आईए! इस बार चम्बा, गजा के बाद अब 14 गते बैसाख बुधवार को नकोट का थौऴ (मेला) अवश्य देखें।

आईए! इस बार चम्बा, गजा के बाद अब 14 गते बैसाख बुधवार को नकोट का थौऴ (मेला) अवश्य देखें।
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पिछले दो वर्षों से बैसाख मेलों सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर चले आ रहे सन्नाटे को बैसाख मेलों ने समाप्त कर दिया है। लोग भरपूर उत्साह के साथ मेलों में शरीक हो रहे हैं। चम्बा का अमर शहीद गबरसिंह वीसी मेला एवं डांडा कु थौऴ गजा मेला इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

कोरोना की चौथी लहर (ओमिक्रोन के नये वैरियेंट) की सुगबुगाहट के बाबजूद भी वैक्सीनेटेड लोग मेलों में भारी हुजूम के साथ शरीक हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण पिछले दो वर्षों की खामोशी के साथ लोगों का वैक्सीनेटेड होना भी है। वैक्सीन दो एवं बूस्टर डोज लग जाने के फलस्वरूप लोग कोरोना के भय से लगभग स्वयं को मुक्त महसूस कर रहे हैं। शादी-ब्याह, चूड़ाकर्म, धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समारोहों में लोग बेझिझक शामिल हो रहे हैं। यहां तक आम जनमानस अब ‘दो गज दूरी-मास्क है जरूरी’ के नारे को भी बिसराने लगे हैं।

यद्यपि भारतीय संस्कृति में यूं तो वर्षभर मेले, पर्व, लोकपर्व एवं सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजनों का सिलसिला जारी रहता है। तथापि उत्तराखण्ड में बैसाख माह के थौऴ मेलों का अलग ही महत्व है। इस माह उत्तराखण्ड राज्य के विभिन्न स्थानों पर बैसाख संक्रांति से ही मेलां का आयोजन आरम्भ हो जाता है।

स्थानीय स्तर पर जहां तक मेरे संज्ञान में है बैसाख माह के चार गते सुरी अर्थात् सुरसिंगधार का मेला, इसी दिवस कोठियाड़ा चमियाला का प्रसिद्ध मेला, 6 गते केमू कु थौळ अर्थात् बादशाहीथौल का मेला, 8 गते चम्बा की गबरसिंह वीसी मेला, 10 गते मखलोगी में धारु का मेला, 12 गते गजा का मेला, 14 गते अब नकोट का मेला, 16 गते कोटद्वारा डांडाचली का मेला और 16 गते ही मथिसारी छाती का मेला, 20 गते मठियाली क्यारी को मेला, 22 गते पल्ला गजा का मेला आदि थौळ,़ मेले इस नजदीकी क्षेत्र मे ही आयोजित होते हैं और होते थे। इनमें से कई थौऴ अब विलुप्त से हो गए हैं। इन में धारू के साथ 11 गते दिवाड़ा व नवागर का मेला भी शामिल है।

गजा के मेले के बाद अब मेले में आने वाले व्यापारी ग्रामीण कस्बा नकोट की ओर रूख कर रहे हैं। वे आज से ही नकोट कस्बे में अपना स्थान घेरने लगे हैं। शाम को गजा मेले की समाप्ति के बाद कुछ मेला व्यापारी गजा में ही रुककर 13 गते बेसाख को भी गजा में अपनी दुकानें लगायेंगे। इसके बाद शाम को वे नकोट के लिए प्रस्थान कर जायेंगे। उनके कुछ साथी आज ही नकोट कस्बे में पहुंचकर अपनी दुकानों के लिए स्थान सुरक्षित करने में जुट गए हैं।

आइए! आप लोग भी ग्रामीण कस्बा नकोट के मेले का आनन्द उठायें। आप सभी का नकोट क्षेत्र में ‘सरहद का साक्षी‘ परिवार के साथ ‘व्यापार सभा नकोट’ एवं ‘ग्राम पंचायत नकोट’ की ओर से हार्दिक स्वागत है।

  • केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’ एवं अनुराग चौहान