बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा ने संचार प्रौद्योगिकी और बच्चे विषय पर करवाया ऑनलाइन व्याख्यान

बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा ने संचार प्रौद्योगिकी और बच्चे विषय पर करवाया ऑनलाइन व्याख्यान

अल्मोड़ा। बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा आयोजित ऑनलाइन 100 वीं कार्यशाला में ‘संचार प्रौद्योगिकी और बच्चे’ विषय पर बोलते हुए मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व रीडर तथा वरिष्ठ बालसाहित्यकार डॉ.शकुंतला कालरा ने कहा कि संचार प्रौद्योगिकी के वर्तमान दौर में बच्चे समय से बड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब मोबाइल को बच्चों से दूर रखा जाता था। परंतु कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के बहाने हम सबने बच्चों को मोबाइल थमाया है। बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ये जरूरी भी था। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बच्चों ने मोबाइल के साथ ही टेलीविजन तथा संचार के दूसरे साधनों के माध्यम से काफी कुछ सीखा।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में मोबाइल बच्चों का दोस्त बनकर भी उभरा है। ये सुखद पक्ष है परंतु इसका दूसरा पक्ष यह है कि बच्चे अपने पाठ्यक्रम से बाहर भी काफी कुछ सामग्री देख रहे हैं। इस पर चिंतन मनन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के वर्तमान काल में हम चांद पर पहुंच गए हैं। मोबाइल से हम देश व दुनिया से जुड़ रहे हैं परंतु हम मोबाइल के इतने आदी हो गए हैं कि हम अपने घर परिवार से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संचार प्रौद्योगिकी के वर्तमान दौर की ये भी उपलब्धि है कि हम ई बुक तथा ई पत्रिका से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ई बुक के वर्तमान दौर में भी प्रिंट पुस्तकों का अपना महत्व है। उन्होंने पुस्तकों की उपयोगिता पर भी अपनी बात रखी।

अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत करते हुए सलिला संस्था सलूंबर की अध्यक्ष डॉ. विमला भंडारी ने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र के लिए बच्चों को सही दिशा दिया जाना जरूरी है। इसके लिए बच्चों तक अच्छा बालसाहित्य पहुंचाना हम सबके लिए एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए बालसाहित्य की रचना करनी होगी। बालप्रहरी की ऑलनाईन कार्यशालाओं पर उन्होंने कहा कि वे बालप्रहरी की कई कार्यशालाओं में शामिल हुई हैं। बच्चों को साहित्य लेखन के साथ ही उन्हें पठन-पाठन की संस्कृति से जोड़ने का सार्थक प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि 21 वीं शताब्दी ऑनलाइन क्लास की है।

साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य डॉ. प्रत्यूष गुलेरी (धर्मशाला, हि.प्र.) ने कहा कि बालप्रहरी की ऑनलाइन कार्यशला में बच्चों को साहित्यकारों तथा उनकी रचनाओं से जोड़ा जा रहा है। बच्चे लिखने से पहले दूसरे साहित्यकारों की रचनाओं को पढ़ रहे हैं,साहित्यकारों को जान रहे हैं। ये सुखद पक्ष है।

कार्यक्रम में आशिमा शर्मा द्वारा डॉ. राष्ट्रबंधु की कविता वाचन करने पर उन्होंने कहा कि डॉ. राष्ट्रबंधु जी का बालसाहित्य में महत्वपूर्ण कार्य रहा है। इस अवसर पर डॉ. राष्ट्रबंधु जी को याद किया जाना भी बहुत सार्थक रहा है।
वरिष्ठ बालसाहित्यकार श्री भगवतीप्रसाद द्विवेदी जी (पटना,बिहार) ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के वर्तमान दौर में बच्चे संचार संसाधनों से जुड़ रहे हैं। बच्चे काफी कुछ सीख रहे हैं परंतु मोबाइल के दुष्परिणामों पर भी हमें चिंतन मनन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़कर एक समालोचक के रूप में तैयार हो रहे हैं।

