कविता: बसन्त आ गया

play icon Listen to this article

मौसम का मिजाज, बसन्त का आगमन बता रहा।

डाळी-डाळी फूलों से लदी, नववर्ष आ गया।।

बुरांस खिले हैं, मेलू-आड़ू ने रंग बिखेरा।

फ्यूंली के पीलेपन ने, प्रकृति को निखारा।।

फूलों के रंग में रंग गया, तन-मन सारा।
बसन्त के फूलों ने, प्रकृति का रंग निखारा।।
नव-कोंपलियों से लद गए पेड़-पौधे सारे।
फूलों से सजधज गए प्रकृति के नजारे।।
चिड़ियों की चहक, भौरे गुजन कर रहे।
रंग-बिरंगे फूलों से तितलियां रस ले रही।।
भांति-भांति के फूलों से, प्रकृति रंगीन हो गई।
बसन्त के आगमन से, प्रकृति मदमस्त हो गई।।
मौसम का मिजाज, बसन्त का आगमन बता रहा।
डाळी-डाळी फूलों से लदी, नववर्ष आ गया।।

[su_highlight background=”#880e09″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी @डॉ. दलीपसिंह बिष्ट[/su_highlight]