श्रीरामनवमी: नवरात्र में श्री दुर्गा देवी के नौ स्वरूपों में नवमी दिवस की अधिष्ठात्री देवी हैं शक्ति माँ सिद्धिदात्री

श्रीरामनवमी: नवरात्र में श्री दुर्गा देवी के नौ स्वरूपों में नवमी दिवस की अधिष्ठात्री देवी हैं शक्ति माँ सिद्धिदात्री


 

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कंचनाभा शंखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोस्तुते।
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी
भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोस्तुते।

एतां रामबलोपेतां रक्षां य: सुकृती पठेत्
स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी भवेत्।

वर्तमान में चल रहे नवरात्रों में श्री दुर्गा देवी के नौ स्वरूपों में आज नवमी दिवस की अधिष्ठात्री देवी-शक्ति माँ सिद्धिदात्री ही हैं।

आज भगवती श्रीसिद्धिदात्री एवं श्रीरामनवमी की शुभ पवित्र वेला पर आप सबको बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक अनंत शुभकामनाए।

हे मां ! भगवती सिद्धिदात्री आप हम सबको अपनी कृपा का पात्र बंनाने की कृपा करे और हमारे सभी कष्टो का निवारण कर हमें इस भव सागर से पार लगा दें।

नौवे दिन यानि नवमीं तिथि को मां के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन और आराधना की जाती है। मॉ भगवती का यह स्वरूप सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाला है।

देवी पुराण के अनुसार इन्हीं सिद्धियो को देवाधिदेव महादेव ने मॉ भगवती से प्राप्त किया था, जिससे महादेव का आधा शरीर देवी का हुआ और वे अर्धनारीश्वर कहलाये।

मॉ भगवती सिद्धिदात्री अपने भक्तों-साधकों को सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं,जो साधक विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ भगवती की साधना करते हैं, उन साधकों को मॉ की कृपा से सहज में ही सभी सिद्धियों की प्राप्ति भी हो जाती है और सृष्टि में उनके लिये कुछ भी अगम्य नहीं रह जाता है।

मॉ भगवती चार भुजाओं वाली हैं और इनका वाहन सिंह है, ये कमल के पुष्प पर भी आसीन होती हैं। जो भी भक्त-साधक मां की उपासना सही ढंग से पूर्ण कर लेते हैं, उनकी लौकिक व पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति स्वत: ही हो जाती है।

भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन हमें संसार की असारता का बोध कराते हुये वास्तविक परम शांन्तिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है। हे मानव प्रत्येक मनुष्य-साधक को सर्वप्रथम नित्य अपने माता-पिता अथवा किसी भी भगवदीय श्री विग्रह के दर्शन अवश्य करने चाहिये और सदैव उनके सम्मुख अपनी मानसिक श्रद्धा के पुष्प अर्पित करते रहना चाहिये।

यह कार्य नित्य प्रति करने से आपका अपने माता-पिता के साथ साथ भगवान तथा अन्य के प्रति विश्वास व आदर भाव बढ़ता है और सही मायने में यह नवरात्रो में मॉ की पूजा-आराधना के समान ही नही अपितु उससे भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित होती हैं।

हे मानव चित्तशुद्धि के लिये केवल दो बातों की विशेष आवश्यकता है:- विवेक और ध्यान

केवल आत्मा-अनात्मा का विवेक होने पर भी यदि ध्यान के द्वारा उसकी पुष्टि नहीं की जायेगी तो वह स्थिर नहीं रह सकता इसलिये नित्य-प्रति अपने चित्त की परीक्षा लेते रहें, इससे आपका कल्याण ही होगा ।

मानव स्वयं ही अपना मित्र भी है और स्वयं ही शत्रु भी। यदि मनुष्य सरल व सहज हो जाये,जो उनका मूल स्वभाव भी है तो वह स्वयं ही श्रेष्ठ बन जायेगा। सहनशीलता व आपके अच्छे कर्म ही आपको पुरुष से महापुरुष बनाती है।

आप तथा आपका परिवार सदैव सुखी, स्वस्थ, समृद्ध, निरोगी एवं दीर्घायु रहे, माँ भगवती के श्रीचरणों से नित्यप्रति हम यही कामना व प्रार्थना करते हैं।

इं०/पं०सुन्दर लाल उनियाल (मैथिल ब्राह्मण)
नैतिक शिक्षा व आध्यात्मिक प्रेरक
दिल्ली/इन्दिरापुरम,गा०बाद/देहरादून