ट्रैकिंग व टूरिज्म की अपार संभावनाओं एवं प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है लोहिताल डांडा

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विकासखंड चम्बा व फकोट की धारअकरिया, कुजणी, मखलोगी पट्टियों के मध्य में स्थिति गजा रानीचौरी मोटरमार्ग पर डांडाचली स्थान से 3 किलोमीटर ऊपर चलकर लोहीताल क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।

सरहद का साक्षी, डीपी उनियाल @गजा

यहां रानीचौरी, गजा, कुड़ी भैस्यारौ से पैदल रास्ता भी है। देवदार, बांज, बुरांश, काफल, भमोरा, मौरु आदि का मिश्रित बन है। सर्दियों में बर्फबारी का लुफ्त उठाया जा सकता है तो गर्मियों में ट्रैकिंग व टूरिज्म का। यहीं पर तीर्थाटन व आध्यात्मिक के लिए श्री घंटा कर्ण मंदिर भी है जो कि धारअकरिया पट्टी के माणदा गांव निवासियों ने स्वयं की धनराशि से बनाया है।

माणदा के रघुबीर सिंह खाती व आनन्द सिंह खाती बताते हैं कि हमारे पूर्वजों में महिला पर घंडियाल देवता अवतरित हुए थे और रात में पैदल चलकर घंटाकर्ण धाम घंडियाल डांडा क्वीली पहुंच कर देवता का निशान यहां पर लाया गया तब से हम यहां पर पूजा पाठ करते आते हैं अब गांव वालों ने सहयोग करके मंदिर का नव निर्माण कराया। विधायक निधि से धर्मशाला भी बन गई है। पक्षियों की चहचहाहट और शांत सुंदर वादियां मन को लुभाती हैं।

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