शराब माफिया की गिरफ्त में क्रांति भूमि सकलाना

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शराब माफिया की गिरफ्त में क्रांति भूमि सकलाना

प्रशासन दबाव में आ जाएगा तो फिर एक नई क्रांति की लहर सकलाना से उत्पन्न होगी

सकलाना में काफी समय से शराबियों, शराब कारोबारियों के कारनामें चर्चित हैं
वृक्षमानव विशेश्वर दत्त सकलानी ने की थी 11 दिन की भूख हड़ताल 
शीशराम सकलानी के पंंवाड़े भी समय-समय पर इस महान घाटी में सुनायी देते हैं।
मनोहर लाल उनियाल ‘श्रीमन’ की कवितायें आज भी पौरुष जगाती हैं।

Chamba: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’: राजशाही की ताबूत पर अंतिम कील ठोकने वाले क्रांतिवीर नागेंद्र सकलानी की बलिदानी भूमि, आज शराब माफिया के चंगुल में फंसती जा रही है। अपने स्वर्णिम इतिहास को संजोये यह सॉन्ग घाटी,आदिकाल से ही शिरमौर रही है। अफसोस की बात है कि स्थानीय स्तर पर सकलाना नेतृत्व विहीन होता जा रहा है। जिसके कारण स्वरूप माफियाओं का नंगा नाच सकलाना घाटी में साफ दिखाई देता है। सकलाना के उन्नायकों ‘सोम-वीर- विशेश्वर’ ने सकलाना के चहुंमुखी विकास और उन्नति का जो सपना देखा था, उसका पटाक्षेप होता जा रहा है।

अपने शौर्य, पराक्रम,विविधता, प्राकृतिक सुषमा, हरित वनाच्छादित क्षेत्र, कृषि प्रधान भूमि,स्वतंत्रता सेनानियों की स्थली, महानगर देहरादून को पानी पिलाने वाली सॉन्ग घाटी आज स्थानीय जनता को शराब के सागर में डूबना चाहती है! इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। यूं तो सकलाना में काफी समय से शराबियों, शराब कारोबारियों के कारनामें चर्चित हैं। कुछ असामाजिक तत्व चोरी- छुपे शराब के कारोबार में लगे हैं। जिसके कारण अनेक बार अवांछित घटनाएं भी क्षेत्र में हो चुकी हैं।

वर्तमान समय में शराब माफिया कुछ स्थानीय लोगों को अपने जाल में फंसा कर, चंद कागज़ के टुकड़ों में खरीदना चाहता है। गुमराह नौजवान उनके झांसे में आ रहे हैं। जिस सकलाना क्षेत्र में ठाकुर वीर सिंह कंडारी ने शराब के विरोध मुहिम चलाने के लिए 80 के दशक में “नागेंद्र सेवा समिति” की स्थापना की और अपने संसाधनों से 200 युवकों को समाज सुधार के काम में जोड़ा।

संपूर्ण व्यय-भार अपने संसाधनों से जुटाया, अनेकों बार ठाकुर वीर सिंह कंडारी को पट्टी में ही नहीं बल्कि जनपद के अनेक क्षेत्रों में शराब माफिया का विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन वह कभी पीछे नहीं हटे। अपने वसूलों पर कायम रहे। यदि उन्ही की जन्मस्थली में शराब की दुकान खुल जाएगी तो इससे बढकर हैरानी की बात क्या होगी।

जिस सकलाना में सोमवारी लाल उनियाल ‘प्रदीप’ ने 70 के दशक में शिक्षा की मुहिम चलाई। सत्यौं (पुजारगांव) में हाई स्कूल की स्थापना की। स्थानीय जनता के सहयोग से 1972 में इसे राजकीय हाई स्कूल बनाने का भरपूर प्रयास किया।

वृक्षमानव विशेश्वर दत्त सकलानी ने 11 दिन की भूख हड़ताल की थी, कर्णसिंह नकोटी ने स्थानीय मुद्दों के लिए 06 दिन का आमरण अनशन किया, उनके सार्थक प्रयास से सकलाना में एक उच्चस्तरीय शिक्षण संस्थान सत्यौं में अवस्थित है।

उत्तराखंड के वृक्ष मानव, अमर शहीद नागेंद्र के छोटे भाई, 50 लाख बांज के वृक्ष रोपण करने वाले, शराब और कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने वाले, व्यक्ति की भूमि में आज शराब माफिया अपनी घुसपैठ बढ़ा रहा है।

क्रांतिभूमि सकलाना का अभूतपूर्व इतिहास रहा है। स्व. नागेंद्र सकलानी ही नहीं बल्कि राजशाही के विरोध और स्थानीय मुआफीदारों के कुशासन के विरुद्ध स्व. रूप सिंह कंडारी का डंडक आज भी इतिहास की पुस्तकों में दर्ज है। धूम सिंह कंडारी की पत्नी भड्डू देवी और धूम सिंह डोबरियाल की पुत्रवधू फूलदेई की वीरता के किस्से आज भी सकलाना के घाटियों में सुनाई देते हैं। शौर्य और वीरता की गाथा में रहेलाओं के साथ लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले शीशराम सकलानी के पंंवाड़े भी समय-समय पर इस महान घाटी में सुनायी देते हैं। मनोहर लाल उनियाल ‘श्रीमन’ की कवितायें आज भी पौरुष जगाती हैं।

