क्यों कराया जाता है श्राद्धपक्ष में ‘श्वान’ को भोजन

क्यों कराया जाता है श्राद्धपक्ष में 'श्वान' को भोजन
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हिन्दू धर्म से संबंधित पशु ‘कुत्ते’ से जुड़े शकु-अपशकुन, श्राद्धपक्ष में ‘कुत्ते’ को भोजन कराने की आवश्यकता।

कुत्ते का रहस्य :

हमारे पुराणों में यह बतलाया गया है कि कुत्ता यमराज दूत है। कुत्ते को भैरव देवता का सेवक/ वाहन भी कहा जाता है। भैरव देवता को प्रसन्न करने के लिए कुत्ते को भोजन करना चाहिए। यदि भैरव देवता अपने भक्त से प्रसन्न रहते हैं तो किसी भी प्रकार की समस्या एवं रोग उसे छू नहीं सकता।

सरहद का साक्षी @ ज्योतिषाचार्य हर्षमणि बहुगुणा

मान्यता है की यदि आप कुत्ते को प्रसन्न रखते हैं तो वह आपके सामने किसी भी तरह की आत्माओं को फटकने नहीं देता. आत्माएं कुत्ते से दूर भागती है।
कुत्ते की क्षमता के बारे में पुराण में बतलाया गया है की दरअसल कुत्ता एक ऐसा प्राणी है, जिसे भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्व आभास होता है तथा वह सूक्ष्म जगत को यानि कि आत्माओं को देख सकता है। हिन्दू धर्म में कुत्ते को एक रहस्मय प्राणी माना गया है, अतः इसे भोजन कराने से हर प्रकार के संकट से बचा जा सकता है।

कुत्ते से जुड़े शकुन एवं अपशकुन:

1. कुत्ते की रोने की आवाज को अपशकुन माना जाता है। जब भी कुत्ता अकारण कराहता है तो समझ लीजिए की नकरात्मक शक्तियां आस पास है।
2. शास्त्रों में कुत्ते के संबंध में यह बात कही गई है कि यदि किसी परिवार में रोगी हो तो कुत्ता पालने से वह कुत्ता रोगी की बीमारी को अपने उपर ले लेता है।
3. यदि किसी शुभ कार्य के दौरान कुत्ता आपका मार्ग रोके तो इसे विषमता या अनिश्चयता प्रकट होती है।
4. यदि संतान की प्राप्ति न हो रही हो तो काले कुत्ते को पालना चाहिए।
5. अन्य शास्त्रीय मतांतर के अनुसार कुत्ते को पालने में यदि परेशानी हो तो, अन्य जगह बाहर ही किसी काले कुत्ते को प्रतिदिन तेल से चुपड़ी रोटी खिलाने से परिवार की कई समस्याओं का स्वतः ही निदान हो जाता है।
श्राद्धपक्ष में तो अपने पितरों की प्रसन्नता के लिए श्वान बलि दी जाती है।