महादेवी कौशिक बालसाहित्य संस्थान सिरसा,हरियाणा की अध्यक्ष डॉ. शील कौशिक ने कहा कि बालप्रहरी की ऑनलाइन कार्यशाला में लोकगीत तथा आंचलिक भाषा की पहेलियां वाचन आदि गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। उन्होने इसे बच्चों को संस्कृति से जोड़े जाने का सार्थक प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृति के विना बच्चों को संस्कार दिए जाने की कल्पना नही की जा सकती है। उनके अनुसार आज के वैश्विक दौर में बच्चे अपनी मात्भाषा व लोक साहित्य से दूर हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें लोकगीत , पहेलियों आदि से जोड़ा जाना समय की मांग है।

आयोजक मंडल की ओर से सभी का स्वागत करते हुए उत्तराखंड शिक्षा विभाग के उप शिक्षा निदेशक आकाश सारस्वत ने कहा कि त्वरित भाषण गतिविधि में भाग लेने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। हम बड़े लोग भी तुरंत दिए विषय पर बोलने में हिचकिचाते हैं। ऐसे में त्वरित भाषण गतिविधि बच्चों को किसी भी विषय पर बोलने के लिए उनके मन में आत्मविश्वास भरने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एक बार कोरोना ने दोबारा अपने पैर पसारे हैं। हमें इसके लिए अपने-अपने स्तर से जागरूक होने की जरूरत है।

कार्यक्रम के अंत में आयोजक मंडल की ओर से सभी का आभार व्यक्त करते हुए बालप्रहरी के संरक्षक साहित्यकार श्यामपलट पांडेय ने कहा कि बालप्रहरी की ऑनलाइन गतिविधियों में बच्चे भाग लेने के लिए उत्सुक रहते हैं। स्कूल खुल जाने के बाद वे ऑनलाइन गतिविधियों के लिए समय निकाल रहे है। कहीं न कहीं वे रचनात्मक कार्यो के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उन्हे अभिव्यक्ति तथा अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अरूणा साह(नैनीताल) ने मांगल गीत, आरना गौरव(बलरामपुर,उ.प्र.) ने स्वरचित कविता, अधिश्री सिंह(राजनादगांव,छत्तीसगढ़) ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत, उत्कर्ष धपोला(बागेश्वर) ने त्वरित भाषण तथा आशिमा शर्मा(जम्मू) ने डॉ. राष्ट्रबंधु की कविता ‘मामा जी’ प्रस्तुत की। समूचे कार्यक्रम का संचालन प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल आगरा(उ.प्र.) की कक्षा 7 की छात्रा अर्जरागिनी सारस्वत ने किया।

प्रारंभ में कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए बालप्रहरी के संपादक तथा बालसाहित्य संस्थान के सचिव उदय किरौला ने कहा कि कोरोना काल में संपन्न 99 गतिविधियों में सबसे अधिक 22 बार बच्चों को प्रतिष्ठित कहानीकारों ने कहानियां सुनाई। 18 बाल कवि सम्मेलन, 13 त्वरित भाषण, 6 लोकगीत कार्यक्रम व 5 विषयों पर अलग-अलग परिचर्चा, पत्र लेखन, पहेली व चुटकुले वाचन, लेखक से मिलिए जैसी गतिविधियां आयोजित की गई।

उन्होंने कहा कि बालप्रहरी से 471 बच्चे जुडे़ हैं जिसमें से वर्तमान में लगभग 140 बच्चे सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के माध्यम से बाल कविता को प्रोत्साहित करने का प्रयास भी मित्रों के सहयोग से किया जा रहा है। समूचे कार्यक्रमों को संपन्न कराने के लिए उन्होंने साहित्यकारों, अभिभावकों तथा नन्हे दोस्तों का आभार व्यक्त किया।

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