रामनवमी: केवल भारतीयों के ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के प्राणाधार हैं भगवान श्री राम 

रामनवमी: केवल भारतीयों के ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के प्राणाधार हैं भगवान श्री राम


 

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पावन चरित्र का गान, श्रृद्धापूर्वक श्रवण व अनुकरण से होती है परम सुख की प्राप्ति 

आज भगवान राम का प्राकट्योत्सव है, आज का दिन विश्व के लिए सौभाग्य का दिन है। भगवान श्री राम केवल भारतीयों के श्रीराम ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के प्राणाधार हैं, श्रीराम को मात्र हिन्दू धर्म की सम्पत्ति मान कर मर्यादा पुरुषोत्तम के गुणों को कम करना होगा जबकि भगवान श्री नारायण एक देश या एक धर्म की अथवा किसी व्यक्ति विशेष की सम्पत्ति नहीं हो सकते हैं वे परमेश्वर सबके साथ हैं सबके परमपिता हैं। यदि कोई भी व्यक्ति मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पावन चरित्र का गान, श्रवण व अनुकरण श्रृद्धापूर्वक करता है तो वह परम सुख की प्राप्ति करता है।

सरहद का साक्षी @आचार्य श्री हर्षमणि बहुगुणा

प्रभू श्रीराम आदर्श की प्रति मूर्ति थे, उनकी तुलना में और कोई नहीं हो सकता है। आज श्रीराम का जन्मोत्सव है, क्या अनुपम लीला है, भगवान का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ जब नव वर्ष का उल्लास मनाया जा रहा था, मां जगदम्बा की पूजा अर्चना और उसका प्रतिफल / परिणाम भगवान का अवतरण।

आज के दिन हम राम, सीताराम या रामाय नमः का जप कर अपना कल्याण कर सकते हैं। सावधानी पूर्वक सत्य भाषण करें। यह आवश्यक है इन नौ दिनों तक रामायण का पाठ किया जा सकता है या सुना जा सकता है। व्रत लोक रंजन के लिए नहीं अपितु आत्म ज्ञान के लिए किया जाना श्रेयस्कर है। व्रत का अभिप्राय केवल अन्न का त्याग नहीं अपितु सांसारिक कुवृत्तियों के त्याग का व्रत उपवास आवश्यक है। मुमुक्षु जन आत्मकल्याण के लिए राम नवमी का व्रत रखें, आज के दिन राम की प्रतिमा का दान करना लाभ प्रद है।

रामनवमी हमें यह सन्देश देती है कि हम अपने को शुद्ध करें, ज्ञान का विस्तार करें, आत्मा का परमात्मा के साथ समभाव, सहभाव सहित मिलाप करें और जो कुछ भी करें वह सब ‘श्रीरामार्पण’ करें। यह सब जानते हैं कि महाराज दशरथ के घर आज मध्याह्न में भगवान श्री राम का प्राकट्य हुआ। अतः जन्मोत्सव सभी उत्सवों में विशेष होता है।

नवरात्र का नवम दिवस भगवती दुर्गा की आराधना का समापन व जगन्नाथ के आगमन का उल्लास जितना भी हो न्यूनतम ही है। यह नवरात्र देवी नवरात्र के साथ राम नवरात्र के नाम से भी जाना व माना जाता है तथा इसी रूप में प्रसिद्ध भी है। “किमधिकम्” श्रीराम जय राम जय जय राम के साथ मंगलमय भविष्य की हार्दिक शुभकामना।