विश्व रेडियो दिवस:  सूचना, संचार और मनोरंजन के साधनों में सबसे सशक्त माध्यम है रेडियो

विश्व रेडियो दिवस:  सूचना, संचार और मनोरंजन के साधनों में सबसे सशक्त माध्यम है रेडियो
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1- सशक्त माध्यम:- सूचना, संचार और मनोरंजन के साधनों में रेडियो सबसे सशक्त माध्यम है। आधी शताब्दी से भी ज्यादा समय से रेडियो प्रचलन में है। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में सूचनाओं और मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय साधन रेडियो है ।

[su_highlight background=”#880e09″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी@कवि: सोमवारी लाल सकलानी, निशांत[/su_highlight]

2- रेडियो – मेरी स्मृति में – हमारे क्षेत्र में सर्वप्रथम रेडियो ग्राम पंचायत उनियाल गांव के एक दादाजी लाए थे। स्थानीय लोग उन्हे गोंगी दादा जी के नाम से पुकारते थे ।उनका असली नाम कुछ और था, जिसका मुझे स्मरण नहीं है। श्री गोंगी दादा जी अपने मर्फी के रेडियो को कंधे में टांग कर नाते- रिश्तेदारी, निकटवर्ती गांव, स्थानीय बाजार आदि में जाते थे । उनके पीछे बच्चों का तांता लग जाता था ।महिलाएं उनके रेडियो सुनने के लिए काफी उत्सुक रहती थी।

3- पचास साल पूर्व- उस कालखंड में सिलोन स्टेशन काफी पॉपुलर था। श्री गोंगी दादा जी के बाद अनेकों लोग क्षेत्र में रेडियो ले आए। मुख्यत मर्फी और बुश के रेडियो उस समय चलते थे, जो तीन बैंड के होते थे । उस समय रेडियो का लाइसेंस होता था। जिसका रिन्यूवल करना पड़ता था । कुछ समय बाद दो बैंड के रेडियो चलें और बाद में तो घर-घर में रेडियो सुनाई देने लगे।

4- तात्कालिक रेडियो स्टेशन– नजीबाबाद ,लखनऊ और दिल्ली स्टेशन ज्यादातर लोग सुनते थे। अंतर्राष्ट्रीय खबरों को सुनने के लिए बी बी सी लंदन सबसे सशक्त माध्यम था । रेडियो में विज्ञापन बड़े लोगों के आते थे। जिनमें एक नाम हमारे सकलाना क्षेत्र के ठाकुर वीर सिंह कंडारी के प्रतिष्ठान गढ़वाल पनीर भंडार फतेहपुरी ,दिल्ली का भी नाम था। जिसका विज्ञापन 8:45 बजे की न्यूज़ से पूर्व प्रसारित होता था। अपने समय में देवकीनंदन पांडे जी की खबरें मैं भी बड़े चाव से सुनता था।

5- जैसा पढ़ा है – यूं तो रेडियो का इतिहास काफी पुराना है ।छात्र जीवन में पढ़ा था कि रेडियो तरंगे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन हैं। जिसका संचार तकनीकी उपयोग किया जाता है ,जिन्हें उपकरणों के द्वारा प्राप्त किया जाता है। रेडियो फ्रिकवेंसी स्पेक्ट्रम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का एक छोटा सा हिस्सा है । रेडियो तरंगों में सबसे लंबी तरंग दैर्ध्य होती है।

6- उदेश्य – रेडियो का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना ही नहीं बल्कि लोगों को शिक्षित करने के साथ-साथ सूचनाएं जानकारियां प्रदान करना भी है । रेडियो पत्रकारों के लिए एक प्लेटफार्म है। जिसका एक विशिष्ट महत्व है ।

7- प्रसारण- सन 1945 में सर्वप्रथम यू एन रेडियो का प्रसारण किया गया और तब से यह विविधताओं को लिए व्यापक रूप में गतिमान है । रेडियो सूचनाओं का सशक्त माध्यम है। मनोरंजन का साधन है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय एकीकरण में रेडियो का महत्व है ।प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं के समय दूरदराज के क्षेत्रों में सूचनाओं को प्राप्त करने का सबसे सुलभ साधन रेडियो है।

