सोमवार , जुलाई 4 2022
Breaking News
माता सुरकंडा की कुंडी (जलाशय) और धर्मात्मा स्व. कौंर देई

माता सुरकंडा की कुंडी (जलाशय) और धर्मात्मा स्व. कौंर देई

play icon Listen to this article

यूं तो मां सती के पावन स्थल सुरकुट पर्वत (सुरकंडा) के बारे में शायद ही कोई अनभिज्ञ हो। इस पर्वत शिखर का ऐतिहासिक, भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसके चतुष्पदों से निकलने वाली सदानीरा नदियां अपने अमृत रूपी जल से अवस्थित घाटियों तथा संपूर्ण देहरादून शहर की जलापूर्ति करती है।

सुरकंडा शिखर से निकलने वाली नदियों में सबसे बड़ी नदी सॉन्ग है। रायपुर नहर के द्वारा देहरादून शहर के एक बहुत बड़े क्षेत्र में इस नदी से जल आपूर्ति की जाती है।
जानते हैंं, कुछ इस बारे में _ टेहरी गढ़वाल में 10000 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित सुरकंडा शिखर केवल श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि इसका एक बहुत बड़ा भौगोलिक महत्व भी है।

माता सुरकंडा की कुंडी (जलाशय) और धर्मात्मा स्व. कौंर देई

[su_button background=”#881c0a” color=”#fffffe” size=”2″ radius=”5″ text_shadow=”0px 0px 0px #000000″]सरहद क साक्षी @कवि: सोमवारी लाल सकलानी निशांत[/su_button]

मंदिर के ठीक 100 मीटर के नीचे मां भगवती की कुंडी है। मेरा मानना है कि यही कुंडी सॉन्ग नदी का उद्गम स्थल है। इसी से निसृत हुए पानी से कालावन -तेगना तथा उनियाल गांव हवेली से आने वाली दो विपरीत धाराएं मजगांव (वीर नगर) के पास मिलती है। जिसका कि पुराना नाम जोड़ा गाड़ है और वहां से पावन संगम के रूप में है। वीरनगर से आगे यह गाड़, सॉन्ग नदी बन जाती है।

सुरकंडा पर्वत पर बनी हुई मां की कुंडी बहुत पावन और पवित्र जल की धारा है। इस कुंडी का पानी कभी सूखता नहीं है और यह भी मां का चमत्कार है कि शिखर पर पानी का स्रोत कैसे फूटा! मां सुरकंडा की कुंडी का पानी गंगा जल के समान है और जिसके पानी में कभी कीड़े नहीं पड़ते हैं।

🚀 यह भी पढ़ें :  चुनाव 2022: थौलधार के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलेंगे विधानसभा प्रभारी 

हमारे सकलाना क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों की मां बहनें जब सुरकंडा मंदिर में आती हैं, तो पवित्र कुंड का पानी भरकर शीशियों में ले आकर अपने पूजा गृह में रखती हैं और यह गंगा जल का कार्य करता है। किसी भी अनुष्ठान में प्रयुक्त होता है।

जानते हैं कि इस पानी की कुंडी का निर्माण संरक्षण किसने किया था- संवत 2009 जो कि चित्र पर भी अंकित है, कलावन- तेगना की नंबरदारन श्रीमती कौर देई पत्नी स्वर्गीय धर्म सिंह भंडारी ने इसका निर्माण करवाया।

आज से 67 साल पहले यह कुंडी निर्मित हुई थी और आज भी बरकरार है। नंबरदारन स्व. कौंर देई एक बहुत ही परोपकारी और धार्मिक महिला थी। अपने समय मेे वह बहुत ही समृद्ध शाली परिवार की मालकिन थी। भंडारी नंबरदार या सयाना भी थे।

आजादी से पूर्व जब सकलाना में सकलानी मुआफिदारों की जागीर थी तो वह समय हिमाचल प्रदेश से जोगिंदर नगर, भराडू गांव से श्री धर्म सिंह भंडारी सकलाना (टिहरी) आए थे वह चौलाई और आलू की फसल लगाना और खेती बाड़ी के ज्ञाता थे। साथ ही कोयले के भट्ठे को भी लगाना वह जानते थे। इसलिए उन्होंने सुरकंडा मजगांव की तरफ पढ़ने वाला सुरकंडा के नीचे वाला क्षेत्र सुरकार्द तक खेती के लिए मांगा।

