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अतिक्रमण औरअव्यवस्था से अपनी दुर्दशा पर रो रही हैं चंबा नगर की हृदय रेखाएं !

अतिक्रमण औरअव्यवस्था से अपनी दुर्दशा पर रो रही हैं चंबा नगर की हृदय रेखाएं !

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[su_dropcap size=”2″][/su_dropcap]ब तक हमारा नैतिक असर नहीं सुधरेगा, हम कभी आगे नहीं पढ़ सकते हैं। तथाकथित विकास के इस दौर में  भले ही हम स्वयं को अग्रणी श्रेणी में समझें लेकिन बिना नैतिक स्तर के सुधार यह संभव नहीं है। यूं तो अतिक्रमण, कानून व्यवस्था का उल्लंघन, अव्यवस्था, भारतीय लोकतंत्र की पहचान बन चुकी है लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में दो दशक पूर्व सुख और शांति अवश्य थी।

उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद संपर्क मार्गों का निर्माण हुआ। सड़कें बनी। जगह-जगह पर छोटे-छोटे कस्बों का उदय हुआ, लेकिन सुनियोजित, सुसंगत विकास नहीं हो सका। यह नहीं कि शासन-प्रशासन की निगाह में या बात नहीं है। हमारे सामाजिक कार्यकर्ता, जन-प्रतिनिधि, हर राजनेता, बुद्धिजीवी सभी इस बात को जानते हैं लेकिन भौतिकवाद की अंधी दौड़ में सबकी आंखों में पट्टी बांधी हुई है। कर भी क्या सकते हैं! जब बहुसंख्यक समाज अनैतिकता और असंगत कार्यों की ओर आगे बढे तो समाज के अच्छे लोग कुंठा के शिकार होने के अलावा और कुछ भी नहीं कर सकते हैं।

अपने क्षेत्रीय शहर चंबा का ही उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूं। शहर के उदय के साथ-साथ सात सड़कों का यह शहर पूर्ण रूप से अतिक्रमण, अनियोजित विकास, भौतिकवाद के चपेट और अव्यवस्था का शिकार होता जा रहा है। ब्लॉक रोड और कॉलेज रोड चंबा शहर के हृदय स्थल थे। ब्लॉक रोड को हम अपने छात्र जीवन के दौरान सिविल लाइन कहते थे और कॉलेज रोड चंबा की हृदय रेखा थी। असंख्य गांवों को जोड़ती हुई यह सड़क इतनी चौड़ी थी कि दोनों ओर से आने वाली गाड़ियां क्रॉस हो जाती थी लेकिन आज यह समस्या हो चुकी है कि कॉलेज रोड पर गाड़ी चलाना तो दूर, पैदल चलने से भी देह कांप जाती है। यह सड़क को हड़पने में स्थानीय लोगों का भी बहुत बड़ा हाथ है। प्रशासन- पुलिस तथा समाजसेवी भी इस बात को भली प्रकार से जानते हैं लेकिन वोट की राजनीति, आर्थिक दबंगई तथा नव धनाढ्य वर्ग का वर्चस्व होने के कारण, प्रशासन और पुलिस तक लाचार है। कॉलेज रोड पर चौक से और मिलन वेडिंग प्वाइंट के आगे तक इतने बुरे हाल हैं कि टैक्सी गाड़ी को लाना- ले जाना भी कठिन है।

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अतिक्रमण औरअव्यवस्था से अपनी दुर्दशा पर रो रही हैं चंबा नगर की हृदय रेखाएं !
अपने प्रादुर्भाव से ही अतिक्रमण की थपेंड़े खा रहा चम्बा शहर का ह्रदय/क्रांति स्थल वीसी चौक, विजय चौक, कभी यूँ भी: फोटो- संपादक, सरहद का साक्षी

