पूर्व वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक श्री मनीराम बहुगुणा: एक साहित्यकार के जाने का गम…!

सरहद का साक्षी @कवि : सोमवारी लाल सकलानी, निशांत,

अभी-अभी सोशल मीडिया में समाचार मिला है कि हमारी टिहरी जिले के वरिष्ठ साहित्यकार समाजसेवी एवं पूर्व वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक परम आदरणीय श्री मनीराम बहुगुणा जी का देहावसान हो गया है । मैं दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दे ।

स्वर्गीय श्री मनीराम बहुगुणा जी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। विद्वानों की काशी सावली ग्राम में एक संपन्न परिवार में उनका जन्म हुआ। एक लंबे समय तक उन्होंने राजकीय सेवा की और बाद के वर्षों में अपने को साहित्य के प्रति समर्पित कर लिया । जब वह 80 वर्ष के हुए तो उसके उपरांत वह प्रतिवर्ष अपना जन्मदिन मनाते थे। जिसका मैं साक्षी रहा हूं। कभी श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ, तो कभी सत्यनारायण भगवान की कथा, कभी अखंड रामायण आदि कई प्रकार के आयोजन वह जन्म दिवस पर करते रहे हैं ।
पुरानी टिहरी के अवसान के बाद स्वर्गीय श्री मनीराम बहुगुणा जी एकांत निवास रानीचौरी में लंबे समय तक रहे । अभी कुछ माह पूर्व रानीचौरी आए थे और 26 जून को उनका जन्म दिवस पर होना था। लेकिन जन्मदिन से एक सप्ताह पूर्व ही वह भगवान के चरणों में ही लीन हो हो चुके हैं ।
स्वर्गीय श्री मनीराम बहुगुणा जी ने अपना भरा पूरा परिवार छोड़ दिया है। यद्यपि उनकी पत्नी स्व.कमला बहुगुणा जी का काफी समय पूर्व देहावसान हो गया था । अत्यंत विदुषी महिला थी । शिक्षिका थी और बहुत सहृदय थी। रानीचौरी ,टिहरी गढ़वाल में उनके नाम से कमला बहुगुणा स्मृति शिशु निकेतन विद्यालय गतिमान है। स्वर्गीय मणिराम बहुगुणा जी प्रबंधक रहे हैं ।वर्तमान में वह अपने छोटे पुत्र के साथ देहरादून स्थित निवास में रहते थे। उनका बड़ा बेटा सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता है ।बेटी शिक्षिका है तथा दामाद अच्छे संपन्न व्यक्ति हैं ।
स्वर्गीय श्री मनीराम बहुगुणा जी के जाने का इस बात का दुख है कि उनके अंतिम दर्शन नहीं कर पाया क्योंकि कोरोना काल होने के कारण और बीच में अस्वस्थ होने के कारण उनसे नहीं मिल सका ।
स्वर्गीय मणिराम बहुगुणा जी साहित्य का अर्थ है उन्होंने अनेकों पुस्तकों की रचना की । गढराज्य देश की यादें, एक थी टिहरी , टिहरी आधोपांत , अधिक सब्जी उपज्यां, सिद्ध पीठ मां पुण्डयासिनी ,गढ़वाल एक परिचय, जीवन की चिर स्मरणीय श्रृंखलाएं आदि। उनकी अनेक पुस्तकों का आमुख, समीक्षाएं मेरे द्वारा भी लिखी गई हैं।
स्वर्गीय श्री मणिराम बहुगुणा जी दक्षिणपंथी विचारधारा के व्यक्ति थे। राजशाही के प्रति उनके मन मे अत्यंत सम्मान था। यह उनके निजी विचार थे जिसको वह मरणोपरांत एक विचारधारा के रूप में गतिमान रखें । सन 2012 में अपनी एक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री तथा तत्कालीन कृषि मंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी मुख्य अतिथि के रूप में थे। विश्वविद्यालय के अनेकों प्रोफेसर ,समाजसेवी, बुद्धिजीवी , पर्यावरणविद तथा सावली , जगधार , डारगी, चंबा आदि क्षेत्रों के असंख्य लोग उस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे। कार्यक्रम का संचालन करने का मुझे उनका आदेश था।
स्वर्गीय श्री मनीराम बहुगुणा जी को चार बार दिल का दौरा पड़ा था। यमदूत आए लेकिन उल्टे पांव भाग खड़े हुए। गजब की इच्छाशक्ति और जीजिविषा थी उनमें। जीवन में कभी हार न मानने वाले इंसान थे तथा अपनी मनमर्जी के बादशाह थे इसीलिए कई व्यक्ति कभी-कभी उन से कुपित भी हो जाते थे लेकिन वह कभी मायूस नहीं हुए। अनेकों कष्ट जीवन में आए लेकिन वह महामानव खेलता गया। महाभारत के भीष्म की तरह कुछ समय से सरशैय्या पर लेटे रहे और ईश्वर के विधान के अनुसार ब्रह्मविलीन हो गए। नमन।

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