कविता : सुरम्य शहर है चंबा

कविता
play icon Listen to this article

यह स्वच्छ शहर है चंबा। त्रिहरी हृदय स्थल चंबा।
शुचि चतुष्पदों में सज्जित, सुरम्य शहर है , चंबा।
एक भाग जब दिखता है, अगला अगवाई करता,
तृतीय इंतजार में बैठा, मन सुमन कालोनी हरता।

वीर गबरसिंह नगर मनमोहक, मन निशांत है रमता।
बाल्यकाल से यौवन तक, यह क्षेत्र दिल में बसता।
प्रौढ़ावस्था में सुख देता, साधनयुक्त नित है बनता।
दिल का दर्पण शहर सुहाना, नगर हमारा यह चंबा।

चंबा का इतिहास नया है, वीसी वीर गबर सिंह लाया।
शौर्य स्मारक जब बना चौक में, चंबा तभी से भाया।
श्रीदेव सुमन स्मृति जुड़ी हैं, कालेज तक सीमित थी।
टिहरी के विस्थापन से भी , यह नगरी ख़ूब फली है।

@कवि : सोमवारी लाल सकलानी, निशांत।