समग्र स्वच्छता मिशन : ओडीएफ का तात्पर्य खुले में शौच से मुक्त होना

इतिहास गवाह है: आज भी काले अक्षरों में अंकित है तिलाड़ी गोली हत्याकांड

समग्र स्वच्छता मिशन : आलेख संख्या -13
( जानकारी , जरूरत और जवाबदेही )

01- ओ डी एफ क्या है ? :- पिछले वर्ष नगर पालिका परिषद चंबा को O D F ++पुरस्कार से नवाजा गया। अक्सर लोगों की उत्सुकता रहती है तथा यदा-कदा कई लोग पूछते भी हैं कि यह ओडीएफ क्या है ? चंबा नगर पालिका परिषद के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर होने के नाते जनसाधारण की सामान्य जानकारी के लिए चर्चा करना अपना उत्तरदायित्व समझता हूं।
ओ डी एफ का तात्पर्य ‘खुले में शौच से मुक्त’ होना है। अंग्रेजी के ” ओपन डिफेकेशन फ्री” को शार्ट रूप बनाकर ओडीएफ नाम दिया गया है । जैसा कि शब्दों से ही स्पष्ट है कि ‘खुले में शौच से देश को मुक्त करना ‘ इसका अर्थ है।
02- ओ डी एफ + किसे कहते हैं ? :- स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ओडीएफ प्लस दर्जा उन शहरों या क्षेत्रों को दिया गया है जहां पूर्ण रूप से खुले में शौच से मुक्ति हो चुकी है। इसका आशय है कि शहरी क्षेत्रों में किसी भी समय कोई भी व्यक्ति खुले में शौच नहीं जाता है बल्कि सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करता है और शहर स्वच्छता में अपना योगदान करता है।

03- ओ डी एफ ++ का दर्जा :- ओ डी एफ ++ का दर्जा उन शहरों और क्षेत्रों को दिया गया है जहां पूर्ण रूप से ‘ओपन डिफेकेशन फ्री’ खुले में शौच से मुक्त तथा ‘ओपन यूरिनेशन फ्री’ खुले में मूत्र विसर्जन से मुक्त दोनों प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त हो चुके हो । नगर पालिका परिषद क्षेत्र चंबा उन चंद सौभाग्यशाली शहरों में से एक है जिसे यह सम्मानित पुरस्कार “ओडीएफ प्लस प्लस “का दर्जा हासिल हुआ है।
04- रैंकिंग – सर्व प्रथम 2016 मे भारत के कुछ शहरों मे सर्वेक्षण करवाया गया। एसबीएम ( स्वच्छ भारत मिशन ) के अंतर्गत खुले में मल मूत्र के त्याग करने पर रोक लगाने के लिए यह नियम लागू करने का प्रोटोकॉल जारी किया गया । शहरी क्षेत्रों में यह अभिनव प्रयोग किया गया जिस के बहुत सकारात्मक परिणाम सामने आए।

शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता के परिणामों में स्थायित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शहरी विकास मंत्रालय ने 43 शहरों की रैंकिंग की थी। 4342 शहरों की रैंकिंग 2017 में तथा 4203 शहरों की रैंकिंग 2018 में की गई। 18 राज्यों में चलने वाला यह सर्वेक्षण नगरीय क्षेत्र तक सीमित रहा और 3223 नगर तथा वार्ड पूर्ण रूप से खुले शौच से मुक्त पाए गए । 2712 शहर ओडीएफ प्लस शहर का दर्जा प्राप्त किए।

05- छत्तीसगढ़ सबसे स्वच्छ राज्य :- बाद के वर्षों में भी यह सर्वेक्षण कार्य गतिमान रहा और उसी के आधार पर मानक निर्धारित किए गए संसद के उच्च स्तरीय समिति के द्वारा यह प्रोटोकॉल जारी किया गया। संपूर्ण देश में छत्तीसगढ़ देश का प्रथम राज्य बना जिसे वो डी ए प्लस प्लस राज्य का दर्जा दिया गया तथा समस्त भारत में सबसे स्वच्छ राज्य का पुरस्कार प्राप्त हुआ।

06- संसदीय समिति द्वारा सर्वेक्षण – जैसा कि बताया गया है कि शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता परिणामों में स्थायित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह सर्वेक्षण करवाया गया तथा उसी के आधार पर कार्य योजना लागू की गई। भारत की संसदीय समिति के द्वारा गहन अध्ययन करने के उपरांत संबंधित शहरों वार्डन तथा राज्यों को यह रैंकिंग प्रदान की गई जो कि अनुकरणीय है दूरगामी स्वच्छता के परिणामों को जलाने वाली भी है और जन जागरूकता के लिए तो यह मील का पत्थर है।

07- एक महत्वाकांक्षी योजना – स्वच्छ भारत मिशन की इस महत्वकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ सौंदर्य युक्त बनाने के साथ-साथ ओपन डिफेकेशन फ्री और ओपेन यूरिनेशन फ्री बनाना प्राथमिकता है। तदोपरांत कूड़ा निस्तारण तथा उस का सुसंगत निस्तारण करना आदि भी इसमें निहित है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक घर में शौचालय का होना जरूरी है साथ ही उसका प्रयोग करना भी अपेक्षित है । इसके लिए सरकार की ओर से मौद्रिक मदद भी की जाती है देश को स्वच्छ और साफ सुथरा बनाना इस योजना का उद्देश्य है, जिसके फलस्वरूप खुले शौच पर रोक लगेगी और गंदगी का को मिटाना सरल होगा। कचरेदानों का निर्माण करके शहरी स्वच्छता को गतिमान करना भी इसका उद्देश्य है।