अफसोस इस बात का है की कुछ समय पूर्व सकलाना में शराब माफिया ने क्षेत्र में अंग्रेजी शराब की दुकान खोलने के लिए कोशिश की। कुछ स्थानीय लोगों, मातृशक्ति और बुद्धिजीवी वर्ग के कानों में भनक लगने के बाद शराब की दुकान नहीं खुल पाई। तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हुई और मरोड़ा पुल से आगे बनाली रोड पर लामकांडा गांव में यह दुकान खुलने प्रस्तावित थी, वह नहीं खुल सकी। बौखला कर शराब माफिया ने क्षेत्र के कुछ नौजवानों से सांट- गांठ करके अपने साथ जोड़ दिया और शराब की दुकान खुलवाने के लिए एड़ी- चोटी का जोर लगा रहा है।

कुछ दिन पूर्व इन गुमराह नवयुवकों का एक दल जिलाधिकारी टिहरी से मिलने के लिए गया और शराब की दुकान खुलवाने के लिए अपने कुतर्क दिये। कहा कि शराब की दुकान खुलनी लाजमी है। इसी के साथ सकलाना में विरोध के स्वर और प्रबल होते जा रहे हैं और विशेषकर मातृशक्ति आने के लिए तैयार है। सकलाना के कुछ जन प्रतिनिधि वोट बैंक की चिंता से मौन धारण किए हैं।

शिक्षा और संस्कृति के के क्षेत्र में क्रांति भूमि सकलाना आगे रही है और प्राथमिक विद्यालयों से पढ़े-लिखे नौजवान देश के नामी- गिरामी संस्थाओं के उच्च पदों पर आसीन रहे हैं। क्षेत्र के सरकारी बेसिक स्कूलों से पढ़े हुए व्यक्ति समाज को नई दिशा देने के लिए प्रेरणा देने के लिए अपनी मेहनत के बलबूते पर अतीत में ही नहीं बल्कि वर्तमान में भी उच्चस्थ पदों पर आसीन हैं।

उनका भी प्रयास है कि सकलाना सामाजिक बुराइयों से दूर रहे और एक संकल्प के साथ आगे बढ़े। शराब जैसी बुराइयों के कारण क्षेत्र में अराजकता फैल रही है। गरीब व्यक्ति और गरीब होगा। दुकान खुल जाने से जो नहीं पीने वाला भी होगा वह भी पीने लगेगा। हुल्लड़बाजी, झगड़ा- फसाद,मन मुटाव, अनैतिकता क्षेत्र में उत्पन्न होगी।

क्रांति भूमि सकलाना में समय-समय पर शराब विरोधी आंदोलन सक्रिय रहे हैं जिसके फलस्वरूप कभी भी यहां किसी को शराब की दुकान खोलने का साहस नहीं हुआ।

हेंवलघाटी के सुधारों का भी सहयोग मिला है लेकिन कुछ जागरूक लोगों के क्षेत्र से पलायन कर जाने के कारण तथा कुछ लोग असमर्थता या शारीरिक क्षमताओं के अभाव के कारण नेतृत्व पर नहीं कर पा रहे हैं। जिसका लाभ माफिया उठाना चाहता है।

शराब माफिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि सकलाना एक आवाज है। जिस के आव्हान पर शराब के खिलाफ जनमत खड़ा होगा और उस जनसैलाब को रोकना शासन और प्रशासन के लिए भी गले की हड्डी बन जाएगा।

यह मेरा मानना है। इतना ही नहीं क्षेत्र और जनपद के अनेकों सामाजिक लोगों की नाते-रिश्तेदारी क्षेत्र से जुड़ी है जो कि समय समय पर जनचेतना और समाज सुधार के लिए अलख जगाए हैं। अगर शराब समर्थक, शराब माफिया अपनी हठधर्मिता पर आ जाएगा और प्रशासन दबाव में आ जाएगा तो फिर एक नई क्रांति की लहर सकलाना से उत्पन्न होगी।

वयोवृद्ध, नौजवान, मातृशक्ति, बुद्धिजीवी लोग सड़कों पर उतर आएंगे। समय रहते हुए शासन और प्रशासन को इस ओर संवेदनशील रहना होगा और क्षेत्र में विकास में योजनाएं बनायें न कि शराब की दुकान खोले।

स्थानीय युवा शराब के स्थान पर सैनिक स्कूल,डिग्री कॉलेज, देव सुमन विश्वविद्यालय का परिसर,लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, शिक्षा कृषि और प्रकृति संरक्षण, साहित्य और विज्ञान के प्रति अपना हुनर दिखाएं, जिससे क्षेत्र का भला होगा।

सकलाना से समय-समय पर आईएएस, एलाइड सर्विस, एनडीए, लब्ध प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च पदों पर युवा आसीन हुए। आज भी एनसीआरटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था के हेड के रूप में क्षेत्र के पढ़े युवा निदेशक की गरिमामय कुर्सी पर आसीन हैं। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लें न कि शराब की दुकान का समर्थन करने और शराब पीने और पिलाने की। यही स्वर्गीय नागेंद्र सकलानी, ठाकुर वीर सिंह कंडारी, स्वर्गीय विशेश्वर दत्त सकलानी, भड्डू देवी, फूलदेई आदि के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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  1. आपने सकलाना के वर्तमान और इतिहास को जिस प्रकार व्यक्त किया है, उसके लिये आपका सहृदय धन्यवाद🙏| आम जनता खासकर युवा, महिलाएं, महिला जनप्रतिनिधि और बच्चे शराबियों व शराब माफिया की इन कोशिशों से बहुत त्रस्त, परन्तु आक्रोश मेँ हैँ| सकलाना का इस तरह से पतन किसी भी हाल मेँ नहीं होने दिया जायेगा 🙏🙏

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