8- रेडियो दिवस – जनवरी सन 2010 में सर्वप्रथम स्पेन ने यूनेस्को में विश्व रेडियो दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था जो पारित हुआ और 13 फरवरी 2013 से रेडियो दिवस मनाया जाता है । राष्ट्रीय रेडियो आकाशवाणी से लेकर आकाशवाणी के क्षेत्रीय केंद्र सबसे लोकप्रिय हैं।अब प्रसार भारती के अंतर्गत आते हैं ।

9- एफ एम रेडियो – वर्तमान समय में एफ एम रेडियो के प्रचार से स्थानीय बोली और भाषा में सबसे लोकप्रिय रेडियो है।

10- हेंवल वाणी सामुदायिक रेडियो, चंबा – यूं तो विभिन्न स्थानों में अनेकों एफ एम रेडियो स्टेशन है ।उन्हीं में एक हमारा लोकप्रिय हेंवल वाणी सामुदायिक रेडियो ,चंबा; टेहरी गढ़वाल है।
क- स्थानीय युवाओं के द्वारा इस ओर रुझान प्रकट किया गया और 2001 में श्री रघु भाई जडधारी ,श्री राजेंद्र नेगी आदि के द्वारा हेंवल वाणी रेडियो क्या स्थापना की गई।
ख- सन 2007 में अंडे की ट्रे और पानी के पाइपों के एंटीना के साथ इस रेडियो का चंबा में विधिवत उद्घाटन हुआ। आज हेंवलवानी सामुदायिक रेडियो,चंबा क्षेत्रीय जनता के लिए सबसे लोकप्रिय रेडियो स्टेशन है। हेंवल वाणी सामुदायिक रेडियो स्टेशन, चंबा; अब अपने पांवों पर स्थित है। यद्यपि अभी किराए के भवन में चल रहा है। एक न एक दिन अवश्य रेडियो स्टेशन का भवन की बनेगा। स्थानीय गढ़वाली बोली- भाषा में यह रेडियो अपना प्रसारण करता है। लोक- संस्कृति ,लोक कला, लोकजीवन ,लोक भाषा, और लोग समाज पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके अतिरिक्त स्थानीय खेती-बाड़ी, जल, जंगल और जमीन, सामाजिक न्याय ,महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता ,पर्यावरण संरक्षण ,साहित्य, कला और संस्कृति, लोकगीत और लोकनृत्य आदि पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है ।
ग- सीधी बात कार्यक्रम में प्रतिदिन लोग रेडियो से जोड़ते हैं। यह सांस्कृतिक कर्मियों ,साहित्यकारों, रचना धर्मियों के लिए एक बड़ा मंच है । जिसे व्यापक पैमाने पर सुना जाता है । प्राकृतिक आपदाओं के समय यह रेडियो स्टेशन दूर-दराज तक सूचनाओं को पहुंचाने में किसी मसीहा से कम नहीं है । हेंवल वाणी सामुदायिक रेडियो, चंबा; की प्रगति, स्वस्थ मनोरंजन, शिक्षा के प्रचार और प्रसार, लोक भाषा और लोक कलाकार उन्नयन और अनेक नवाचार के कार्यक्रमों के कारण इसे एशिया का प्रतिष्ठित “मंथन” पुरस्कार भी मिला है।
घ- वर्तमान में श्री रघुभाई जरदारी चैनल हेड हैं। श्री राजेंद्र नेगी निदेशक, श्री रवि गुसाईं स्टेशन मैनेजर, श्रीमती आरती , राजेंद्र जोशी , कविता, शूरवीर भंडारी, सुशील सकलानी, पूजा आदि अनेकों विशेषज्ञ कार्यरत है। देश विदेश के अनेकों छात्र-छात्राएं यस रेडियो स्टेशन में शोध करने के लिए भी आते हैं जनप्रतिनिधि सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवियों को भी यह रेडियो स्टेशन मंच प्रदान करता है। मेरा भी सौभाग्य है कि मैं भी रेडियो की कोर कमेटी का मेंबर हूं। साथी, सहयोगी और मार्गदर्शक भी हूं।