सुंदर स्मृतियां हमेशा मन-मस्तिष्क में बनी रहें, इन्हीं में हमारे अस्तित्व की झलक मिलती है

सुंदर स्मृतियां हमेशा मन-मस्तिष्क में बनी रहें, इन्हीं में हमारे अस्तित्व की झलक मिलती है


 

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विधानसभा चुनाव पूर्व अनेक सामाजिक और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ अपने ग्रामीण परिवेश की अनेकों धार्मिक और सांस्कृतिक विरासतों को देखने का भी मौका मिला। यद्दपि यह सभी विरासतें हमारे इर्द-गिर्द हैं लेकिन हम इनका अवलोकन करना तो दूर झांकते भी नहीं हैं।

[su_highlight background=”#880e09″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी @कवि:सोमवारी लाल सकलानी, निशांत[/su_highlight]

मेरे ही निवास स्थल के समीप ग्राम पंचायत बड़ा और छोटा स्यूटा, भंडार गांव आदि के निवासी लोगों ने कोविड-19 दौर के बाद भव्य शिवालय का निर्माण किया। मूर्ति की प्राण- प्रतिष्ठा के दिन मुझे मंदिर में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मां भगवती का ढोल बज रहा था। अनेकों ग्रामदेवता, कुलदेवता,ईष्ट देवताओं की पूजा हो रही थी। हवन गतिमान था।

सुंदर स्मृतियां हमेशा मन-मस्तिष्क में बनी रहें, इन्हीं में हमारे अस्तित्व की झलक मिलती है

आयोजकों के द्वारा भव्य भंडारे का प्रबंध किया गया था। इह अवसर पर गढ़भोज का आयोजन भी किया गया। 2 क्विंटल चावल का भात पकाया गया जो कि प्रसाद के रूप में भक्तों ने 04 सरोलों के हाथों परोसा गया। इसके साथ ही ईष्ट देव सदाशिव जी से मन्नत मांगी गई। अपने परिवार, घर- गांव और बच्चों की सुख समृद्धि की कामना कीगई। ईष्ट देवता सदाशिव जी सभी क्षेत्र वासियों की मनोकामना पूर्ण करें।

इसे अनुक्रम में पट्टी मखलोगी के नकोट फैगुल गांव में भी जाने का अवसर मिला। पीपल के पेड़ के नीचे भव्य शनी मंदिर का निर्माण किया गया है। दो विशाल पानी की टंकियों के समीप (एक निर्माणाधीन है)मंदिर का सौंदर्यीकरण भी किया गया है। बमुंड पट्टी के अंतर्गत ग्राम पंचायत ढुंगली, सौड़ आदि गांव भ्रमण के दौरान प्राचीन वास्तु कला से निर्मित भवनों का अवलोकन किया। जो कि हमारे लिए किसी ऐतिहासिक धरोहर से कम नहीं है। हमारे अस्तित्व को तलाश रहे हैं।

श्री देव सुमन जी के गांव जौल के समीप रिऊंटी गांव में एक पुराना मकान देखा जो किसी संग्रहालय से कम नहीं है। मैंने मकान मालिक से कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संजो कर रखें। भले ही आज कंक्रीटों के महलों में रहना पसंद करते हैं।

सुंदर स्मृतियां हमेशा मन-मस्तिष्क में बनी रहें, इन्हीं में हमारे अस्तित्व की झलक मिलती है
प्राचीनतम भावनों का महत्व आज भी जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआहै। अन्योन्याश्रित संबंध है और यह से हमें कायम रखना है।
अनेक आवासीय भवनों को देखते हुए मुझे आपने 04 फुट ऊंचे दरवाजों वाले पैतृक मकान का यह स्मरण हो आया। शिवालयों को देखते हुए जंघेश्वर महादेव जी का स्मरण हुआ। मां भगवती के मंदिरों को देखते हुए सुरकंडा माता का स्मरण हो आया। बूढी माता और बुजुर्गों को देखकर अपने स्व. माता- पिता जी की स्मृति मन मस्तिष्क में वापिस लौट गई। बच्चों को देखकर अपने नाती- पोते और स्कूलों के दिन याद आ गए और चुनाव के दिन का माहौल देखकर अपने स्थानीय मेले और पर्व भी याद आ गए। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस प्रकार कि इन सुखद अनुभूतियों को सदा मन में बनाये रखे।