पद्मश्री बहुगुणा के अवसान पर प्रसून सुत अनुराग की फेसबुक टिप्पणी

सरहद का साक्षी,

नागनी, टिहरी: विश्व विख्यात पर्यावरणविद श्री सुंदर लाल बहुगुणा जी ( दादा जी) आज इस दुनिया को छोड़कर चले गए, लेकिन उनके विचार और समाज को दिए योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

विश्व विख्यात पर्यावरणविद श्री सुंदर लाल बहुगुणा जी ( दादा जी) आज इस दुनिया को छोड़कर चले गए, लेकिन उनके विचार और समाज को दिए योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

बहुगुणा जी का टिहरी रियासत को भारत में विलय कराने में श्रीदेव सुमन जी के साथ अहम योगदान रहा, ठक्कर बापा से मिलकर उन्होंने दलित उत्थान के लिए भी अहम योगदान दिया, जैसे मंदिरों में दलितों के प्रवेश के लिए कार्य, उतराखंड में शराब बंदी के लिए भूख हड़ताल की, सरकार द्वारा वनों की कटाई को रोकने के लिए विश्व विख्यात चिपको आंदोलन चलाया, बड़े बांधों के खतरों को देखते हुए, टिहरी बांध के खिलाफ भी बहुत लंबी भूख हड़ताल की, और भी तमाम सामाजिक काम इस युग पुरुष ने अपने जीवन काल में किये।

आदरणीय बहुगुणा जी की इन सामाजिक कार्यों के लिए कार्यकर्ताओं की पूरी टीम थी, जिसमें हेंवलघाटी के कार्यकर्ताओं का अहम योगदान रहा, जिनमें स्व. श्री प्रताप शिखर जी, श्री धूम सिंह नेगी जी, श्री विजय जड़धारी जी, मेरे पिताजी स्व. श्री कुंवर प्रसून जी और श्रीमती सुदेशा देवी जी थे, इसके अलावा स्व. श्री घनश्याम शैलानी और साहब सिंह सज्वाण, दयाल सिंह भण्डारी और भी कार्यकर्ता इनकी टीम में थे।

मेरे पिताजी स्व. श्री कुंवर प्रसून और श्री धूम सिंह नेगी ने तो शिक्षक के पद से त्याग पत्र दे दिया था और बहुगुणा जी के साथ आंदोलन में चले गए। बहुगुणा जी के विचार ही थे, जिस कारण उनकी टीम के सभी कार्यकर्ता, अपने घर परिवार की परवाह किये बिना महीनों तक घर से बाहर आंदोलन में रहते थे।

अनुरोध:

बहुगुणा जी, अगर स्वर्ग में मेरे पिता जी, श्री शिखर जी और श्री शैलानी जी मिलें तो उनका हाल पूछ लेना, वहाँ भी उन्हें अपने साथ में रखना ।

😭😭😭 विनम्र श्रद्धांजलि

Print Friendly, PDF & Email
Share