान सेवानिवृति के बाद आरामपस्त न हो बागवानी और स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता के लिए भावी पीढ़ी को प्रोत्साहित करने की मिशाल कायम कर रहे हैं।

24 मई 1961 को श्री महादेव ग्राम छाती में स्व0 श्री बहादुरसिंह चौहान के घर श्रीमती कमला देवी चौहान की कोख से जन्मे श्री सौकार सिंह चौहान 20 जुलाई 1980 को फायर सर्विस में भर्ती हुए थे। प्रदेश के विभिन्न स्थानों में सेवायें देते हुए 40 वर्ष 10 माह 11 दिन की सेवाओं के उपरान्त वे 31 मई 2021 को #पुलिस लाईन देहरादून से सेवानिवृत हुए। सेवानिवृति के बाद आराम फरमाना उनकी फितरत में नहीं रहा तो उन्होंने गजा नकोट मोटर मार्ग पर स्थित अपनी पैतृक भूमि में #श्रीमहादेव मन्दिर को जाने वाले मुख्य पैदल मार्ग पर अपना दो मंजिला शारदार भवन तैयार किया और वहीं से #स्वरोजगार की शुरुआत करनी आरम्भ की।

फायर ब्रिगेड से सेवानिवृति के पश्चात् बागवानी और स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिशाल कायम कर रहे हैं द्वितीय विश्व युद्ध के सेनानायक बहादुर सिंह के सुपुत्र सौकारसिंह चौहान

बागवानी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उन्होंने सर्वप्रथम जिला उद्यान विभाग टिहरी गढ़वाल के माध्यम से एक पाली हाऊस की स्थापना की। जिसमें उन्होंने स्वयं के परिश्रम से नकदी सब्जियां उगाने का कार्य आरम्भ किया। वर्तमान में उनके #पाली हाऊस में बैंगन व भिण्डी के पौधों समेत कई प्रजातियों की सब्जियां मौजूद हैं। इसके अलावा #पाली हाऊस में उत्पादित पौध को उन्होंने घर के आस-पास शिफ्ट कर लौकी, कद्दू, मक्का, अरबी, बीन्स, सूरजमुखी, अदरख आदि विभिन्न प्रकार की मौसमी व बैमौसमी फसलें तैयार कर रखी हैं।

बागवानी के अलावा उन्होंने सीमेंट, ईंट, रेत-बजरी आदि का कार्य भी शुरु किया। इस कार्य में उनका हाथ बंटाने का काम उनका पुत्र भरपूर सिंह कर रहा है। जिसके लिए उन्होंने सेवानिवृति के बाद डम्पर खरीदा और उससे ही भवन निर्माण सामग्री का आयात निर्यात व आपूर्ति विभिन्न स्थानों पर करवायी जाती है।

सड़क पर आवासीय भवन होने के कारण सेवानिवृति #प्रभारी अग्निशमन सौकार सिंह के यहां गांव के प्रवासी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। घर पर आने वाले प्रवासियों के लिए उन्होंने भवन के प्रथम तल पर ही रहने आदि की समूची व्यवस्थायें कर रखी हैं, गांव के बाहर रहने वाले प्रवासी लोगों के लिए उनका कहना है कि वे जब मर्जी आयें और यहां चैनपूर्वक रह सकते हैं। व्यवस्थायें चाक-चौबंद हैं।

रिटायर्ड प्रभारी अग्निशमन श्री सौकार सिंह चौहान के पिता स्व. श्री बहादुर सिंह चौहान (सेना नं0. 4032020 गढ़वाल राईफल) द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1939 में गढ़वाल राईफल में भर्ती हुए थे। देश की सेवा करते हुए द्वितीय विश्व युद्ध में विभिन्न स्थानों पर अपने शौर्य एवं पराक्रम का प्रदर्शन करके उन्होंने कई सेना मेडल हासिल किए। जब वे जीवित थे, तत्समय अपनी सेना की वर्दी में सेना मेडलों के साथ समारोहों में शामिल हुआ करते थे। ‘जतो नाम ततो गुण’ वाले श्री बहादुर सिंह चौहान 1954 में सेना से सेवानिवृत हुए थे।

अमर शहीद गबरसिंह वीसी का भी सम्बन्ध है श्री महोदव ग्राम छाती से, उनकी धर्मपत्नी स्व. श्रीमती सतूरी देवी का रहा मायका

यहां पर यह उल्लेख करना उचित होगा कि श्री महोदव #ग्राम छाती से #ब्रिटिश सेना का #सर्वोच्च सम्मान पाने वाले #अमर सेनानी #स्व. गबरसिंह नेगी VC का भी सम्बन्ध रहा है। उनकी धर्मपत्नी स्व. #श्रीमती सतूरी देवी का मायका भी यही गांव है। इस गांव से स्व. बहादुर सिंह के अलावा स्व. श्री चन्द्रसिंह चौहान, स्व. श्री रूपचन्द सिंह चौहान, स्व. श्री बलबीरसिंह चौहान, श्री प्रेमसिंह रावत ने भारतीय सेना में सेवारत रहते हुए देश सेवा में अपना योगदान दिया है।

आज जबकि समूचे उत्तराखण्ड में सैनिकों के नाम पर सड़कों, विद्यालयों, सर्वाजनिक स्थलों आदि का नामकरण सैनिकों के नाम पर किया जा रहा है, तब इस गांव के सैनिकों के नाम पर अभी तक किसी भी स्मारक अथवा सार्वजनिक स्थल का नामकरण नहीं हो पाया। यह भी एक गौरकरणीय पहलू है। सरकार को चाहिए कि इन सैनिकों के नाम पर भी क्षेत्र के सार्वजनिक स्थलों का नामकरण व स्मारकों का निर्माण करवाया जाय।

आजकल के शिक्षित व बेरोजगार युवकों पब्जी मोबाइल को छोड़ श्री सौकार सिंह चौहान के स्वरोजगारोन्मुख कार्यों से सीख लेकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होना चाहिए।

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