यूक्रेन-रूस युद्ध: वर्तमान विश्व परिदृश्य में भारत की भूमिका

यूक्रेन-रूस युद्ध: वर्तमान विश्व परिदृश्य में भारत की भूमिका
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विश्व राजनीतिक परिदृश्य में वर्तमान समय में सबसे बड़ी घटना यूक्रेन-रूस का युद्ध है। जिसने संपूर्ण मानवता को झकझोर कर रख दिया है। 40 दिन से ज्यादा चलने वाले इस युद्ध के फिलहाल थमने की कोई संभावना नहीं है।

महाशक्ति बनने की होड़ और वर्चस्व की लड़ाई में, मेरी दृष्टि में जितने दोषी पुतिन हैं, उससे भी ज्यादा दोषी जेलेक्सि, बाइडेन, बोरिस जॉनसन और यूरोपियन यूनियन है। संयुक्त राष्ट्र की भूमिका भी कामचलाऊ लगती है। केवल खानापूर्ति की बातें हो रही हैं।

इस युद्ध को रोकने में भारत की भूमिका सर्वोपरि हो सकती है। बहुत ही सुलझे, संयमित अंदाज में भारत इस युद्ध में अपनी भूमिका अदा कर रहा है। रूस- यूक्रेन के युद्ध में सबसे अधिक मुझे जेलेक्सि की बेवकूफी झलकती है।

सोवियत संघ के विघटन के बाद बने 15 देशों में यूक्रेन सर्वाधिक विकसित था। लंबे समय तक सोवियत रूस मे रहने के कारण वहां की भौगोलिक स्थिति, संस्कृति, सभ्यता और संसाधन रूस  से मिलती-जुलती है।  ज्यादा पाने की इच्छा में जेलस्की ने अपना सब कुछ खो दिया। नाटो के प्रति झुकाव होने के कारण रूस की क्रोधाग्नि भड़कनी स्वाभाविक थी। प्रकृति का नियम भी है कि दुश्मन को अपने समीप कोई नहीं रखना चाहता।

सोवियत संघ के विघटन के समय सबसे अधिक संसाधन संपन्न यूक्रेन था और कजाकिस्तान सबसे ज्यादा सैनिक प्रदान करने वाला क्षेत्र था। बाल्टिक देश लिथुवानिया, लाटविया और एस्टोनिया सर्वप्रथम नाटो के प्रभाव से प्रभावित हुए और वही से सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया शुरू हुई। सन 1990 में गौर्वाचौव का पेत्रोइस्का के कारण इस महा संघ का विघटन हुआ। और एक छत्र अमेरिका की दादागिरी शुरु हो गई।

अमेरिका और चीन दो ऐसे देश हैं जिन पर विश्वास करना बहुत बड़ी भूल है और इससे भी ज्यादा अंग्रेजों पर विश्वास करना और बड़ी भूल है। अंग्रेजों की सदा फूट डालो और राज करो की नीति रही है।

इस युद्ध को भड़काने में नाटो की भूमिका के साथ- साथ बोरिस जॉनसन के दिए गए स्टेटमेंट, बाइडेन की चालबाजी और जेलस्की की चालाकी ने आग में घी डालने का कार्य किया। रूस का भी अहंकार बढ़ गया और आज संपूर्ण मानवता कराह रही है। दोनों देशों का बहुत बड़ा नुकसान हो चुका है। अमेरिका आराम से तमाशा देख रहा है। लाविंग हो रही है। भारत पर दबाव डाला जा रहा है और एक देश के खिलाफ नाटो, यूरोपीयन यूनियन ,अमेरिका  एक जुट हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका लाचार नजर आती है।

40 दिन से भी अधिक युद्ध को चलते हुई है हो गया है। तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। युद्ध को और ज्यादा भड़काया जा रहा है। यह अमेरिका और नाटो की साजिश ज्यादा लगती है कि हथियारों को  बेचकर अकूत संपत्ति  प्राप्त करना और विश्व में अपना वर्चस्व बनाए रखना, इनका मकसद लगता है।

रूस के लिए यह समय “इधर खाई और उधर कुआं” वाली स्थिति है। ना तो वहां युद्ध से हट सकता है और न लंबे समय तक  जारी रख सकता  है।

बस! उसके पास एक ही विकल्प है परमाणु हथियारों की धौंस। यदि परमाणु हथियारों का प्रयोग इस युद्ध में हो गया तो यह महाविनाश का कारण बनेगा। संपूर्ण मानवता का अंत भी हो सकता है। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी या महाप्रलय की स्थिति भी आ सकती है। इसलिए कुछ बातों पर ध्यान देना अवश्य है।

यूक्रेन और रूस के युद्ध को रोकने की भारत को संयम के साथ पहल करनी चाहिए। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के दबाव में नहीं आना चाहिए। जेलस्कि जैसे चालाक व्यक्ति का समर्थन भी नहीं करना चाहिए और अमेरिका के छल प्रपंच  से दूर रहना  भारत के लिए हितकर है। चीन भी अपनी गिद्ध दृष्टि लगाए हुए है। उसके दोनों हाथ लड्डू हैं। रूस कमजोर होगा तो वह महाशक्ति के रूप में उभरेगा और उसका महाशक्ति के रूप में उभरना भारत के हित में नहीं है। अमेरिका, चीन, पाकिस्तान या यूरोपियन यूनियन के कई देश चाहे वह ब्रिटेन ही क्यों ना हो, कभी नहीं चाहते कि भारत एक महाशक्ति बने।

जहां यूरोपीयन यूनियन, अमेरिका आदि आर्थिक प्रतिबंधों के द्वारा रूस को कमजोर कर रहे हैं वही हथियारों की होड़ में भी शामिल हो चुके हैं। भारत को इनके झांसे में आने की  आवश्यकता नहीं है।

इसलिए तटस्थ भूमिका के साथ- साथ, भारत को विश्व बंधुत्व की भावनाओं को कायम रखते हुए, विश्व युद्ध को रोकने के लिए संबंधित पक्षों के साथ तार्किक विवेचना करनी चाहिए। विश्लेषण करना चाहिए और अपनी गुटनिरपेक्ष भूमिका को और आगे बढ़ाना चाहिए। साथ ही अपने आर्थिक संसाधनों को भी आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। चाहे वह तेल का आयात ही क्यों ना हो, या किसी अन्य प्रकार की सहायता। उसका उपयोग करना चाहिए। देश के संसाधनों को आगे बढ़ाने के लिए, महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए, जीडीपी, बाजार बढ़ाने के लिए भारत की भूमिका होनी चाहिए। अमेरिका ,चीन, ब्रिटेन और नाटो की गीदड़ भभकियों से डरना नहीं चाहिए और यह भी देखना चाहिए रूस ने संकट के समय सदैव भारत उसका साथदिया है।

फिलहाल यूक्रेन और रूस का युद्ध समाप्त हो जाए। यदि युद्ध लंबा चलता है तो यह महा विनाश का कारण बनेगा ! फिलहाल तो यूक्रेन और रूस 20 साल पीछे चले ही गए हैं।

सरहद का साक्षी @कवि:सोमवारी लाल सकलानी, निशांत

*यह लेखक के निजी विचार हैं।