खानपुर विधायक के पत्रकार मित्र की भूमि पर कब्जा

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खानपुर के दबंग विधायक और पत्रकार उमेश शर्मा के पत्रकार मित्र ओम रतूडी की भूमि पर कब्जा करने की खबर है।

खानपुर विधायक के पत्रकार मित्र की भूमि पर कब्जा

उत्तराखंड में राष्ट्रीय सहारा के संस्थापक, हरियाणा में दैनिक भास्कर, पंजाब और चंडीगढ़ में दैनिक जागरण, बंगलुरु में दैनिक शुभ लाभ में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके ओम रतूडी पूर्व में उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार संघ के महामंत्री भी रह चुके हैं। उनकी पुश्तैनी भूमि पर विधायक की नाक के नीचे सरेआम भूमि पर कब्जा हो रहा है।

मामला, अजबपुरकलां स्थित विस्थापित टिहरी नगर से जुड़ा है।यहां, एक सरकारी अधिकारी ने एक मूल आवंटी के प्लाट पर बाउंड्री वाल बना डाली। जिससे मूल आवंटी ओम रतूडी की भूमि के पिछले हिस्से में 3 फीट भूमि घट गई है।

टिहरी के वार्ड नम्बर 8 के निवासी और भाजपा के पूर्व जिला कोषाध्यक्ष स्व.प्रभु दयाल रतूडी के भतीजे ओम रतूड़ी बीते कई वर्षों से काम के सिलसिले में उत्तराखंड से बाहर के प्रदेशों में कार्य करते रहे और अपनी भूमि पर निर्माण नहीं करवा पाए।

उन्होंने मुख्यमंत्री और पुनर्वास निदेशक को लिखे शिकायती पत्र में कहा है कि उनका 250 स्क्वायर मीटर का आवासीय प्लाट टिहरी नगर में प्रतापनगर के विधायक विक्रम सिंह नेगी के घर के पीछे सेक्टर 2 में है।
यहां,e1, e2 और e3 प्लाट पर निर्माण नहीं है और उनका प्लाट e2 क्रम में e3 से पहले है। लेकिन अचानक एक सरकारी अधिकारी ने e3 प्लाट को खरीदने की बात कह अपनी बाउंड्री बनानी शुरू कर दी और ई2 प्लाट के पिछले हिस्से में 3 फीट भूमि को कवर कर लिया।
यहां टिहरी मूल विस्थापित समिति के महासचिव गिरीश पैन्यूली कहते हैं कि टिहरी के मूल विस्थापितों के साथ अन्याय हो रहा है।

राष्ट्रीय हित में अपनी भूमि, मकान देने वाले टिहरी शहर के मूल विस्थापित आज संकट में हैं , वे अन्याय का शिकार हो रहे हैं। भू माफिया, टिहरी विस्थापित की जमीन औने पौने दामों में खरीदकर बेच रहे हैं । जिसका कारण है कि रजिस्ट्री न होने के कारण वे भवन निर्माण व मरम्मत के लिये बैंक से ऋण नहीं ले पाते हैं। इसलिए वे अपनी प्रोपर्टी को औने पौने दामों में बेचने के लिये मजबूर हो जाते हैं।

उनका कहना है कि पता चला कि कुछ विस्थापितों ने अपने प्लाट सरेंडर किये हैं, उनको फर्जी आवंटन भी किया है रहा है। ऐसे में एक वरिष्ठ पत्रकार और मूल आवंटी जो धन की कमी औऱ समय न होने के कारण अपने आवंटित लगभग 1.50करोड़ के प्लाट पर अपना मकान नहीं बनवा पाए , आज उनके प्लाट के पिछवाड़े पर , इ3 प्लाट वाले एक सरकारी अधिकारी ने अपना कच्चा निण करना शुरू कर दिया है। ई2 प्लाट के मूल आवंटी ओम रतूडी ने डीएम टिहरी और पुनर्वास निदेशक और मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेज कर मांग की है कि आखिर कोई कैसे बाद में आया खरीददार मूल आवंटी के प्लाट पर बाउंड्री वाल बना सकता है। मुझे मेरा पूरा प्लाट इसलिये दिया जाए क्योंकि e1, e2 और e3 पर निर्माण नहीं है और मेरा प्लाट e2 क्रम में e3 से पहले है। मेरे प्लाट का सीमांकन करवा कर विभाग अपना निशान लगवाए, यही प्रार्थना है।

अब हालात यह है कि ओम रतूड़ी के पत्र पर टिहरी के डीएम ने कार्रवाई के लिये पुनर्वास विभाग के डीजीएम को आदेशित किया, डीजीएम ने डीआरओ को आदेश कर दिये। लेकिन डीआरओ रूपेण का ट्रांसफर पावकी देवी कर दिया गया है। नए डीआरओ जॉइन करने के बाद छुट्टी चले गए हैं।

पत्रकारों, सामाजिक कार्यकरताओं ने प्रशासन और सरकार से ओम रतूड़ी को न्याय दिलवाने और उनकी भूमि से कब्जा हटवाने की मांग की है।

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