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मई माह सन् निन्यानवे में,

दुश्मन सीमा पर आ धमका ।
बना वहां पर सैनिक बंकर,
भारत को था ललकार रहा।

अटल-अखंड भारत ने देखा,
दुश्मन सीमा अंदर घुस आया।
ऑपरेशन- बद्र दुश्मन का,
ऑपरेशन विजय काम तमाम किया।

बोफोर्स तोप की ताकत,
और सैन्य शक्ति ने भारत मां की।
मारा जब सीमा पर दुश्मन,
आगे बढ़कर विजय श्री ली।

दो लाख सैनिक भारत के,
जब सीमाओं पर खड़े हुए।
दुश्मन के पायजामें भी तब,
डर के मारे भीग गए।

पांच सौ सत्ताइस सैनिक,
भारत मां के कुर्बान हुए।
तेरह सौ कारगिल युद्ध में,
घायल सैनिक वीर हुए।

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विक्रम बत्रा साथ मनोज भी,
परमवीर चक्र प्राप्त किए ,
आचार्य पद्ममणि अजय आहूजा,
महावीर चक्र भी खूब लड़े।

सौरभ कालिया लाल मही का,
सह यातनाएं शहीद हुआ।
अटल शक्ति से भारत की,
ऑपरेशन विजय सफल रहा।

छब्बीस जुलाई निन्यानवे को,
जंग भारत यह जीत गया।
दुश्मन की काली करतूतें,
समय-समय पर विनष्ट किया।

साठ दिवस तक युद्ध चला,
सारा भारत साथ दिया।
मार काट कर दुश्मन को,

सीमाओं से भगा दिया।

शौर्य दिवस के नाम पर,
विजय दिवस भी नाम पड़ा ।
वीर शहीदों की स्मृति में,
शौर्य स्मारक यहां बना।

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हमें फक्र है उन वीरों पर,
जो जीवन कुर्बान किए,
भारत माता रक्षा खातिर,
अपना सर्वोच्च बलिदान किए।

श्रद्धांजलि को शब्द नहीं हैं,
शीश झुकाये देते हैं।
विजय दिवस की बेला पर,
पराक्रम याद कर लेते हैं।

पुष्प चक्र गार्ड ऑफ ऑनर,
वीर सैनिक का सम्मान रहा।
शौर्य वीरता की गाथाएं सुन,
नित भारत का अभिमान बना।

कवि सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’

(कवि कुटीर)
सुमन कालोनी चंबा,टिहरी गढवाल।

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