चम्बा: इन वीरों को भी जानिएं!

चम्बा: इन वीरों को भी जानिएं!
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चंबा (टिहरी गढ़वाल) की पहचान बलिदानी श्री देव सुमन और परमवीर शहीद वीसी गबर सिंह नेगी के गौरवशाली इतिहास के कारण है, इसमें संदेह नहीं है।
इसके अलावा पुरानी टिहरी के अवसान के साथ ही टिहरी जिले का यह प्रमुख व्यावसायिक केंद्र भी है।

सरहद का साक्षी @कवि:सोमवारी लाल सकलानी, निशांत

चंबा के निकटवर्ती गांव गुल्डी (मनियार) के शहीद धूम सिंह सजवान का स्मारक भी शहर की शान है। चंबा के दोनों चौराहों पर वीसी गबर सिंह नेगी और बलिदानी श्रीदेव सुमन की मूर्तियां भी स्थापित हैं। अब गबर नेगी स्मारक पर नगर पालिका परिषद चंबा की ओर से तिरंगा झंडा भी लहराने लगा है, जिसने इस शहर की गरिमा को और बढ़ा दिया है।साथ ही गुल्डी गांव के समीप राजमार्ग पर टिहरी रियासत के अंतिम सेनापति नत्थूसिंह सज्वाण की मूर्ति भी स्थापित हो गई है।

यूं तो चंबा क्षेत्र के अनेक वीर सेनानी हुए हैं। प्रथम विश्व युद्ध में अकेले स्युटा गांव से 36 वीर सैनिकों ने महासमर में भाग लिया। अनेक वीर शहीद भी हुए है। हम समय समय पर उनको सैल्यूट करते हैं।

ये दो वीर शहीद सेनानी भी बड़ा स्यूटा गांव से हैं। हवालदार शहीद दयाल सिंह पुंडीर पुत्र श्री ज्ञान सिंह पुंडीर ने सन् 1988 में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए मातृ भूमि के लिए प्रणोत्सर्ग किया। वे सी आर पी एफ के जवान थे।
राइफलमैन सत्ये सिंह पुंडीर पुत्र कल्याण सिंह पुंडीर ने सन् 1962 के भारत- चीन युद्ध में अप्रतिम शौर्य का प्रदर्शन करते हुए मातृ भूमि पर अपने प्राण न्यौछावर किए। तल्ला चंबा में श्रीदेव सुमन इंटर कॉलेज के समीप इन वीरों की मूर्ति लगी हैं। मै अपनी कविताओं से इन वीरों को समय- समय पर नमन करता हूं।

“जिन वीरों के लाल लहू से, हिम तक लाल हुआ है।
लेह सियाचिन अरूणांचल तक, भारत ध्वज फहरा है।
जिन वीरों के पराक्रम से, अखंड राष्ट्र बना है।
उस पावन माटी के रज कण में, वीरों का लहू घुला है।
हमें कसम है मातृ भूमि की लहू न बिकने देंगे।
जब तक सांसें हैं देह में,हम रक्षा राष्ट्र करेंगे।
उन वीरों के पराक्रम का, हम अभिनन्दन करते हैं।
समय समय पर अप्रतिम शौर्य का, वंदन भी हम करते हैं।”