अहसास 10 मिनट: जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन

समझें कि कितना प्राचीन है हमारा ये हिन्दूधर्म? शाश्वत सनातन धर्म विषयक विज्ञ होकर भी धर्मान्तरण कितना उचित?

प्रस्तुति: हर्षमणि बहुगुणा,

जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन ।
” *एक गृहिणी के साथ 10 मिनट बैठें – आप महसूस करेंगे कि जीवन बहुत कठिन है* ।
*एक शराबी के साथ 10 मिनट के लिए बैठो – आप महसूस करेंगे कि जीवन बहुत आसान है।*
*साधु-संन्यासियों के साथ 10 मिनट बैठें – आप ऐसा महसूस करेंगे कि दान में सब कुछ मिल जाएगा।*
*एक नेता के सामने 10 मिनट बैठें – आपको लगेगा कि आपकी सारी पढ़ाई बेकार है।*
*जीवन बीमा एजेंट के साथ 10 मिनट बैठें – आप महसूस करेंगे कि मर जाना बेहतर है*।
*व्यापारियों के साथ 10 मिनट बैठें – आपको लगेगा कि आपकी कमाई बहुत कम है।*
*वैज्ञानिकों के साथ 10 मिनट के लिए बैठें – आप अपने स्वयं के अज्ञान की भारीता महसूस करेंगे।*
*अच्छे शिक्षकों के साथ 10 मिनट बैठें – आप फिर से एक छात्र बनने की इच्छा करेंगे।*
*एक किसान या कार्यकर्ता के सामने 10 मिनट बैठें – आपको लगेगा कि आप बहुत मेहनत नहीं कर रहे हैं।*
*एक सैनिक के साथ 10 मिनट के लिए बैठो – आप महसूस करेंगे कि आपकी अपनी सेवाएं और बलिदान महत्वहीन हैं।*
*एक अच्छे दोस्त* *के *साथ* *10 मिनट बैठें*- *आपको लगेगा कि आपका जीवन स्वर्ग हैं* ।

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