नहीं रहे एक आदर्श शिक्षक- बालकृष्ण सकलानी, संघर्ष की दास्तान थे- बी.के.सकलानी

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नहीं रहे एक आदर्श शिक्षक- बालकृष्ण सकलानी, संघर्ष की दास्तान थे- बी.के.सकलानी

नहीं रहे एक आदर्श शिक्षक- बालकृष्ण सकलानी, संघर्ष की दास्तान थे- बी.के.सकलानी

कल होगा कोटी कालोनी में अंतिम संस्कार 

‘जातस्यहि ध्रुवो: मृत्यु ध्रुवं जन्म मृत्युस्य च
तस्मादपरिहायर्थे न त्वं शोचतुमहर्सि:।’

83 वर्षीय बालकृष्ण सकलानी जी का आज देहावसान हो गया। नई टिहरी (बौराड़ी) स्थित अपने पुत्र के निवास पर उन्होने अंतिम सांस ली। कल उनका कोटी में अंतिम संस्कार होगा। कुछ माह पूर्व पांव फिसलने से उन्हे चोट आयी थी। नेत्र ज्योति भी नहीं के बराबर थी।

जीवन किसी पहेली से कम नहीं है। मैं बचपन से उन्हें जानता था तथा करीब का रिश्ता रहा। अंतिम विदाई के अवसर पर उन्हे याद करना कर्तव्य समझता हूं।

बी के सकलानी जी उस समय 07 वर्ष के थे, जब उनके पिताजी का देहांत हो चुका था। उन का छोटा भाई उस समय 02 वर्ष का था। विधवा माता ने किसी प्रकार से अपने बच्चों को यह स्कूली शिक्षा दिलाई और पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुजार गांव सकलाना से श्री बी के सकलानी ने कक्षा 08 की परीक्षा उत्तीर्ण की।
घर की अर्थव्यवस्था खराब होने के कारण वह उदयपुर पट्टी के बगोड़ी गांव में चले गए जहां उनका ननिहाल था।

वहां पर बच्चों को पढ़ाकर अर्थोपार्जन करने लगे। इसके बाद खमोली गांव में भी उन्होंने शिक्षण कार्य किया और फिर नेरी- बरनो गांवों में भी बच्चों को पढ़ा करके कुछ पैसे कमाए। तब तक उनकी उम्र 16 वर्ष की हो गई थी और कुछ समझ भी आने लगी थी।

चंद्र मोहन सकलानी जो कि पडियार गांव के थे। उस क्षेत्र में स्थाई टीचर थे। उनके पिता वहां सेटलमेंट में अमीन के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने श्री बी के सकलानी की प्रतिभा को देखकर ₹45 महिने पर उन्हें अपने साथ काम पर लगा दिया । तदोपरांत सन 1960 तक रवाई के अनेक क्षेत्रों में उन्होंने कार्य किया और इसके बाद पुरानी टिहरी में सेटलमेंट विभाग में उन्हें बुलाया गया।

उस समय श्री जय कृष्ण उनियाल जो कि निकटवर्ती उनियाल गांव के निवासी थे और बेसिक शिक्षा अधिकारी के यहां लिपिक के पद पर कार्यरत थे। उनकी प्रेरणा से उन्होंने अध्यापक बनने का फैसला लिया।

बी के सकलानी का पुरानी टिहरी में स्थित बीएसए कार्यालय में अध्यापक ट्रेनिंग के लिए इंटरव्यू हुआ। उन्हीं के अनुसार 19 का पहाड़ा पूछा गया और उनका 02 वर्षीय एचटीसी के लिए चयन हो गया। 01 वर्ष उन्होंने रुद्रपुर में प्रशिक्षण लिया और दूसरे वर्ष ज्योलिकोट से प्रशिक्षण लेकर के उन्हें अध्यापक सर्टिफिकेट मिल गया। रोजगार कार्यालय में नाम लिखाया और इंटरव्यू हुआ।

उनका प्रथम चयन सन 1962 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवान में हुआ लेकिन उन्होंने वहां ज्वाइन नहीं किया। क्योंकि विभिन्न स्थानों में कार्य करने का उन्हें अनुभव था और उन्हें जानकारी थी कि उत्तरकाशी जनपद में ₹50 सीमांत भत्ता मिलता है। इसलिए ₹64 प्रति माह का वेतन और ₹50 सीमांत भत्ता प्राप्त कर16 अगस्त 1962 को वह उत्तरकाशी जनपद में प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक के रूप में नियुक्त हुए।

बी.के.सकलानी ने अनेकों स्थानों पर अपनी सेवाएं दी। उत्तरकाशी में पट्टी मुगरसंती (नौगांव) में उन्होंने अपनी सेवाएं दी। उसके बाद लैंसडाउन जयहरीखाल आदि स्थानों में भी उन्होंने एक अध्यापक के रूप में कार्य किया। टिहरी जनपद के जलडयालगांव विद्यालय में भी उन्होंने शिक्षक के रूप में कार्य किया। उसके बाद राज0 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवान और राजकीय इंटर कॉलेज पुजार गांव सकलाना में अपनी सेवाएं दी।

सन 1962 से लेकर 2001 तक श्री बी के सकलानी ने शिक्षक के रूप में कार्य किया। श्री बीके सकलानी को हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाओं में व्यक्तिगत परीक्षार्थी के रूप में अच्छे अंक प्राप्त करने के कारण शिक्षा विभाग के द्वारा उन्हें प्रत्येक बार ₹150 पुरस्कार के रुप में भी दिया गया।

स्व. बी के सकलानी एक प्रतिभावान, कार्य कुशल और निष्ठावान शिक्षक रहे। वह जीवन भर महाभारत के भीष्म की तरह कष्टों से जूझते रहे। बचपन मैं पिता का साया सिर से उठ जाना, आर्थिक विपन्नता और परिस्थितियों ने उन्हें मजबूत बनाया।

सन 1986 में एक बार उनका भरा पूरा परिवार पत्नी की मृत्यु के कारण परेशानियों में घिर गया। छोटे-छोटे 05 बच्चे, उनकी परवरिश,पढ़ाई- लिखाई तथा देखभाल करने की समस्या श्री सकलानी के ऊपर आ गई। उन्होंने धैर्य से यह कष्टों का मुकाबला किया। पुन विवाह किया। जिसके कारण उनके बच्चों को मां का सहारा मिल गया।

तीन जून बौराड़ी में उनसे अस्पताल में भेंट हुई थी। शारीरिक कष्टों से वे जूझ रहे थे।आंखों से दिखाई नहीं देता है। शरीर लकवे की बीमारी से पीड़ित और कूल्हे में पडी रौड लेकिन मानसिक रुप से स्वस्थ थे।

उनका बड़ा बेटा श्री विमल सकलानी सुभाष चंद्र कॉलेज मे अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं।दूसरा बेटा श्री विजय सकलानी और उसकी पत्नी दोनों ही राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। तीसरा बेटा डाक विभाग में कार्यरत है। तीनों पुत्रों और तीनों पुत्रियों की शादी हो चुकी है।

ईश्वर अपने श्री चरणों में स्थान दे तथा शोक संतप्त परिवार को दुख की इस घड़ी से उबरने में मदद करे। एक आदर्श गुरुजी, मार्गदर्शक, कर्तव्यनिष्ठ साथी और प्रेरणा स्रोत को अंतिम श्रद्धांजलि।

*सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत

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