कवि के मन की बात: 2012 के चुनाव से पूर्व धनै का आदमी! 

कवि के मन की बात: 2012 के चुनाव से पूर्व धनै का आदमी! 
Ex Cabinet Minister Dinesh Dhanai
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2012 के चुनाव से पूर्व चंबा चौक में एक बार मेरे एक अजीज मित्र ने कहा,” गुरु जी ! आप तो धनाई के आदमी हैं।” मैं चौंक पड़ा। भला में धनै का आदमी क्यों ? मैं तो सरकारी आदमी हूं। सरकारी सेवा नियमावली से बंधा हुआ व्यक्ति हूं। सरकारी सेवक नियमावली को भलीभांति से जानता भी हूं। फिर भी आपने कैसे कह दिया कि मैं धनाई का आदमी हूं ?”

[su_highlight background=”#880e09″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी, @कवि:सोमवारी लाल सकलानी, निशांत [/su_highlight]

“माफ करना गुरुजी, आप अक्सर दिनेश जी की चर्चा और सराहना करते रहते हैं। उनकी विकासवादी सोच की चर्चा करते हैं। जब कुछ लोग उन्हें राजनीति के कारण, अपशब्द कहते हैं तो आप विरोध करते हैं। इसलिए मैंने कहा कि आप धनै के आदमी हैं।” मैने उत्तर दिया, “भाई ! दिनेश धनै के साथ मेरे न कोई राजनीतिक संबंध हैं, न रिश्तेदारी के संबंध हैं, न गांव के संबंध हैं, न मित्र और सहपाठी के संबंध हैं, बस ! संबंध हैं तो प्रजातांत्रिक मूल्यों के। प्रजातांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत जो क्षेत्रीय विकास की बात करता है मैं उसके साथ रहता हूं। उसके सराहना करता हूं। उसके कार्यों की सराहना करता हूं।

मैं सदैव धर्मांधता, और कट्टर जातिवाद का विरोधी रहा हूं। मैं हमेशा क्षेत्रीय विकास की बात करता हूं, लेकिन क्षेत्रवाद और जातिवाद की हमेशा निंदा करता हूं। श्री दिनेश धनै के अंदर मैं राजनीतिक हुनर पाता हूं इसीलिए उनकी सराहना करता हूं। इसके अलावा और कुछ नहीं। सरकारी सेवक हूं। निष्पक्ष चुनाव कराना ही हमारा राजधर्म है। आज बस इतना ही।”  समय गुजरता गया। उस अजीज मित्र की बात दिन-रात मेरे दिमाग में आती रही कि उन्होंने क्यों कहा कि मैं दिनेश धनै का आदमी हूं !

संयोग की बात है कि 2012 के चुनाव में श्री दिनेश धनै चुनाव जीत गए। एक अजनबी ने फिर कहा, “बधाई है, सर। आपका आदमी जीत गया। धनाई जीत गया है।” मैं फिर चौंक गया कि आखिरकार समाज मुझे दिनेश धनाई के आदमी के रूप में कैसे स्वीकार कर गया ! उनके प्रति मेरे मन में लगाव और स्नेह उनके विकासवादी सोच के कारण था। चर्चा हर समय उनके कानों तक भी रही होगी। वे विधायक बने। फिर माननीय कैबिनेट मंत्री बने और उन्होंने मुझे गुरुजी के रुप स्वीकार किया न कि सरकारी सेवक/ मास्टरजी के रूप में।

अक्सर हर दु:ख- सुख में, धार्मिक अनुष्ठानों में, सामाजिक कार्यों में, जब जब मैंने समस्त गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनेताओं,अपने सगे संबंधियों,मित्रों आदि को याद किया, आमंत्रित किया तो राजनेताओं में श्री दिनेश धनै सबसे पहले पहुंचे। ऐसे व्यक्ति थे, जो हर समय उपलब्ध रहे और कार्य निष्पादन तक ढाल की तरह बने रहे।

लोगों की धारणा और मजबूत हो गई। अब तो नाते- रिश्तेदार, मेरे सगे- संबंधी सब कहने लगे कि मैं धनै जी का खास आदमी हूं।
जब सबने दिनेश धनै के आदमी की मुहर मेरे ऊपर लगा दी तो सेवानिवृत्ति के बाद मैंने निर्णय लिया। एक सामाजिक व्यक्ति होने के नाते, प्रजातंत्र में विश्वास करने के कारण, किसी न किसी विचारधारा के साथ रहना पड़ेगा।

मंथन करने के बाद मैंने निर्णय लिया कि मैं सदैव विकास के साथ रहूंगा। आज के समय सिद्धांत विहीन राजनीति का खुला बितंडावाद सबके सामने है। और मैं दिनेश धनै के आदर- सम्मान और दिए गये सम्मान का ऋण चुकाने के लिए, मैं उनके साथ हूं और वास्तव में उनका आदमी बन गया।

बस ! यही एक छोटी सी कहानी है। मैं अपने उस अजीज मित्र की बात को कभी जीवन में भूल न पाऊंगा कि मै दिनेश धनै का आदमी हूं। दिनेश धनै क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय भावना से सदैव ओतप्रोत होकर कार्य करेंगे तो मुझे उनका आदमी होने पर सदैव फक्र रहेगा। फिलहाल केवल इतना ही। जब मैं दिनेश धनै का आदमी हूं और आप ने मान लिया तो मेरा आपसे करबद्ध अनुरोध है कि श्री दिनेश धनै को अपना आशीर्वाद देंगे।