कोविड कर्फ्यू में व्यापारियों के आक्रोश पर कविता: दारू खूब खरीद लें, व्यवस्था चाक चौबंद

कोविड कर्फ्यू में व्यापारियों के आक्रोश पर कविता: दारू खूब खरीद लें, व्यवस्था चाक चौबंद

 सरहद का साक्षी @कवि: सोमवारी लाल सकलानी, निशांत

कोविड कर्फ्यू बढ़ गया, व्यापारीजन गमगीन।
शराब जरूरी तंत्र को, देखना भीड़ का सीन।।
आटे चावल की चिंता नहीं, है सुरपान वरदान।
देवों का है सोमरस,अतिथि सत्कार का मान।।

धंधा चौपट हो गया, सुनो ! लोकप्रिय सरकार।
बेरोजगारी बढ़ चढ़ रही, कुछ तो करो उपाय।।
आपातकाल है लगा हुआ, केवल कोराना डर।
शराबियों के मान को, चढ़ा बोतल प्याला सर।।

पचहत्तर याद आ गया, थी जून माह की रात।
कोविड संकट आ गया,क्या नहीं बनेगी बात।।
दुकान व्यवसाय बंद है, बाजार लगे शमशान।
ग्यारह बजे तक भीड़ है, फिर शहर सुनसान।।

नेता अफसर सड़क पर,पुलिस प्रशासन साथ।
जनता दर्शन तड़फ रही,कुछ वीर लगाए घात।।
कोरोना कर्फ्यू लगा, बढ़ा दवा- दारू व्यापार।
अर्थव्यवस्था चौपट हुई,थम गया है कारोबार।।

फसल ओला ले गया, रोजगार कोरोना खाय।
कहां जाएं ?अरु क्या करें? सूझे नही उपाय।।
रोगमुक्त दुनिया हुई, केवल महारोग यह आए।
कोविड कोरोना नाम है, सुना चीन यह लाय।।

चार किटों की बांट में, हैं खड़े बीस पहलवान।
दानवीर इतने खड़े,भागे बलि, कर्ण,भामाशाह।।
पंद्रह जून तक कर्फ्यू बढ़ा, व्यापार रहेगा बंद।
दारू खूब खरीद लें,व्यवस्था है चाक -चौबंद।।

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