यह न कोई छावनी, न कोई पांच सितारा होटल और न कोई राजा महाराजा का किला बल्कि विकास पुरुष के कार्य की एक जीवन्त मिशाल

यह न कोई छावनी, न कोई पांच सितारा होटल और न कोई राजा महाराजा का किला बल्कि विकास पुरुष के कार्य की एक जीवन्त मिशाल

प्रस्तुति: कवि सोमवारी लाल सकलानी, निशांत। भारतीय प्रजातांत्रिक व्यवस्था है। यदि हम प्रजातंत्रिक व्यवस्था में अच्छे जनप्रतिनिधियों को चुनकर विधानसभा या संसद में भेजते हैं, तो अवश्य उसकी सुखद परिणीति का लाभ जनता को मिलता है। सन 2012 में टिहरी विधानसभा से एक जीवट जुझारू और विकासवादी सोच के व्यक्ति उत्तराखंड विधानसभा में पहुंचे। उन्होंने अपनी सोच के अनुरूप टिहरी क्षेत्र में वह कार्य कर दिखाया जो कि आजादी के बाद कोई बड़ा से बड़ा प्रतिनिधि नहीं करा पाया। चित्र में- पहाड़ी के ऊपर अवस्थित यह पैलेसनुमा बिल्डिंग जो दिखाई दे रही है, न कोई छावनी है न कोई पांच सितारा होटल और न किसी राजा महाराजा के द्वारा निर्मित किला बल्कि यह जीवन रेखा को सुरक्षित रखने वाला नर्सिंग संस्थान, टिहरी है जो कि पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री दिनेश धनै की एक महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत था/ है। जब सन 2012 में श्री दिनेश धनै टिहरी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक के रुप में विधानसभा पहुंचे तो उन्होंने धरातल पर कार्य करना शुरू किया। अपनी योग्यता के बलबूते निर्दलीय विधायक होते हुए भी वह सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और अपने उस कार्यकाल में टिहरी के लिए वह जो कर गए, आने वाली पीढ़ी युगों तक याद रखेगी। श्री दिनेश धनै ने टिहरी क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खेल, मनोरंजन, पेयजल तथा रोजगार पर अपना ध्यान केंद्रित किया और अपने विधानसभा क्षेत्र में अनेक संस्थान स्वीकृत करवा कर उन्हें संचालित करवाया। उसी कड़ी में यह नर्सिंग ट्रेनिंग कॉलेज सुरसिंगधार (टिहरी) में अवस्थित है। कोरोना काल में जब सारी व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गई। मीडिया और अखबार मौतों के आंकड़े गिनने लगे, डॉक्टर, पुलिस, समाजसेवी और सरकार सब परेशान थे, शासन के सम्मुख अनेकों समस्याएं कि कोरोना वायरस संक्रमितों को कहां रखा जाए?  क्योंकि यह एक छूत की बीमारी है और संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंचती है। यह बहुत मुश्किल कार्य था। संक्रमित व्यक्तियों को रखने के लिए एक निश्चित स्थान की जरूरत होती है और टिहरी गढ़वाल का यह नर्सिंग संस्थान वरदान सिद्ध होकर सामने आया और अनेक जाने इस संस्थान के कारण बच पायी। इस नर्सिंग संस्थान के बन जाने के कारण, टिहरी गढ़वाल के लोगों को ही नहीं बल्कि समस्त आस-पास के जनपदों के गरीब छात्र-छात्राओं को भी सरकारी सेवा प्राप्त करने का अवसर मिला। आज यह प्रशिक्षण केंद्र मील का पत्थर है। जहां लोग नर्सिंग की ट्रेनिंग करने के लिए लाखों रुपए खर्च करके देहरादून, हरिद्वार जाते थे और गरीब छात्र -छात्राएं योग्यता होने पर भी प्रशिक्षण से वंचित रह जाते थे, इस नर्सिंग स्कूल के अस्तित्व में आने के बाद मात्र ₹12000/शुल्क पर प्रशिक्षण कराया जाता है जो कि शहरों की तुलनात्मक वार्षिक फीस से बहुत कम है। ना के बराबर है। गरीब माता-पिता किसी न किसी प्रकार से इतनी रकम जुटा ही लेते हैं और गरीब तबके के बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त करके स्वास्थ्य विभाग में सेवा करने के लिए तैयार होते है। भविष्य में होते रहेंगे। यह नर्सिंग स्कूल श्री दिनेश धनै की दूरगामी सोच का परिणाम है। यद्यपि उन्होंने अनेकों विकास पर कार्य टिहरी में किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर, नगर क्षेत्र चंबा मे किये। कैबिनेट मंत्री होते हुए संपूर्ण उत्तराखंड मे भी नए विकास के आयाम स्थापित किए। दुर्भाग्य से पिछले विधानसभा चुनाव में वे विधानसभा नहीं पहुंच पाए, जिसके कारण क्षेत्र का विकास अपेक्षित नहीं हो पाया। समय की मांग है कि हम उन जनप्रतिनिधियों को चुनकर के विधानसभा में भेजें, जो जनता के हितों को ध्यान मे रखते हुए कुछ ना कुछ कर सके। प्रजातंत्र हो या राजतंत्र। यह राजा की क्षमता, सोच, और योग्यता पर निर्भर करता है कि वह कितना विकास कर सकता है। धर्म, जाति, संप्रदाय और क्षेत्र की मानसिकता को छोड़कर, विकासवादी व्यक्ति को आगे बढ़ाना चाहिए। हमारे पास अनेकों ऐसे उदाहरण है। आदर्श हैं। जिन्होंने अपनी विकासवादी सोच के कारण इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया है। राजतंत्र व्यवस्था में चाहे सम्राट अशोक हो या अकबर महान या शेर शाह सूरी। कालांतर में श्री भुवनचंद्र खंडूडी रहे हों या नितिन गडकरी। इसी अनुक्रम में विकास की इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में, टिहरी क्षेत्र में  श्री दिनेश धनै का नाम भी अग्रणी पंक्ति में आता है।      *कुवि कुटीर,  सुमन कॉलोनी चंबा, टिहरी गढ़वाल।
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