श्रीहनुमानजी प्राकट्योत्सव: हनुमानजी की कृपा प्राप्ति के लिए इन श्लोकों का पाठ करना चाहिए

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आज हनुमानजी का प्राकट्योत्सव है, हनुमानजी के जन्म के विषयक दो मत हैं– कुछ लोग चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को मानते हैं तो कुछ कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को।

यह सुनिश्चित है कि अतुलित बलशाली पवनसुत हनुमान जी इस धरा धाम में ईश्वर कार्य के लिए अवतरित हुए और आज भी हमारे मध्य में हैं और अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्ति के लिए इन श्लोकों का पाठ करना चाहिए।

जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबल: । राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालित: ।।

दासोऽहं कोशलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मण:। हनुमाञ्शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मज: ।।

न रावणसहस्रं मे युद्धे प्रतिबलं भवेत् । शिलाभिश्च प्रहरत: पादपैश्च सहस्रश: ।।

अर्दयित्वा पुरीं लङ्कामभिवाद्य च मैथिलीम्। समृद्धार्थो गमिष्यामि मिषतां सर्व रक्षसाम् ।।

हनुमानजी का प्रसाद गुण, बेसन के लड्डू, भीगा चना या भुना हुआ चना है।

कहा जाता है कि त्रेता युग में रामावतार के समय ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं को वानर और भालुओं के रूप में पृथ्वी में अवतरित होकर भगवान श्रीराम की सेवा करने का आदेश दिया। तब सभी देवताओं ने अपने अपने अंश से अवतार लिया। इनमें वायु के अंश से रुद्रावतार महावीर हनुमान जी ने जन्म लेकर पिता वानरराज केशरी और माता अञ्जना के घर को सुशोभित किया। कहा भी है ‘शंकर सुवन केशरी नंदन’ जन्म के बाद इन्हें भूख से व्याकुल देखकर मां फल लाने जङ्गल चली गई और हनुमान जी ने उदित सूर्य को अरुण बिम्व का फल समक्ष कर छलांग लगाई और वायु वेग से सूर्य मण्डल में पहुंच गए। उस दिन अमावस्या थी और राहु भी सूर्य को ग्रसने के लिए सूर्य के समीप पहुंचे थे, हनुमानजी ने उसे अपनी फल प्राप्ति में अवरोध समझा और एक धक्का लगाया इसके फलस्वरूप राहु इन्द्र के पास गए, इन्द्र ने वज्र का प्रहार किया जिससे हनुमानजी की बायीं ठुड्डी (हनु) टूट गई तभी से उनका नाम हनुमान हुआ, इसके कारण वायु देव को अत्यन्त क्रोध आया और प्राण के आधार वायु का संचरण बन्द कर दिया जिससे सारी प्रजा व्याकुल हो उठी, प्रजा की घबराहट के कारण पितामह ब्रह्माजी वहां गए जहां वायु देव अपने मूर्छित पुत्र को लेकर बैठे थे। ब्रह्मा जी के कर स्पर्श से हनुमानजी सचेष्ट हुए।

सभी देवताओं ने अपने अस्त्र शस्त्रों से हनुमानजी को अबध्य किया और ब्रह्मा जी ने वरदान दिया कि — वायु देव तुम्हारा यह पुत्र शत्रुओं के लिए भयंकर काल पुरुष होगा, और युद्ध में इसे कोई नहीं जीत सकेगा साथ ही रावण के साथ होने वाले राम के युद्ध में अपना अद्भुत पराक्रम दिखाकर भगवान श्री राम की प्रसन्नता का कारक होगा।

ऐसे बलशाली पवनसुत हनुमान जी का जन्मोत्सव हर भारतीय मनाता है। आज रामायण का पाठ, रामचरितमानस के सुन्दर काण्ड का पाठ या अखण्ड हनुमान चालीसा का पाठ बहुत लाभ दायक है। हनुमानजी के विग्रह पर सिन्दूर से श्रृंगार करना सामान्य सा कर्म है जिसे हर जन मानस करता है, हनुमानजी का भजन, कीर्तन और गुणगान अवश्य करेंगे। ‘ॐ हनुमते नमः’ का जप दिन भर करना चाहिए।
हमें अपने आराध्यों के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए।

@आचार्य श्री हर्षमणि बहुगुणा

श्री हनुमान जन्मोत्सव

*प्रातः स्मरामि हनुमन्त मनन्तवीर्यं*
*श्रीरामचन्द्र चरणाम्बुज चञ्चरीकम्*
*लङ्कापुरी दहन नन्दित देववृन्दं*
*सर्वार्थ सिद्धि सदनं प्रथित प्रभावम्*

आज चैत्र पूर्णिमा हिन्दू नववर्ष की प्रथम पूर्णिमा है आज के ही दिन श्री हनुमान जी ने माता अंजनी की कोख से जन्म लिया था। श्रीहनुमान जी का जन्मोत्सव होने से इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता हेै।

इस पवित्र दिन में श्री हनुमान जी की पूजा करने से अनेक संकटो से मुक्ति मिलती है और भक्त की सभी मनोकामनाए भी पूर्ण होती है। ऐसे अनेक उदाहरण है जिसमें श्री हनुमान जी ने भगवान से लेकर एक आम भक्त तक को भी संकट से ऊबारा हेै।

ऐसे श्री हनुमान जी जो श्री रामचन्द्र जी के चरण-कमलों के भ्रमर हैं, जिन्होंने लँकापुरी को दग्ध करके देवगणों को आनन्द प्रदान किया है, जो सम्पूर्ण अर्थ सिद्धियों के आगार और लोक विश्रुत प्रभावशाली हैं, उन अनन्त पराक्रमशील श्री हनुमान जी का हम प्रातः काल में स्मरण करते हैँ।

*उल्लंघ्य सिंधो: सलिलं सलीलं*
*य: शोक वन्हिं जनकात्मजाया:*
*आदाय तेनैव ददाह लंकां*
*नमामि तं प्रांजलिराञ्जन्नेयम्*

ऐसे श्री हनुमान जी जिन्होंने सिंधु की अगाध जलराशि को लीला ही लीला में लांघकर तथा श्री जानकी जी की शोकाग्नि को लेकर उसी से लंका को फूंक डाला, उन आंजनेय श्री हनुमान जी की हम सभी हाथ जोड़कर वन्दना करते हैं।

श्री हनुमान जी के श्रीचरणों से प्रार्थना करते हुये उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण करायें कि हे प्रभू! आप ही हैं जो हमें पिछले कई वर्षों से चल रही इस कोरोना नामक बीमारी से मुक्ति दिला सकते हैँ।

*कहहिं रीछपति सुनु हनुमाना*
*का चुप साधि रहेऊ बलवाना*
*पवन तनय बल पवन समाना*
*बुद्धि विवेक विग्यान निधाना*
*कवन जो काज कठिन जग माहीं*
*जो नहीं होई तात तुम चाहीं*

हे संकटमोचक जगत में ऐसा कौन सा कार्य है जो आप नही कर सकते, इसलिये हे प्रभू! हम सबकी रक्षा करो! रक्षा करो!

श्रीहनुमान जी की असीम कृपा से हम सभी सदैव सुखी, स्वस्थ, समृद्ध,निरोगी एवं दीर्घायु हों। हे देव! इस संसार में कोई भी दुखी न हो ।सबकी मनोकामनाए पूर्ण हों, श्रीचरणों से प्रतिपल यही कामना व प्रार्थना करते हैं।

@पं०/ई०सुन्दर लाल उनियाल (मैथिल ब्राह्मण)