डांडा कु थौळः 12 गते बैसाख को लगता है गजा का मेला, मेले की पूर्व संध्या पर घंडियाल मंदिर में ढोल दमाऊ के साथ पूजन

    डांडा कु थौळः 12 गते बैसाख को लगता है गजा का मेला, मेले की पूर्व संध्या पर घंडियाल मंदिर में ढोल दमाऊ के साथ पूजन
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    गजा मेले की पूर्व संध्या पर प्राचीनतम संस्कृति को जीवित रखते हुए गौंसारी गांव के लोग ढोल दमाऊ के साथ घंडियाल मंदिर गजा में क्षेत्र की खुशहाली, सुख, समृद्धि की कामना करने पहुंचे। यह बहुत पुरानी परम्परा है।

    सरहद का साक्षी, डी.पी. उनियाल @गजा

    जब गजा के थौल “मेले“ को डांडा का थौल कहा जाता था। गौंसारी गांव के लोग पहले अपने गांव में बने मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं तथा उसके बाद गजा स्थित घंडियाल मंदिर में ढोल नगाड़ों के साथ शाम को आ कर पूजा अर्चना करते हैं। पुरानी परम्परा आज भी जीवित है। इस अवसर पर निवर्तमान प्रधान मान सिंह चौहान, कुंवर सिंह चौहान, व्यापार सभा के पूर्व अध्यक्ष मकान सिंह चौहान, दयाल सिंह सजवाण, भरपूर सिंह, मंगल सिंह चौहान, रिटायर्ड सूबेदार मनजीत सिंह नेगी, मदन सिंह चौहान, ज्ञान सिंह नेगी, पूरण सिंह चौहान सहित दर्जनों महिलाओं व पुरुषों ने पूजा अर्चना की।