कविता: वाह रे पुतिन! कोरोना का डर भगा दिया
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बिहार में बिजली, जोधपुर में बाढ़ !
गुजरात में दारू, बंगाल में रार।
किश्तवाड़ में कर्फ्यू, गुजरात में बाढ़!
सो गए शिवजी सावन की मार।
उदयपुर में हत्या, दक्खण तक तार !
खो गई ममता, पैंसो का भार।
ई डी का छापा, हुगली के पार
सो गए शिवजी महंगाई की मार!
फटते हैं बादल खाता है बाघ,
दल- दल के नेता बन गए घाघ।
यूक्रेन में हिंसा, स्पेन में आग,
सो गए शिवजी बढ़ गया ताप।
अर्पण के चक्कर में,फंस गया पार्थ,
मास्टर के पैसों से कैसा परमार्थ!
धर्म के नाम पर निहित है स्वार्थ,
सो गए शिवजी बेडा न बेडवार्थ।
पर्वत पर पानी शहरों मे घात !
मौसम की बारिश या बेरुखी बरसात।
है कोई प्रलय को दे देवें मात !
सो गए शिवजी निशांत के साथ।

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*कवि: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’

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