गृहस्थी के साथ संत भी हैं श्री तिलकराम चमोली, मोटर मैकेनिक व्यवसाय छोड़कर बने कथावाचक

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    गृहस्थी के साथ संत भी हैं श्री तिलकराम चमोली, मोटर मैकेनिक व्यवसाय छोड़कर बने कथावाचक
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    गृहस्थी के साथ संत भी हैं श्री तिलकराम चमोली, मोटर मैकेनिक व्यवसाय छोड़कर बने कथावाचक

    स्वाध्याय के बलबूते करते हैं हनुमान कथा, रामचरितमानस, श्रीमद्देवीभागवत पुराण, शिवपुराण, श्रीमद्भागवत गीता आदि अनेक ग्रंथों का कथा वाचन

    गृहक्षेत्र में स्थापित किया नरसिंह देवता धाम

    कथावाचक और संत श्री तिलकराम चमोली जी से इसलिए स्नेह और प्रेम नहीं करता कि वह मेरे मित्र हैं। मेरी उनसे इसलिए श्रद्धा होने का कारण यह नहीं है कि वह एक अच्छे कथावाचक हैं और शास्त्र मर्मज्ञ हैं। इसलिए उनसे स्नेह और प्रेम और श्रद्धा है, क्योंकि वह अपने तपोबल के द्वारा 24 कैरेट का खरा सोना बने हैं।

    सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’

    श्री तिलकराम चमोली जी 90 के दशक के पूर्वान्ह में जब चंबा आए और उन्होंने अपना छोटा सा कारोबार शुरू किया, तब से उन्हें जानता हूं। किसी बड़े विश्वविद्यालय में जाकर न उन्होंने तकनीकी ज्ञान हासिल किया, बल्कि मेहनत और लगन के बलबूते वह एक अच्छे मोटर मकैनिक बने और जीवन यापन करने लगे। उनकी नियमित दिनचर्या के साथ एक मेहनती इंसान होने के कारण उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई।

    सरल और सरस स्वभाव के श्री तिलकराम चमोली बचपन से ही हंसमुख व्यक्ति हैं और उनके अंदर ब्राह्मणत्व के सभी गुण मौजूद हैं। मन, वचन और कर्म से एक अच्छे धार्मिक व्यक्ति के रूप में 4 दशकों से उन्हें देखा- परखा है। उनकी विनम्रता, सहनशीलता और सद्गुणों से कायल होना स्वाभाविक है।

    मोटर मकैनिक के कार्य के साथ-साथ श्री तिलकराम चमोली जी ने अपने स्वाध्याय के बल पर पंचाग, जन्म पत्रियां देखनी शुरू की। गणित और फलित तथा शास्त्रों का अध्ययन किया। यह उनकी लगन, निष्ठा और मेहनत का फल था कि किसी विश्वविद्यालय में पढ़े-लिखे शास्त्री और आचार्य के समकक्ष उन्होंने अपने को स्थापित किया।

    भले ही उन्होंने कभी किसी महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय में अध्ययन नहीं किया लेकिन स्वाध्याय के बलबूते हनुमान कथा, रामचरितमानस, श्रीमद्देवीभागवत पुराण, शिवपुराण, श्रीमद्भागवत गीता आदि अनेक ग्रंथों का अध्ययन किया और जनसमूह के बीच वह वाचन भी करने लगे।

    शुरुआत में भले ही उन्हें कठिनाई हुई होगी लेकिन आज वे अपने विषय के मर्मज्ञ हैं। उनकी मेहनत रंग लाई है। एक अच्छे कथावाचक के रूप में उन्होंने अपने को स्थापित किया और अनेक बार व्यास पीठ पर आसीन होकर लोगों को सनातन धर्म की रोचक और सुसंगत जानकारियां प्रदान की हैं।

    एक धार्मिक व्यक्ति होने के नाते तथा बजरंगबली की कृपा सदा उनके साथ रही। वह नियमित अपने इस नए क्षेत्र में आगे बढ़ते गए। उन्होंने अपने मूल स्थान में नरसिंह धाम की स्थापना कर नवाचार किया। जो कार्य असंभव माने जाते थे, स्वाध्याय के बलबूते उन्होंने उन कार्यों को वह बखूबी निभाया। श्री तिलकराम चमोली शुद्ध शाकाहारी व्यक्ति हैं। आहार-विहार का उचित ध्यान रखने वाले तथा संयमित दिनचर्या में जीने वाले इंसान हैं।

    भले ही वह गृहस्थी हैं लेकिन किसी संत से कम नहीं। अनेकों बार उनकी कथाओं का श्रवण करता हूं और विचार करता हूं कि यदि व्यक्ति के अंदर लगन और कार्य के प्रति समर्पण हो तो असंभव कुछ भी नहीं है। मैं उनकी तुलना अमेरिकन कवि वाल्ट व्हिटमैन से करता हूं जिन्होंने बिना स्कूली शिक्षा ग्रहण किए लीव्स आफ ग्रास जैसे विश्व प्रसिद्ध कृति की रचना की जोकि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में विश्व स्तर पर पढ़ाई जाती है।

    हमारे समाज में अनेकों ऐसी प्रतिभाएं हैं जो परिस्थिति बस उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाए लेकिन सतत् आगे बढ़ने की लगन, अथक परिश्रम अच्छी भावनाओं और सकारात्मक सोच के कारण उनका सम्मान है। साथ ही अर्थोपार्जन भी कर रहे हैं।

    श्री तिलक राम चमोली जैसे व्यक्ति एक अनुकरणीय इंसान हैं और अनेक लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनका संपूर्ण परिवार पवित्र धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यहां तक कि उनके पुत्र विनोद चमोली ने चंबा सरस्वती शिशु मंदिर के समीप हनुमान जी का भव्य मंदिर निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है जो की एक मिसाल है। अभी वह ब्रह्मचर्य धर्म निभा रहे हैं। पूर्ण रूप से एक संत के गुण उनके अंदर भी हैं। एक अच्छे पत्रकार और सुयोग्य पिता के सुयोग्य पुत्र भी हैं। मैं श्री तिलकराम चमोली जी के आदर्शों की सराहना करते हुए उनके व्यक्तित्व और उनके अर्जित ज्ञान तथा प्रभु अनुकंपा को नमन करता हूं।

    (कवि कुटीर)
    सुमन कालोनी चंबा,टिहरी गढवाल।

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