08- ओ डी एफ++ प्रोटोकॉल यह सब को भी जोड़ता है कि मानव अपविष्ट जैसे गाद ,सेप्टेज और सीवेज सुरक्षित रूप से प्रतिबंधित हो। उनका सुसंगत उपचार किया जाए। नालियों, जल निकासियों और खुले क्षेत्रों में अनुपचारिक मानव अपविष्ट का नालियों से बाहर निकास ना हो और शहर में गंदगी न फैले। लोगों को असुविधा ना हो और अनेक बीमारियों का गंदगी के कारण निवारण हो सके।

09- अपराध – स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत यह भी प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति दिन के समय सार्वजनिक क्षेत्रों शहर के अंदर या बाहर खुले में शौच करता है या यूरिनल (प्रसाधन/ मूत्रालय )का प्रयोग न करके खुले में मूत्र विसर्जन करता है तो उस पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है
इसी परिप्रेक्ष्य में सर्वप्रथम जयपुर कोर्ट ने महानगर 23 की अदालत में 12 बार सुनवाई करने के पश्चात एक व्यक्ति को सरकारी परिसर की चारदीवारी के निकट मूत्र विसर्जन करने पर ₹5000 जुर्माना लगाया जो भी एक नजीर है।

अतः इस प्रकार की हरकतों से प्रत्येक को बाज आना चाहिए और अनावश्यक जुर्माना या दंड भुगतने यहां तक कि जेल जाने से अच्छा तो स्वच्छता के प्रति संवेदनशील रहना है।
10- पुरस्कार और दंड :- पुरस्कार प्राप्त करना या दंड भुगतना लगभग समान प्रवृतियां है। अच्छे कार्य करने वालों को पुरस्कार मिलता है और बुरे कार्य करने वालों को दंड भुगतना पड़ता है ।
कोरोना महामारी (कोविड-19) के इस बुरे दौर में प्रत्येक व्यक्ति से यही अपेक्षा की जाती है कि जीवन के प्रति सभी लोग संजीदगी से पेश आएं। स्वच्छता के प्रति जवाब देह रहें। जागरूकता फैलाएं। न स्वयं गंदगी करे न दूसरों को करने दें। यदि कोई व्यक्ति ,संस्था या प्रतिष्ठान गंदगी फैलाता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाए या दंडात्मक कार्यवाही की जाए। हजारों और लाखों लोगों के जीवन को बचाने के लिए चंद व्यक्ति या समूह के लाभ को नहीं देखा जाना चाहिए। हां ! आवश्यकता इस बात की भी है अनजाने मैं किसी व्यक्ति के द्वारा कोई गलती हो जाए तो उसे हिदायत देकर ,डांट फटकार कर या समझा-बुझाकर सही मार्ग पर भी लाया जा सकता है।
11- सार संक्षेप के रूप में – देवभूमि उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित चंबा शहर वह उभरता हुआ शहर है । एक छोटे से स्थल से नगर पंचायत और आज नगर पालिका परिषद का दर्जा इसे हासिल है । कई मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। जिसके कुछ भौतिक कारण हैं। कुछ भौगोलिक कारण हैं और कुछ देश काल और परिस्थिति के अनुसार भी हैं ।
12- सीवरेज लाइन सर्वेक्षण भी एक प्राथमिकता – चंबा शहर का घनत्व दिन- प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। और आने वाले समय में जलापूर्ति, कूड़ा निस्तारण , आवागमन आदि अनेक असुविधाओं से लोगों को रू ब रू होना पड़ेगा । अभी तक शहर में सीवरेज की कोई व्यवस्था नहीं है । मकानों से सटे हुई है और दीवारों के ऊपर शौचालय के गड्ढे बने हुए हैं ,जो कि कभी भी क्षतिग्रस्त होने के कारण एक बड़ी समस्या बन सकते हैं ।
13- योग्य और अनुभवी ए ओ – वर्तमान में चंबा नगर पालिका परिषद में बहुत ही सुयोग्य, कार्य कुशल, अनुभवी और जागरूक अधिशासी अधिकारी के रूप में श्री एसपी जोशी कार्यरत हैं । शहर का प्रत्येक व्यक्ति उनकी कार्य शैली से परिचित है ।अपने कार्यकाल में श्री जोशी जी से अपेक्षा की जाती है, कि शहर में सीवरेज जैसी समस्या का सर्वेक्षण आदि कार्य करवा कर, एक बहुत बड़ी सुविधा शहर को देंगे । उनसे केवल अपेक्षा ही नहीं बल्कि विश्वास भी है कि वह जिस कार्य को करते हैं ,पूर्ण मनोयोग के रूप में करते हैं। यद्यपि योगदान नए पुराने सभी लोगों का रहता है लेकिन चंबा शहर को यदि ओडीएफ प्लस प्लस का दर्जा हासिल करने श्री एसपी जोशी की कर्मठता है, कोई अतिशयोक्ति नहीं है। सम्मानित समस्त सभासद एवम अध्यक्ष श्रीमति सुमन रमोला जी को अपने कार्यकाल मे यह श्रेय मिले, कामना करता हूं।
@ कवि : सोमवारी लाल सकलानी, निशांत।
(स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर)
नगर पालिका परिषद चंबा, टिहरी गढ़वाल।

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