शहीद सम्मान यात्रा का चंबा में पुरानी टिहरी रोड़ स्थित पार्किंग के ऊपर हुआ सम्मान

शहीद सम्मान यात्रा का चंबा में पुरानी टिहरी रोड़ स्थित पार्किंग के ऊपर हुआ सम्मान
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी रहे मुख्य अतिथि, महिलाओं को हुई टॉयलेट, शौचादि जाने की दिक्कत

शहीद सम्मान यात्रा के चंबा पहुंचने पर शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया गया।  42 शहीद परिजनों को ताम्रपत्र और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। 02 शहीद परिजनों ने उनकी मांग पूरी न होने के कारण सम्मान नहीं लिया।

[su_highlight background=”#091688″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी @कवि: सोमवारी लाल सकलानी, निशांत, चम्बा [/su_highlight]

जैसा कि विदित है कि यह शहीद सम्मान यात्रा  सैन्य धाम निर्माण हेतु आयोजित की जा रही है। विभिन्न युद्धों में शहीद सैनिकों के आंगन की मिट्टी एकत्रित कर देहरादून के गुनियाल गांव में सैन्य धाम का निर्माण किया जाना है।जगह जगह पर इस प्रकार की सम्मान समारोह आयोजित की जा रही हैं। यह सेना द्वारा आयोजित  कार्यक्रम नहीं बल्कि सरकारी कार्यक्रम है।

शहीद सम्मान यात्रा का चंबा में पुरानी टिहरी रोड़ स्थित पार्किंग के ऊपर हुआ सम्मान

जिला सैनिक कल्याण परिषद इस कार्यक्रम की आयोजक है। कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री (उत्तराखंड) गणेश जोशी, क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर धन सिंह नेगी, नगर पालिका परिषद की सम्मानित अध्यक्ष श्रीमती सुमन रमोला, पूर्व सैनिक संगठन के संरक्षक श्री इंद्र सिंह नेगी, चंबा ब्लॉक प्रमुख शिवानी विष्ट, सीडीओ नवामि बंसल आदि सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

शहीद सम्मान यात्रा का चंबा में पुरानी टिहरी रोड़ स्थित पार्किंग के ऊपर हुआ सम्मान

[irp]अफसोस की बात का है कि इतने बड़े कार्यक्रम में जहां बुजर्ग मातायें, शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मान के लिए आमंत्रित किया गया, वहां पर शौचालय की व्यवस्था न होना आश्चर्य जनक है।  दूरदराज के क्षेत्रों से आयी हुई सैनिक माताएं, वीरांगनाएं, बुजुर्ग, टायलट और शौच आदि व्यवस्थाओं के लिए दर-दर भटकते रहे।  कुछ लोगों का सहयोग करके, उन्हें पेट्रोल पंप स्थित शौचालय में ले जाया गया लेकिन अधिकांश लोग खुले में टॉयलेट करने के लिए मजबूर हुए।  इतनी बड़ी पार्किंग और जिसके मुख्य अतिथि स्वयं सैनिक कल्याण मंत्री हों, वहां पर शौचालयों में ताले खोलने की जरूरत किसी को महसूस नहीं हुई है। अच्छा होता कि कार्यक्रम स्थल पर शौचालय की भी व्यवस्था होती। जहां इतना भव्य कार्यक्रम किया गया, नगर पालिका परिषद के कुछ स्वच्छक भाइयों को भी वहां पर  लगाया जा सकता था। मेरी थोड़ा बहुत पारिश्रमिक भी देकर व्यवस्था की जा सकती थी।

स्वच्छ भारत मिशन माननीय प्रधानमंत्री जी की महत्वकांक्षी योजना है और चंबा शहर को स्वच्छता के लिए ए प्लस प्लस  का दर्जा , प्रदेश में द्वितीय और राष्ट्रीय स्तर पर 52 वा स्थान मिला है और शहर में इतने बड़े कार्यक्रम जो कि शहीद सैनिकों के सम्मान में रखा गया, शौचालय पर ताले चढ़ा होना बहुत हीदुखद पहलू है। हो सकता है किसी तकनीकी कारण से शौचालयों को न खोला गया हो लेकिन आपातकालीन या तत्काल व्यवस्था होनी भी जरूरी है। किसी भी कार्यक्रम को आयोजित करने से पूर्व उस कार्यक्रम की मॉनिटरिंग होती है और देखा जाता है कि सुरक्षा और सुविधा मे खामियां न हों।

[irp]शौचादि हमारी नियमित प्रक्रिया का अंग है। उसकी व्यवस्था करना आयोजकों के लिए लाजमी होता है। अतः ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल पर स्थाई या अस्थाई  शौचालय की व्यवस्था होना महत्वपूर्ण है। अन्यथा एक ओर सम्मान किया जा रहा है और दूसरी ओर सम्मानित होने वाली माताएं, बहनें और बुजुर्ग  यूरिनल या शौच जाने के लिए दिन भर भटकती रहें ।यह असंगत है। किसी भी समारोह की उपयोगिता तब समझी जाती है जब उस कार्यक्रम में बुलाए गए लोग, जिन्हें सम्मानित करना होता है, उन्हें उनकी सुविधा का भी ध्यान रखा जाए।