श्री देव सुमन की जन्मस्थली जौल और विक्टोरिया क्रॉस गब्बर सिंह नेगी की जन्मस्थली मंजूड, सुमन इंटर कॉलेज, हाइडिल, जंगलात के दो रेंज आफिस, सुमन कालोनी, अनेकों गांव को जोड़ने वाली यह, सड़क पूर्ण रूप से अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है। रही- खुई कसर दुपहिया वाहन वालों ने, टैक्सी वालों ने, कुछ व्यापारियों ने पूरी कर ली है। अत्यंत व्यस्त रहने वाली यह सड़क आज अपनी दुर्दशा पर रो रही है। अनेक बार इस तथ्य को प्रशासन के संज्ञान में भी लाया गया है लेकिन ढाक के तीन पात हैं। हां! कुछ समय पूर्व शराब की दुकान अवश्य कॉलेज रोड पर खोलने का प्रयास जरूर किया गया था जो कि स्थानीय लोगों के विरोध के कारण सफल नहीं हो पाया।

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कल की ही बात है। दिन के समय कॉलेज रोड पर इतना जाम लगा कि घंटों तक लोगों को 50 मीटर की दूरी तय करना असंभव हो गया। थाना प्रभारी चंबा की गाड़ी भी जाम में फंसी रही। थानाध्यक्ष श्री पंकज देवरानी  तथा उनकी टीम के द्वारा बमुश्किल वाहनों की आवाजाही हो सकी। प्रश्न यह है कि हर वक्त थानाध्यक्ष कॉलेज रोड पर तो बैठे नहीं रहेंगे। इसके लिए नगर पालिका परिषद चंबा तथा स्थानीय लोगों को प्रयास करना पड़ेगा अन्यथा एक दिन ऐसा आएगा कि सड़क पर चलना भी दूभर हो जाएगा। जिसके कारण स्वरूप व्यापारी भी प्रभावित होंगे और प्रत्येक निवासी, नागरिक, बच्चों, बूढ़ों, अस्वस्थ व्यक्तियों, ड्यूटी पर जाने वाले लोगों, आवश्यक सेवाओं निर्माण सामग्री लाने ले जाने वालों, वाहन चालकों आदि सभी को रूबरू होना पड़ेगा। इस बात का जीता जागता उदाहरण कीर्ति नगर के मुख्य बाजार का अतिक्रमण एक नजीर है।

कोरोना काल के बाद ईश्वर की कृपा से विद्यालय खुल गए हैं। चंबा शिक्षा का उच्च स्तरीय नगर बन चुका है। हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं प्रतिदिन अनेक विद्यालयों में इस मार्ग से आवागमन करते हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठान होने के कारण गांवों से लोग यहां खरीदारी करने आते हैं। शादी -ब्याह का सीजन भी शुरू हो चुका है। स्थानीय पर्व तथा धार्मिक पर्व भी आयोजित किए जाने हैं। यह तभी संभव हो सकेगा जब सड़क जाने- आने के लिए खुली मिलेंगी अन्यथा कभी भी कोई बुरी दुर्घटना हो सकती है। अतिक्रमण और जाम में फंसने के बजाय नाते रिश्तेदार भी है हमसे दूर हटते जाएंगे। हम सब इसके लिए उत्तरदायी होंगे।

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सभी नगर वासियों से मेरा करबद्ध निवेदन है कि सड़क पर आड़े-तिरछे वाहनों को खड़ा न करें। मुख्य सड़क को पार्किंग न बनाएं।  व्यापारिक प्रतिष्ठानों के आगे ग्राहकों को खड़े होने के लिए स्थान सुरक्षित रखें। जगह जगह पर गाड़ियों को क्रॉस होने के लिए स्थान बनाए रखें। व्यवस्था बनाने में सभी का सहयोग अपेक्षित है हमें कानूनों का भी पालन करना चाहिए तथा उनका आदर करना चाहिए। यह सब हमारे लिए बने हुए हैं और इसी में हमारा कल्याण निहित है। हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम समाज में ऐसे उच्च मानदंड स्थापित करें कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी वह नजीर बन सके।

[su_highlight background=”#091688″ color=”#ffffff”]सोमवारी लाल सकलानी, निशांत[/su_highlight]

(कवि कुटीर) सुमन कॉलोनी चंबा टिहरी गढ़वाल।

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