रिश्तों की मिठास: मित्रता एक विकसित होते हुए गुलाब के पुष्प के समान है

रिश्तों की मिठास: मित्रता एक विकसित होते हुए गुलाब के पुष्प के समान है

सेवानिवृत प्रधानाचार्य, श्री चतर सिंह चौहान

 सरहद का साक्षी @कवि: सोमवारी लाल सकलानी, निशांत 

आज नई टिहरी शहर मे सेवानिवृत प्रधानाचार्य श्री सी एस चौहान जी के साथ वर्तमान शिक्षा और कोरोना काल मे शिक्षा व्यवस्था के हालातों पर व्यापक विचार विमर्श हुआ।
श्री चतर सिंह चौहान राजकीय इंटर कॉलेज क्यारी नागुन से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी और मेरी सेवानिवृत्ति एक ही दिन है। लगभग 4 दशकों तक शिक्षा विभाग को उन्होंने अपनी सेवाएं दी। दिसंबर सन 1980 से और मार्च 2020 तक पर्वतीय क्षेत्रों के विभिन्न विद्यालयों में वे शिक्षक और प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत रहे। श्री सी एस चौहान मेरे अच्छे मित्रों में भी हैं और वह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के जिला संयोजक भी है।
श्री चौहान और मैं एक ही विकासखंड मे सेवानिवृत्ति के समय कार्यरत रहे हैं। लगभग चार दशक से शिक्षा व्यवस्था पर विचार विमर्श उनके साथ होता रहा है। यद्यपि वह राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारी रहे हैं और मैं मामूली सदस्य लेकिन फिर भी शिक्षा, शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक, शिक्षणेत्तर कार्य तथा शिक्षार्थी यही जीवन का एक लक्ष्य रहा है।

श्री चौहान और मेरे पिताजी दोनों पूर्व सैनिक रहे हैं, इसलिए सैनिक पुत्र होने के नाते भी आपसी लगाव रहा है। संयोग की बात है कि श्री चौहान जी की धर्मपत्नी श्रीमती सुंदरी चौहान भी राजकीय जूनियर हाई स्कूल भोनाबागी (टिहरी) से उसी तिथि को सेवानिवृत्त हुई है जिस तिथि को श्री चौहान जी।

श्री सी एस चौहान एक संपन्न व्यक्ति हैं। नई टिहरी (बुडोगी) के मूल निवासी होने के नाते उनकी नई टिहरी में पैतृक संपत्ति है, जिसे उन्होंने अपने बच्चों के व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाया है और स्वरोजगार की मिसाल पेश की है। श्री सिंह चौहान उदार स्वभाव के व्यक्ति हैं लगभग एक दशक पूर्व जब उन्होंने अपना होटल तथा वेडिंग प्वाइंट गैलेक्सी का निर्माण किया दो उसके विधिवत उद्घाटन से पूर्व ही,अत्यधिक बारिश होने के कारण जरूरतमंदों को निशुल्क वेडिंग प्वाइंट की सुविधाएं प्रदान की जो कि लोग आज भी याद करते हैं।

श्री सीएस चौहान के तीन पुत्र हैं और तीनों वेल सेटल्ड हैं। उनके बीच के पुत्र की ससुराल भी मेरे ही क्षेत्र सकलाना से है जो की एक उच्च शिक्षा प्राप्त संपन्न परिवार है। इसलिए भी श्री चौहान जी से निकटता है। उन्हीं के गांव के स्वर्गीय श्री आलम सिंह चौहान जी मेरे अध्यापक रहे हैं और मेरे चाचा जी के अच्छे मित्र भी थे।

आदरणीय श्री निरंजन सिंह चौहान जी भी मेरे साथ ही शिक्षक रहे हैं वह भी उसी गांव के हैं। श्री गंभीर सिंह चौहान जीबी हमारे क्षेत्र में एक आदर्श अध्यापक के रूप में कार्यरत रहे हैं। मित्रता एक विकसित होते हुए गुलाब के पुष्प के समान है जिसकी प्रत्येक पंखुड़ी में मिठास होती है और जब पुराने मित्र , साथी, सहयोगी या सहकर्मी मिलते हैं तो अनायास ही खुशी प्राप्त होना लाजमी है। यद्यपि मै नई टिहरी अपने निजी कार्य से गया था, लेकिन मित्रता के कारण कार्य के साथ-साथ श्री चौहान जी से भेंट हुई और बहुत अच्छा लगा। इसके साथ ही एक अन्य स्वजन से भी भेंट हुई, श्री विजय पवार (काकू भाई) काकू भाई उत्तराखंड क्रांति दल (टिहरी) के जिला अध्यक्ष हैं। वह भी अपना निजी कार्य छोड़कर समाज सेवा में तन्मयता से जुड़े रहते हैं।

हम सब की विचारधाराएं अलग-अलग हैं। अपने-अपने ढंग की लाइफ स्टाइल है लेकिन कहीं ना कहीं मित्रता की मधुरता अनायास ही होठों पर आ जाती है। श्री चौहान और श्री विजय पंवार (काकू भाई) द्वारा दिए गए सम्मान के लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं और आशा करता हूं कि सदैव मित्रता बनी रहे।

रिश्ते व्यक्ति को करीब लाते हैं और यही रिश्तों की मिठास होती है। इसीलिए पुराने जमाने में राजा- महाराजा रिश्तो को बहुत बड़ी तवज्जो देते थे । यह खून के रिश्ते नहीं बल्कि विचारधारा के और सामाजिकता के रिश्ते होते हैं, जिन्हें हम सदियों से निभाते आए हैं और विरासत के रूप में अपने आने वाली पीढ़ी के लिए धरोहर के रूप में छोड़ जाते हैं।

*कवि कुटीर, सुमन कॉलोनी चंबा, टिहरी गढ़वाल।
सचिव: उत्तराखंड शोध संस्थान ( रजि)चंबा( टिहरी गढ़वाल) यूनिट

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