पहाड़ों में आसमानी आफत, कुदरत के साथ मानवीय छेड़छाड़ के कारण कयामत

पहाड़ों में आसमानी आफत, कुदरत के साथ मानवीय छेड़छाड़ के कारण कयामत
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पहाड़ों में आसमानी आफत, कुदरत के साथ मानवीय छेड़छाड़ के कारण कयामत

अप्राकृतिक, असंगत, तथा अनियोजित ढंग से पहाड़ों के कटाव का परिणाम है यह

वर्तमान मानसून सीजन में पहाड़ों पर प्रकृति का प्रकोप कहर बरपा रहा है। पहाड़ों में आसमानी आफत, कुदरत के साथ मानवीय छेड़छाड़ का मुख्य कारण है, कयामत हिमाचल से लेकर उत्तराखंड तक जनजीवन अस्त-व्यस्त है। लोग भय के साए में जीवनयापन कर रहे हैं। अप्राकृतिक, असंगत, तथा अनियोजित ढंग से पहाड़ों के कटाव करने का यह परिणाम है। कुदरत एक ही दिन में कहर नहीं बरपाती है बल्कि धीरे-धीरे अपने साथ किए गए खिलवाड़ का बदला लेती है। पहाड़ों की भौगोलिक संरचना प्रकृति के अनुकूल है।

भौतिकवाद के अंधी दौड़ में पहाड़ों की अस्मिता को नष्ट करने का परिणाम यह कयामत है। जिससे सैकड़ो लोगों की जानें जा चुकी है। समय-समय पर प्रकृति अपना संकेत देती है लेकिन मानवीय अहंकार के कारण सब कुछ धरा का धरा रह जाता है।

पहाड़ों में आसमानी आफत, कुदरत के साथ मानवीय छेड़छाड़ के कारण कयामतपहाड़ी क्षेत्रों में विकास के नाम पर सड़कें तो बनी हैं लेकिन मलबे का सही निस्तारण नहीं हुआ। लोगों ने गांव को छोड़कर सड़कों के किनारे बसायत की है और बिना सोचे समझे अपने आशियाने और व्यापारिक प्रतिष्ठान बनाने शुरू कर दिये। शासन और प्रशासन भी इस ओर मूक दर्शक बना रहा। जब कोई घटना घट जाती है और लोगों को अचानक मौत का शिकार होना पड़ता है, तब शासन- प्रशासन अवश्य हाथ- पांव मारता है।

अभी कुछ दिन पूर्व चंबा में एक चट्टान गिरने से बच्चे सहित पांच व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। कई दिनों से प्रशासन मलबे को हटाने में लगा रहा। कहीं बिजली की लाइन टूटी तो कहीं अनेक वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। गनीमत रही कि उह समय समीपस्थ विद्यालय के बच्चों की छुट्टी नहीं हुई, अगर आधा घंटे बाद यह घटना घटती तो बच्चे इस मलबे की चपेट में आ सकते थे।

लोगों ने सड़क के किनारे अंधाधुन मशीनों से पहाड़ के सीने को चीर दिया है

चंबा एक ऐसा क्षेत्र है जहां न कोई नदी है, न नदी के कटाव का सवाल है। ना किसी घाटी में बसा हुआ यह क्षेत्र है बल्कि चारों तरफ से खुला हुआ है। यह पहाड़ी कस्बा टिहरी गढ़वाल का हृदय स्थल है और सबसे बड़ा ग्रामीण व्यापारिक प्रतिष्ठान है। लोगों ने सड़क के किनारे अंधाधुन मशीनों से पहाड़ के सीने को चीर दिया है।

चंबा मसूरी रोड, पुरानी टिहरी सड़क, ऋषिकेश रोड, नई टिहरी मार्ग, गजा रोड, कॉलेज रोड, ऐसा कोई क्षेत्र चंबा में नहीं है जो कि अतिक्रमण का शिकार ना बना हो और हादसों को बुलाया न दे रहा हो। समय-समय पर निर्दोष भी मौत मारे जाते हैं जिसका जिम्मेदार कोई नही है। किसी के पास जवाब नहीं है।

