गड़बड़ झाला: विकास कार्यों की जांच को लेकर गंभीर नहीं हैं अधिकारी ग्रामीणों ने लगाया लापरवाही का आरोप

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ग्राम पंचायत खम्बाखाल में ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए विकास कार्यों की जांच का मामला विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण लंबित पड़ता जा रहा है।

[su_highlight background=”#091688″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी, खंबाखाल[/su_highlight]

वीडीओ द्वारा जांच के आदेश जारी कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित तो किया गया, लेकिन वे जांच करने मौके पर नहीं पहुंचे। वहीं ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए कार्यों की जांच की मांग करने वाले ग्रामीणों ने विकास विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विभाग कार्यों की जांच को लेकर गंभीर नहीं है।

प्रतापनगर विकासखंड की ग्राम पंचायत खंबाखाल का मामला

[irp]मामला प्रतापनगर विकासखंड की ग्राम पंचायत खंबाखाल का है। जहां गांव निवासी व राज्य आंदोलनकारी शशिभूषण भट्ट, सुरेंद्र प्रसाद, हरि प्रसाद भट्ट, भवानी शंकर और उप प्रधान हरि प्रसाद ने मनरेगा लोकपाल के यहां शिकायत दर्ज कराई कि उनकी ग्राम पंचायत में करीब 40 लाख रुपए के विकास कार्य किया जाना बताया गया है, जिसकी जांच की जाए।

इस पर मनरेगा लोकपाल ने खंड विकास अधिकारी को जांच कराने के आदेश दिए। इसके बाद खंड विकास अधिकारी द्वारा मनरेगा लोकपाल को एक जांच रिपोर्ट दी गई, लेकिन ग्रामीण इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थे। उसके बाद मनरेगा लोकपाल ने बीते 18 नवंबर को खंड विकास अधिकारी प्रतापनगर को निर्देश दिए कि मामले की सही प्रकार से पुनः जांच की जाए।

[irp]शिकायतकर्ता ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में सूचना के अधिकार के तहत ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की जानकारी जब उन्होंने ली थी, तो विकासखंड द्वारा ग्राम पंचायत में जो विकास कार्य होने बताए गए हैं वैसा धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है इसलिए कार्यों की जांच की मांग विभागीय अधिकारियों से की गई।

बताते चलें कि मनरेगा लोकपाल द्वारा पुनः जांच के निर्देश देने के के बाद बीडीओ ने जांच के लिए सहायक खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी और कनिष्ठ अभियंता लघु सिंचाई को नियुक्त किया और उन्हें आदेशित किया कि वह 4 दिसंबर को शिकायतकर्ता ग्रामीणों की मौजूदगी में गांव में विकास कार्यों की जांच करें। लेकिन 4 दिसंबर को शिकायतकर्ता तो मौके पर पहुंचे लेकिन जांच करने वाले गांव नहीं गए। जिससे ग्रामीणों में रोष है।

[irp]उनका कहना है कि विभाग द्वारा इस मामले में लापरवाही बरती जा रही है। विकास कार्यों की जांच की मांग करने वाले राज्य आंदोलनकारी शशिभूषण भट्ट, सुरेन्द्र प्रसाद सेमवाल का कहना है कि इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में बीडीओ द्वारा उन्हें जांच के दिन गांव में उपस्थित रहने की जानकारी भी नहीं दी गई। उन्हें केवल मनरेगा लोकपाल की ओर से ही सूचना दी गई। उनका कहना है कि गांव में जो भी विकास कार्य कराए गए हैं उसकी सही प्रकार से जांच होनी चाहिए और इसमें दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ कार्यवाही हो।

इस मामले में बीडीओ दिनेश चंद्र चमोला का कहना है कि निर्धारित तिथि को जो लोग जांच के लिए अधिकृत किए गए थे, वे जांच करने नहीं गए। इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी इस मामले को लेकर सीडीओ और डीडीओ को अवगत कराया जाएगा।

[irp]वहीं कार्यों की जांच के लिए दूसरी तिथि तय की जाएगी। इस मामले में मनरेगा लोकपाल जेपी नौटियाल का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए खंड विकास अधिकारी को लिखा गया है।