जगन्नाथ पुरी के कुछ अद्भुत रहस्य जो हिन्दू धर्मावलम्बियों के लिए जानने आवश्यक हैं, आइए! जानें उन रहस्यों को…। 

जगन्नाथ पुरी के कुछ अद्भुत रहस्य जो हिन्दू धर्मावलम्बियों के लिए जानने आवश्यक हैं, आइए! जानें उन रहस्यों को...। 
 सरहद का साक्षी @ हर्षमणि बहुगुणा 

“भगवान् श्री कृष्ण ने जब देह छोड़ी तो, उनका सारा शरीर तो पञ्चतत्त्व में मिल गया, लेकिन उनका हृदय बिलकुल सामान्य एक जिन्दे आदमी की तरह धड़क रहा था और वह बिलकुल सुरक्षित था , उनका हृदय आज तक सुरक्षित है जो भगवान् जगन्नाथ की काठ की मूर्ति के अंदर रहता है और उसी तरह धड़कता है, ये बात बहुत कम लोगों को ज्ञात है।–

“माँ दया सेवा संस्थान ” 
महाप्रभु का महा रहस्य
सोने की झाड़ू से होती है सफाई…।

महाप्रभु जगन्नाथ (श्री कृष्ण) को कलियुग का भगवान भी कहते है…. ‘पुरी’ (उड़ीसा) में जग्गनाथ स्वामी अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निवास करते हैं… मगर रहस्य ऐसा है कि आजतक कोई जान न पाया।
हर 12 साल में महाप्रभु की मूर्ति को बदला जाता है,उस समय पूरे ‘पुरी’ शहर में ‘ब्लैकआउट’ किया जाता है यानी पूरे शहर की लाइट बंद की जाती है। लाइट बंद होने के बाद मंदिर परिसर को crpf की सेना चारों तरफ से घेर लेती है…उस समय कोई भी मंदिर में नहीं जा सकता।

मंदिर के अंदर घना अंधेरा रहता है…पुजारी की आँखों में पट्टी बंधी होती है…पुजारी के हाथ में दस्ताने होते हैं..वो पुरानी मूर्ति से “ब्रह्म पदार्थ” निकालता है और नई मूर्ति में डाल देता है…ये ब्रह्म पदार्थ क्या है आजतक किसी को नहीं पता…इसे आजतक किसी ने नहीं देखा. ..हज़ारों सालों से ये एक मूर्ति से दूसरी मूर्ति में ट्रांसफर किया जा रहा है…
यह एक अलौकिक पदार्थ है जिसको छूने मात्र से किसी भी इंसान की जिस्म के चिथड़े उड़ जाए… इस ब्रह्म पदार्थ का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है…मगर ये क्या है ,कोई नहीं जानता… ये पूरी प्रक्रिया हर 12 साल में एक बार होती है…उस समय सुरक्षा बहुत अधिक होती है…
मगर आजतक कोई भी पुजारी ये नहीं बता पाया कि महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ति में आखिर ऐसा क्या है ? ? ?
कुछ पुजारियों का कहना है कि जब हमने उसे हाथ में लिया तो खरगोश जैसा उछल रहा था…आंखों में पट्टी थी…हाथ मे दस्ताने थे तो हम सिर्फ महसूस कर पाए…
आज भी हर साल जगन्नाथ यात्रा के उपलक्ष्य में सोने की झाड़ू से पुरी के राजा खुद झाड़ू लगाने आते हैं…
भगवान जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से पहला कदम अंदर रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज अंदर सुनाई नहीं देती, जबकि आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देगी ।
आपने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे-उड़ते देखे होंगे, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता।
दिन में किसी भी समय भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती।
भगवान जगन्नाथ मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदला जाता है, ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा।
इसी तरह भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है, जो हर दिशा से देखने पर उसका मुंह आपकी तरफ ही दिखता है।
भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, जिसे लकड़ी की आग से ही पकाया जाता है, इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है।
भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर दिन बनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जैसे ही मंदिर के पट बंद होते हैं वैसे ही प्रसाद भी समाप्त हो जाता है।
जय श्री जगन्नाथ महाराज, भगवान की अनुपम माया, भगवान ही जानें ।  सादर – साभार ।

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