विश्व योग दिवस: खड़ी हैं – आज सभी की टाँगें !

विश्व योग दिवस: खड़ी हैं - आज सभी की टाँगें !

सरहद का साक्षी @कवि: सोमवारी लाल सकलानी, निशांत

विश्व योगमय, देश बोधमय, प्रदेश जोगमय आज,
कोरोना ने घर बैठाकर,खड़ी करवा दी सबकी टांग।
खेती- बाड़ी ,काम न धंधा, बेकारी बढ़ी बेहिसाब।
टांगे खड़ी, सिर जमीनपर, अब यही समय की मांग।

घर द्वार गांव, गुठ्यार- खेत – खलियान सब छोड़े,
वर्जिस कसरत छूटी , छूटी चक्की ओखली छांछ।
दस बजे परिवार जागता, क्या नही शरीर अपराध ?
लगे फिर सभी फोन पर, कौन सुने किसी की बात।

भूल गए सब भगवान कृष्ण का,कर्म योग का ज्ञान।
पतंजलि ने योग सिखाया, था वह पौराणिक काल।
योग दिवस पर आज सभी ने, कर ली खड़ी हैं टांग !
कदमताल खेल श्रम सब छोड़ा, फेसबुकी व्यायाम।

योग दिवस है आज साथियों, कर देना खड़े न हाथ !
योग रस्म है, जोग भस्म है,दे दो रोग व्याधि को मात।
मौसम ठीक है,बाहर निकलो ! तभी बन सकती बात,
नियमित श्रम मे हाथ बढ़ाओ,रहो सदा योग के साथ।

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