Uttrakhand को चाहिए मोदी योगी जैसा नेतृत्व, तभी खुशहाल उत्तराखंड

 

Uttrakhand को चाहिए मोदी योगी जैसा नेतृत्व, तभी खुशहाल उत्तराखंड

सरहद का साक्षी @ गोपाल बहुगुणा

उत्तराखंड राज्य जिस उद्देश्य के लिए बना था वह उद्देश्य अब कहीं भी नजर नहीं आ रहा है, जो उद्देश्य नजर आ रहा है वह तो केवल अभी ऐसा लगता है की केवल कुछ राजनीतिक लोगों के राज करने के लिए राज्य बना है।

राज्य गठन के बाद इन 20-22, सालों में इस राज्य को राजनीतिज्ञों ने खूब लूटा और राज्य को कर्ज की बुनियाद पर खड़ा कर दिया। जिसका चुकता हिसाब आम जनता की जेब से होना तय है और यह बात आम लोगों को अब समझ जानी चाहिए।  अब प्रश्न उठता है कि आम लोगों के पास विकल्प क्या है वह किसे अपना नेता चुने, उत्तराखंड में हर गांव कस्बे मोहल्ले में नेताओं के अलावा कुछ दिखता ही नहीं है, और कुछ दिखता है तो नेताओं के चमचे जो उनके आगे पीछे हमेशा घूमते रहते हैं।

इन चमचों का काम भोले भाले लोगों को गुमराह करना होता है, जनता को गुमराह करके यदि कभी इनकी सरकार बन भी जाती है तो यह फिर अपने प्रत्याशियों से उल्टे सीधे काम करवाने के लिए दबाव बनाते हैं।  यही चमचे कानून की धज्जियां उड़ाते यदा- कदा दिख जाते हैं। इस राज्य में दूर तक कोई, ऐसा नेतृत्व दिखता नहीं है, जो यहां की स्थिति परिस्थिति को बदलने में आमूल चूल परिवर्तन कर सके। अभी तो उत्तराखंड का दुर्भाग्य है कि यहां पर जो राजनीतिज्ञ हैं वे राजनीतिज्ञ कम ड्रामा बाज ज्यादा है वह अपना वोट बैंक के लिए जनता को गुमराह करने के लिए कुछ भी ड्रामा कर सकते हैं।

इन राजनीतिज्ञों की वजह से ही यहां की युवा शक्ति राह भटक गई है, इनमें किसी भी तरह की रचनात्मक सोच जन्म नहीं ले पा रही है, ऐसे युवा बाजारों कस्बों में अपनी मित्र मंडली के साथ समय का दुरुपयोग करते हुए अधिकांशतः देखें जाते हैं, कुछ युवाओं को नशें की लत में धकेला जा रहा है, हर तरफ से देखा जाए तो उत्तरांचल को खोखला करने की साजिश कामयाब होती नजर आ रही है।

बाहर से आने वाले लोग भी बड़े पैमाने पर यहां पर जमीनें खरीद रहे है, वे स्थानीय लोगों को कुछ लालच देकर, उनका कुछ काम करके, यहां पर अपनी पैठ बना लेते हैं। इसके बाद इन लोगों का यहां के संसाधनों को चूसने का काम शुरू हो जाता है, जिसमें हमारे स्थानीय लोग ही इनकी मदद करने के लिए उनके मकसद को कामयाब करने में सहायक होते हैं। ऐसा सब यहां पर राजनीतिज्ञों के गलत बीज बोने से हो रहा है और इस राज्य में धीरे-धीरे यह अपनी जड़ें फैला रहा है।

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यह जडें काफी फैल भी चुकी है और आज यदि हमने इनको कुचलने का काम ना किया तो भविष्य में उत्तराखंड के खंड खंड होने में समय नहीं लगेगा। ऐसे में आम जनता ही इसका समाधान कर सकती है और उसके लिए यह कि आम लोगों से आवाज उठनी चाहिए कि उतराखंड को 15-साल तक, केंद्र शासित राज्य घोषित कर दिया जाए, या मोदी जी, योगी जी, जैसा, नेतृत्व, ढूंढा जाए, चाहे वह किसी भी राज्य से हो, जनता को विकास से मतलब है।

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