श्री धर्म सिंह भंडारी अपने साथ अनेक लोगों को जोगिंदर नगर हिमाचल प्रदेश से लाए और घोर जंगल जैसे के नाम से यह कालावन के नाम से जाना जाता था, अपनी मेहनत के बल पर या क्षेत्र समृद्ध बनाया और सुरकंडा से लेकर के सुरकार्द मजगांव तक का क्षेत्र, सिंदूरी आलू , सब्जी उत्पादन, चौलाई और दालों के लिए मशहूर हो गया।
आजादी से कुछ वर्ष पूर्व जब सकलाना के मुआफिदार गजेंद्र दत्त सकलानी और सीनियर मुआफीदार, राजीव नयन सकलानी ने प्रजामंडल में सकलाना की घोषणा की, तो उस समय मुआफिदार जी ने, स्व. धर्म सिंह भंडारी के नाम सनद लिख दी और वह इस भू क्षेत्र के मौरूसी हकदार बन गए। कालावन के अधिकांश लोग वह समय खायकर के रूप में काश्तकार थे। बाद में सेटलमेंट के समय उनको आजादी के बाद भूमि का मौरूसी हक मिल गया।

🚀 यह भी पढ़ें :  शहीद बेलमती चौहान महाविद्यालय में उनके शहादत दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें किया याद

कुंडी के निर्माण करने वाली परोपकारी महिला स्व. कौर देई, जौनपुर प्रखंड के मथलेऊ गांव की थी। यह गांव उनका मायका था। नंबरदारन होने के कारण सफेद घोड़े पर बैठकर वह (जौनपुर) मथलेऊ से कालावन (सकलाना) आती जाती थी, ऐसा जानकार बताते हैं। इस परोपकारी महिला के पास अपनी मेहनत का अच्छा संपत्ति का भंडार भी था जो कि उन्होंने अनेक परोपकारी कार्यों में भी लगाया। सुरकंडा की कुण्डी, इसका एक सबूत है।

साठ के दशक से पर्यटन विकास के कारण तथा क्षेत्रीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार के कारण सुरकंडा शिखर तथा सुरकंडा मां सती के मंदिर का महत्व भी बढा और आज लाखों लोग यहां तीर्थाटन के लिए आते हैं।

पानी की समस्या के निदान के लिए कद्दूखाल स्थल से घोड़ा-खच्चरों से पानी ऊपर पहुंचाया जाता है। लेकिन यह समस्या कुछ समय बाद हल हो जाएगी, क्योंकि सकलाना मैं सुरकंडा पंपिंग योजना का कार्य भी अंतिम चरण में है।

🚀 यह भी पढ़ें :  जिला प्रचारक मोहन जोशी को हिन्दू जागरण मंच के कुमाऊँ संभाग संगठन मंत्री का दायित्य, शुभकामनाएं

मई सन 2012 में मैंने अपने आलेख में “पानी के लिए कब तक तरसेगा सुरकंडा” में बहुत पहले इस बात का जिक्र भी किया था। मां भगवती ने मुझे लगता है कि मेरी प्रार्थना सुनी और पानी आने के कारण संपूर्ण उच्चस्थ भाग की आबादी को भी लाभ मिलेगा। लेकिन यह जो मां की पौराणिक कुंडी है इसके संरक्षण करने के लिए आज भी जरूरत है।

मैं अपने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी निवेदन करना चाहूंगा कि इस कुंडी का निर्माण करने वाली महान महिला कौर देई , पत्नी स्व. धर्म सिंह भंडारी द्वारा किया गया था। उनके नाम से कालावन- तेगना में अवश्य कोई द्वार, स्मारक या विद्यालय का नाम या कोई अस्पताल होना चाहिए, ताकि उस महान महिला को आने वाली पीढ़ी अभी याद कर सकें। धन्यवाद।

Print Friendly, PDF & Email

Check Also

केवड़िया गुजरात में खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित "खेल एवं युवा मामलों के मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन" में प्रदेश की खेल मंत्री श्रीमती रेखा आर्य ने किया प्रतिभाग

केवड़िया गुजरात में खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित “खेल एवं युवा मामलों के मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन” में प्रदेश की खेल मंत्री श्रीमती रेखा आर्य ने किया प्रतिभाग

Listen to this article गुजरात के केवड़िया में खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित “खेल एवं युवा …

error: Content is protected !!