सौर श्रावण मास, अधिक श्रावण मास समयावधि

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सौर श्रावण मास, अधिक श्रावण मास समयावधि 365 दिन 06 घण्टे 09 मिनट व लगभग 11 सेकेण्ड का होता है एक सौर वर्ष 29 दिन 31 घटी 50 पल 7/5 विपल का होता है चान्द्र मास

सौर श्रावण मास, अधिक श्रावण मास समयावधि

365 दिन 06 घण्टे 09 मिनट व लगभग 11 सेकेण्ड का होता है एक सौर वर्ष

29 दिन 31 घटी 50 पल 7/5 विपल का होता है चान्द्र मास

इस वर्ष चार जुलाई से सोलह जुलाई तक रहेगी कांवड़ यात्रा

हमारे धर्म शास्त्रों में भूगर्भीय सर्वेक्षण, सौर परिवार का विशद विश्लेषण, सूर्य चन्द्र की गति का वर्णन कर समाज को एक समुचित दिशा प्रदान की गई है। सात दिन का सप्ताह, इसके बाद पन्द्रह दिन का पक्ष चन्द्रमा की कलाओं की वृद्धि से शुक्ल पक्ष व ह्रास से कृष्ण पक्ष का निर्धारण किया गया है। दो पक्ष का एक माह और बारह मास की समयावधि एक वर्ष।

प्रस्तुतिः ज्योतिषाचार्य हर्षमणी बहुगुणा

भारतीय गणना के अनुसार नौ तरह के मास, उनमें चार प्रकार के मासों का प्रचलन (सौर, चान्द्र, नाक्षत्र और सावन मास) है। सौर मास और सौर वर्ष का प्रचलन व्यावहारिक रूप से चलन में है, एक सौर वर्ष 365 दिन 06 घण्टे 09 मिनट, व लगभग 11 सेकेण्ड का होता है। जबकि चान्द्र मास 29 दिन 31 घटी 50 पल 7/5 विपल का होता है और चान्द्र वर्ष 354 दिन का होता है। इस तरह एक सौर वर्ष व चान्द्र वर्ष में साढ़े ग्यारह दिन का अन्तर होता है, इस अन्तर को दूर करने के लिए लगभग बत्तीस माह बाद एक चान्द्र मास बढ़ जाता है जिसे अधिक मास की संज्ञा दी जाती है।

प्रायः हर तीसरे वर्ष एक अधिक मास आता है जिसे मलिन मास, पुरुषोत्तम मास, अधिक मास कहा जाता है, हर उन्नीस वर्ष बाद लगभग उसी महीने अधिक मास होता है पर आश्विन मास को छोड़ कर अन्य महीनों में इस तरह का प्रतिबन्ध कम है। (इसे अलग से समझा जा सकता है) इस वर्ष श्रावण में अधिक मास है अधिक मास सौर श्रावण होगा।

अतः चान्द्र श्रावण दो महीने का होगा जो चार जुलाई से इकतीस अगस्त तक रहेगा। सौर श्रावण सत्रह जुलाई से सोलह अगस्त तक है। श्रावण में कांवड़ यात्रा शुरू होती है जो गुरु पूर्णिमा के बाद कृष्ण प्रतिपदा से प्रारम्भ होकर कृष्ण चतुर्दशी तक चलती है, इस वर्ष चार जुलाई से सोलह जुलाई तक कांवड़ यात्रा रहेगी। पन्द्रह जुलाई सायंकाल साढ़े आठ बजे से जलाभिषेक किया जाएगा जो सोलह जुलाई रात दस बजे तक किया जा सकता है।

मूलतः जलाभिषेक की शिवरात्रि पन्द्रह जुलाई को है। आज आम आदमी को एक भ्रम पैदा हो जाता है कि श्रावण माह प्रारम्भ ही नहीं हुआ और सोशल मीडिया, टीवी चैनलों पर व मैदानी इलाकों में कैसा श्रावण मास है। अतः भ्रम की इस स्थिति का निवारण आवश्यक है। जागरूक जन मानस का यह दायित्व है कि स्वयं भी समुचित जानकारी रख कर जन समुदाय को भी सही जानकारी प्रदान करेंगे।

इस विषय पर अनेक लोगों ने अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। आशा है इस सन्देश के माध्यम से कुछ सहायता मिल सकेगी। अधिक मास के कारण चान्द्र श्रावण 59 दिन का होगा व सौर श्रावण 31 दिन का ही रहेगा। सत्रह जुलाई को संक्रांति है सोलह अगस्त तक श्रावण, व सत्रह अगस्त से भाद्रपद प्रारम्भ होगा।

अधिक मास की गणना के कारण हमारे पर्वों व त्यौहारों पर कोई असर नहीं पड़ता है। यही भारतीय जन मानस की अनुपम भेंट है, अन्यथा मुस्लिम त्योहारों की तरह हर साल (ईद आदि) ग्यारह दिन पहले आते रहते।

धन्य हैं ऐसे मनीषियों को, धन्य है ऐसे देश को। एक बार भारत माता की जय बोलने की आवश्यकता तो है ही, अतः भारत माता की जय, जय हिन्द, वन्दे मातरम्। जय श्री कृष्णा, जय सियाराम।

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