पुण्यतिथि पर विशेष: एक अमर नक्षत्र; प्रख्यात पर्यावरणविद पत्रकार तथा समाजसेवी स्व. कुंवर प्रसून

पुण्यतिथि पर विशेष: एक अमर नक्षत्र; प्रख्यात पर्यावरणविद पत्रकार तथा समाजसेवी स्व. कुंवर प्रसून
 सरहद का साक्षी @कवि: सोमवारी लाल सकलानी, निशांत 

15 जुलाई को प्रख्यात पर्यावरणविद पत्रकार तथा समाजसेवी कुंवर प्रसून की पुण्यतिथि है। स्वर्गीय प्रसून अपने समय के एक क्रांतिकारी, समाज सुधारक और रचनाकार रहे हैं । 56 वर्ष की अल्पायु में कि वे स्वर्ग सिधार गए।
स्वर्गीय प्रसून का जीवन एक खुली पुस्तक के समान है। नवंबर सन उन्नीस सौ 79 से मेरा स्वर्गीय प्रसून से संपर्क रहा, जब चिपको आंदोलन के दौरान खुरेत पुजाल्डी के वनों में, आदरणीय श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी और श्री धूम सिंह नेगी जी के नेतृत्व में पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन चल रहा था ।उस दौरान मै राजकीय इंटर कॉलेज पुजार गांव सकलाना में छात्र संघ का अध्यक्ष था और कुछ समय तक संघर्ष समिति का अध्यक्ष रहा।
उस आंदोलन को धार देने के लिए इंदिरा गांधी वृक्ष मित्र पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विशेश्वर दत्त सकलानी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री चतर सिंह नकोटी, इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार प्राप्त श्री विजय जरधारी, स्वर्गीय प्रसून के अनन्य मित्र तथा समाजसेवी, लेखक व क्रांतिकारी स्वर्गीय प्रताप शिखर ,श्री साहब सिंह सजवान आदि लोग उस आंदोलन में सक्रिय थे।
इस आंदोलन में मेरी भूमिका भी एक हफ्ते की रही थी। उसके बाद स्वर्गीय कुंवर प्रसून से लगातार संपर्क रहा ।जब कभी वह नई पुस्तक का प्रकाशन करते थे ,तो प्रति मुझे जरूर भेंट करते थे ।बीजों की विरासत हो या कोल्टा बंधुआ मजदूरों की व्यथा पर आधारित पुस्तक , वह स्वयं मेरी छानी में आकर के भेंट करते थे।
प्रसून जी का रचना संसार बड़ा अद्भुत है। वह एक समग्र इतिहास थे। क्रांतिकारी थे। जिद्दी थे ।जुझारू थे और सत्यवादी थे।
अपनी सत्य निष्ठा के कारण कभी-कभी वह अपने लोगों में अलग-थलग पड़ जाते थे। चापलूसी या शब्दों पर पालिश करके कहने की उनकी आदत नहीं थी।
हेंवल उपत्यका की मशहूर घाटी में उत्पन्न प्रसिद्ध पर्यावरणविद् श्री धूम सिंह नेगी जो कि वह समय श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी की टीम के सबसे बड़े कार्यकर्ता रहे हैं और तब से आज तक अविरल समाज सेवा से जुड़े हुए हैं, श्री बहुगुणा जी उनको अपना हनुमान कहते थे।
स्व कुंवर प्रसून का पत्रकारिता के क्षेत्र में एक विशिष्ट स्थान है। सन 19 82 में दिनमान में उनका लेख “जहां औरतें अपने ही मर्दो के द्वारा वेश्याएं बनाई जाती हैं ” जब प्रकाशित हुआ तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार का पुरस्कार प्राप्त हुआ। उस दौरान फोन की सुविधाएं नहीं थी। जब उनके प्रकाशित लेख की प्रति एक बार मैंने उनको दिखाई तो बड़े प्रसन्न हुए। उस समय मै डीएवी कॉलेज में परास्नातक कक्षा का छात्र था।
स्वर्गीय पुण्य प्रसून के महाप्रयाण दिवस के अवसर पर मैं उन्हें भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। अपेक्षा करता हूं के समय-समय पर ऐसे क्रांतिकारी व्यक्ति उत्पन्न होते रहे ,जिससे कि समाज को नई गति मिलती रहे। महान सर्वोदय नेता स्वर्गीय प्रसून को समाज कभी भुला नहीं पाएगा।
वे एक अमर नक्षत्र हैं।

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