शहर के चारों ओर घट रही हैं आए दिन छोटी-मोटी घटनाएं 

कुछ वर्ष पूर्व पुरानी टिहरी रोड पर मलबे के कारण स्कूटी से बच्चा छिटक कर गिरने से बे-मौत मारा गया था। आए दिन छोटी-मोटी घटनाएं शहर के चारों ओर घट रही हैं। हाल में ही हुई पांच मौत भी इसी बात का परिणाम है।

नालियों की समुचित व्यवस्था न होना, खाले और नारदानों पर अनियोजित ढंग से मकान बना देना, सड़कों का पानी गांवों के ऊपर छोड़ देना, निकासी के पानी की पुख्ता व्यवस्था न होना, सीवर लाइन न होने के कारण गढ्ढों से पानी का रिसना आदि अनेकों ऐसे कारण है जिसके कारण चंबा किसी आपदा को न्योता दे रहा है।

मसूरी रोड पर नवनिर्मित पार्किंग के ऊपर विशालकाय चट्टान

मसूरी रोड पर नवनिर्मित पार्किंग के ऊपर विशालकाय चट्टान को मशीनों से काटा गया। इसके ठीक ऊपर हजारों लीटर पानी का टैंक बना है। ईश्वर ना करें अगर वह टूट कर नीचे आ गया तो पूरी सुमन कॉलोनी के लिए त्रासदी उत्पन्न करेगा। इसी प्रकार से मसूरी रोड का पानी सुमन कॉलोनी की तरफ नारदानों के बजाय, सड़क पर डायवर्ट कर दिया गया जिसके कारण कॉलेज रोड पर किसी न किसी दिन एक बड़ा हादसा होगा। कौन जिम्मेदारी को लेने के लिए आगे आएगा?

करोड़ों रुपए की पार्किंग फांक रही हैं धूल

करोड़ों रुपए की चार पार्किंग कुछ समय पूर्व चंबा शहर में बनी थी लेकिन वे धूल फांक रही हैं।चंबा एक छोटा सुंदर कस्बा था लेकिन कुछ वर्षों से अतिक्रमण के कारण, मानवीय छेड़छाड़ की कोशिशें के कारण, आयोजित ढंग से विकास करने के कारण, इसको कुरूप बना दिया गया है। करोड़ों रुपए की चार पार्किंग कुछ समय पूर्व चंबा शहर में बनी थी लेकिन वे धूल फांक रही हैं। मृतप्राय: हैं। इसी प्रकार से कुछ दशक पूर्व जलागम द्वारा लाखों रुपए का बजट आरा न्यारा किया गया और मुश्किल से भी 10 वर्ष करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य नहीं चल पाए। साक्ष्य के रूप में कुछ चित्र भी संलग्न हैं।

मानव की याददाश्त इतनी कमजोर है कि समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया जाता है। शासन-प्रशासन, जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जो परिवार अपने सदस्यों को हादसों में खो देते हैं उन पर क्या गुजरती होगी? हर एक कल्पना कर सकता है।

चंबा में दिन-दुपहरी में चट्टान गिरने के कारण जो हादसा हुआ और पांच लोगों की मौत हुई, समस्त क्षेत्र-शहर के निवासियों ने अपनी संवेदना व्यक्त की। प्रशासन ने जिस चुस्ती से कार्य किया, वह सराहनीय है। जिलाधिकारी महोदय प्रशासन-पुलिस के साथ अर्धरात्रि तक मौके पर कार्यों का मुयावना करते रहे और जब तक समस्त दबे हुए व्यक्ति नहीं मिल गए, तब तक मौके पर ही मौजूद रहे। जिसकी शहरवासियों, क्षेत्र वासियों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की है।

राहत और बचाव कार्य करना प्रशासन की जिम्मेदारी है लेकिन आम जनमानस की भी तो जिम्मेदारी है कि वह अतिक्रमण न करें। पहाड़ों में अनावश्यक छेड़छाड़ न करें। अनियोजित और असंगत रूप से बसायत न करें। नाली- नारदानों की समुचित व्यवस्था करें और समय रहते शासन -प्रशासन का ध्यान भी आकर्षित करते रहें। यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह मानवीय हितों के रक्षा के लिए, स्वार्थ से दूर रहकर,जीवन के लिए स्वस्थ, स्वच्छ और सुंदर धरती बनायें इसी में सभी का कल्याण है।

*सोमवारी लालसकलानी ‘निशांत’
सुमन कालोनी चंबा,टिहरी गढ़वाल।

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