एक राजनीतिक हब के रूप में उभरता नजर आ रहा है उत्तराखंड

भ्रष्टाचार मुक्त समाज
Shri Gopal Bahuguna
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आगामी 2-4 सालों में उत्तराखंड में लगभग 7-8 नई राजनीतिक पार्टियों का गठन होने की संभावना है, जिनमें 2-3 पार्टियों का गठन हो चुका है। उत्तराखंड का युवा जिसे दो वक्त की रोटी आसानी से बिना मेहनत की मिल नहीं रही है। चाहे वह किसी भी सोर्स से आ रही हो, इस कैटागिरी में आने वाले सारे लोग राजनीति में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

[su_highlight background=”#091688″ color=”#ffffff”]रिपोर्ट: गोपाल बहुगुणा[/su_highlight]

मैंने इसी तरह के युवाओं से प्रश्न पूछा कि आप क्यों राजनीति में आना चाह रहे हैं, जबकि आपको राजनीति का अर्थ भी पता नहीं है, उनका कहना था कि राजनीति के लिए किसी प्रकार की ज्ञान की जरूरत नहीं है। बस इतना करना होता है किसी नेता के आगे-पीछे घूमे। उसकी चमचागिरी करो और ऐसा करने पर उसे छोटा मोटा पद मिल जाता है और अधिकांश जनता तो बेवकूफ है, वह समझती है कि यह बहुत बड़े नेता बन गए हैं और चारों तरफ से इस तरह की बेवकूफ जनता की सलामी मिलनी शुरू हो जाती हैं।

धीरे-धीरे नेताओं की चमचागिरी करते-करते पैसे कमाने के सोर्स भी पता चलने शुरू हो जाते हैं। धीरे-धीरे विभिन्न राजनीतिक मंचों पर हमारे गले में मालाएं पहना दी जाती हैं, सामने बैठी जनता हमें भगवान समझ बैठती है और वह भी हमारे आगे पीछे घूमना शुरु कर देती है। हम जनता को बेवकूफ बनाने में पारंगत हो जाते हैं और जैसे जैसे हम जनता को बेवकूफ बनाने में पारंगत होते हैं, वैसे वैसे हमारी राजनीति भी आगे बढ़ती जाती है।

[irp]जनता हमें एक कुशल राजनीति की प्रमाण पत्र प्रदान कर देती है, यह सारी बातें कुछ युवाओं से बातें करने पर निकली हैं, साथियों, इन सारी बातों से लगता है कि उत्तराखंड बहुत जल्दी एक राजनीतिक हब के रूप में बनता नजर आ रहा है। यहां के राजनीतिज्ञों को जनता से कोई मतलब नहीं है। उनका मतलब केवल राजनीति करना होता है। आने वाले वर्षों में यही हाल रहा तो हमें अपनी जमीनों पर से भी बेदखल कर दिया जाएगा। इसलिए आज उत्तराखंड की जनता को जागरूक होना पड़ेगा। राज्य बनने के बाद राजनीतिक लोगों ने कुछ सामाजिक कहने वाले संगठनों ने, कुछ नौकर शाही ने इस प्रदेश को ऐसा उजाड़ कर रख दिया है कि इसको पुनर्जीवित करने में 20,25 साल का वक्त लग सकता है। वह भी तब जब मोदी, योगी जैसा नेतृत्व इस राज्य को मिले और सरकारी कामों में व्यवधान करने वाले संगठनों पर बैन लगे।