मथीसारी गांव में मोक्ष कामना के निमित्त श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का रस पान

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निगमकल्पतरोर्गलितं फलं शुकमुखातमृत द्रवसंयुतम् ।
पिवत भागवतं रसमालयं मुहुरहो रसिका भुविभावुका:।।

आज श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का रस पान करने का सौभाग्य मिला। मखलोगी मण्डल के मथीसारी गांव में मोक्ष कामना के निमित्त इस महापुराण का आयोजन आचार्य गिरीश उनियाल जी की पुण्यतिथि पर आयोजित इस महायज्ञ का कार्यक्रम उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमती सुमंगली उनियाल, सुपुत्र श्री प्रणय उनियाल व श्री अभिषेक उनियाल तथा बड़े भाई श्री दर्शन लाल उनियाल, श्री रमेश उनियाल व छोटे भाई श्री कामेश्वर उनियाल तथा सुपुत्रियों के साथ सभी परिवार जनों ने दिवंगत विभूति की आत्मिक शान्ति के लिए किया।

इस कार्य के सम्पादन हेतु उत्तराखंड देवभूमि के अद्वितीय मनीषी सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य श्रीयुत् लोहिताक्ष देव थपलियाल का चयन किया, यह देवभूमि का सौभाग्य है कि इस क्षेत्र में ऐसी विभूतियां है जो इस महा यज्ञ का वास्तविक अर्थ समझते हैं और तदनुरूप कार्यान्वयन भी करते हैं।

इस जनपद का अहो भाग्य है कि मां गंगा का अवतरण यहीं हुआ है और हम उसी के तट वर्ती हैं, सदैव गङ्गा दर्शनों का लाभ भी मिलता है।

मखलोगी का हृदय केवल छाती गांव को ही नहीं कहा जा सकता है अपितु पूरा नकोट क्षेत्र हृदयस्थली है एक और सौभाग्य है कि यह क्षेत्र ठीक भास्कर प्रयाग के (भासौं) उपर वसा हुआ है। यहां की अनगिनत विशेषताएं हैं, जिसमें यहां के मनीषी चार चांद लगाने में कोई कमी नहीं करते हैं।

आज की कथा में भगवान श्रीकृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों का वर्णन आचार्य श्री के मुख से सुनने का अवसर मिला, इन विवाहों का उद्देश्य सांसारिक विषय वासनाओं का उपभोग नहीं केवल सांसारिक लीलाओं को दिखाना और अवतार के हेतु का कारण ज्ञात करवाना था।

यमुना तीर पर खड़े होकर उससे यह कह कर रास्ता मांगना कि यदि श्रीकृष्ण ब्रह्मचारी हों तो यमुना मैया हमें रास्ता दे दो, इस बात का प्रमाण है कि भगवान श्री कृष्ण गृहस्थ में रह कर भी ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।

आठ पटरानियां अष्टधा प्रकृति है और सोलह हजार वेद की ऋचाएं है। सामान्य नर नारियां इन सबको एक कपोल कल्पना भी मान सकते हैं पर ‘व्यासोच्छिष्टं जगत्सर्वम’ का सटीक प्रमाण हैं पुराण। जो पुराणों का अवलोकन करने से कथा श्रवण से प्रमाणित होता है। कामदेव का पुनर्जन्म, रति का मायावती के रूप में अवतरित होकर शम्भासुर को अलौकिक गति प्रदान करना, ऊषा के माध्यम से बाणासुर के अहंकार को नष्ट करवाना और जय विजय को प्राप्त शाप के ताप से मुक्ति दिलवाना तथा समस्त आतताइयों से इस धरा के भार को कम करना कथा के मुख्य बिन्दु थे, इन बिन्दुओं को सुनने का आनन्द लिया और कथा का तत्व निरपेक्ष भगवत् प्रेमी बाल सखा सुदामा का कुछ भी न चाहना जो सुदामा सदैव अयाचित व्रत रखता है श्रीकृष्ण के दर्शन पाकर अपने को धन्य महसूस कर रहा है, ऐसी* *श्रीमद्भागवत महापुराण के ज्ञान यज्ञ में टिहरी के लोक प्रिय माननीय विधायक श्री किशोर उपाध्याय जी / ‘ जो सदैव किशोर ही रहेंगे’ और क्षेत्र के विकास में मनो योग से रत रहेंगे, / का आगमन क्षेत्र की उन्नति में सहायक होते हुए अपने जीवन को सार्थक करने में अद्भुत है। श्री दिनेश डोभाल, श्री राजेन्द्र डोभाल, श्री सुशील बहुगुणा का आगमन महत्वपूर्ण था।

आज के दिन यह अनुभूति भी हुई कि नवधा भक्ति का तत्व निरपेक्ष है, भक्ति स्वयं अवतरित होकर मानव के मानस पटल पर विराजमान हो जाएगी, यदि मानव एकाग्र भाव से कथा का श्रवण, मनन करता है। कथा में मुख्य आचार्य श्री सोहनलाल बहुगुणा, तथा अन्य* *आचार्य गणों में श्री आयुष बहुगुणा, श्री संदीप बहुगुणा आदि हैं। संगीत की समा और स्वर मंत्र मुग्ध करने वाले थे। सभी लोगों के योगक्षेम की कामना का दायित्व बहुगुणा बन्धुओं पर है जिसके लिए वे सतत प्रयास भी करते हैं।

मां दुर्गा अपने विविध रूपों से सदैव अपनी पूजा अर्चना छोटी काशी के मनीषियों से चाहती है, मां राजराजेश्वरी की पूजा अर्चना का दायित्व उनियाल बन्धुओं के पास सुरक्षित हैं फिर भी उनका गुरु भाव अपने कुल पुरोहितों के प्रति बरकरार है। सभी आयोजकों तथा इस पुनीत कार्य में लगे लोगों के मंगल की कामना करता हूं तथा दिवंगत विभूति की मुक्ति की शुभकामना करते हुए उस आत्मा को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।

राधे राधे का जाप मन की दुविधा को मिटाने में पूर्णतः समर्थ है अतः निरन्तर इसका जप हमें करना आवश्यक है यह अनुरोध भी करता हूं।

नामसङ्कीर्तनं यस्य सर्वपाप प्रणासनम्
प्रणामो दुःख शमनस्तं नमामि हरिं परम् ।।

@आचार्य हर्षमणि बहुगुणा