नकोट के निकट कोठीखाला की चारापत्ती भूमि भी चढ़ी वनाग्नि भेंट

नकोटः मखलोगी पट्टी क्षेत्रान्तर्गत जहां आस-पास के चारापत्ती वाले खेत व जंगल तो पहले ही आग से जलकर खाक हो गए थे, मगर जो कुछ बचा खुचा क्षेत्र था, वह आज पुनः जलकर राख हो गया है।

नकोट के निकट कोठीखाला की चारापत्ती भूमि भी चढ़ी वनाग्नि भेंट

यूं तो आज इस पूरे क्षेत्र के चारों तरफ गजा से लेकर रानीचौरी के बीच जंगल धू-धू कर जल रहे हैं, मगर कोठीखाला के निकट का यह इलाका भी वनाग्नि से अछूता नहीं रह सका। दोपहर बाद चित्रों मंे दिखाया जा रहा यह क्षेत्र भी वनाग्नि की भेंट चढ़ चुका है।

मखलोगी क्षेत्र में इस सीजन की फसल जहां पहले ही ग्रामीण कास्तकार बारीस न होने के कारण अपने पालतू मवेशियों को उखाड़ कर खिला चुके थे, वहीं अब क्षेत्र में वनाग्नि के कारण सभी चारा-पत्ती व सूखा घास जलकर राख हो चुका है। जिस कारण ग्रामीणों के सामने चारापत्ती का संकट पैदा हो गया है।

मखलोगी पट्टी क्षेत्रान्तर्गत जहां आस-पास के चारापत्ती वाले खेत व जंगल तो पहले ही आग से जलकर खाक हो गए थे, मगर जो कुछ बचा खुचा क्षेत्र था, वह आज पुनः जलकर राख हो गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्षा न होने के कारण जहां यह समूचा क्षेत्र सूखे की चपेट में आ गया था और क्षेत्र की समूची फसलें नष्ट हो गई थीं, वहीं अब चारापत्ती का संकट भी ग्रामीणों को सताने लगा है। आमजन का कहना है कि यदि चारापत्ती की व्यवस्था नहीं हो पाती है तो ग्रामीणों को अपने पालतू मवेशियों में प्राण रखने के लिए उन्हें कहीं अन्यत्र छोड़ना पड़ेगा।

गजा से लेकर रानीचौरी के बीच जंगल धू-धू कर जल रहे हैं

शासन-प्रशासन स्तर पर भी ग्रामीणों के पालतू मवेशियों के लिए चारापत्ती की कोई व्यवस्था की जा रही अभी तक प्रतीत नहीं होती। जहां तक सूखा घास पुरेल्डे संग्रहण की बात है, तो इस बार बारीस न होने के कारण घास ठीक से उग नहीं पायी और ग्रामीण घास एकत्र नहीं कर पाये। कई ग्रामीण ऐसे भी जिनके पास वर्तमान में भी अपने पालतू मवेशियों को खिलाने के लिए सूखी घास तक नहीं है और वे गांव-गांव पुरेल्डे याने सूखी चारा घास खरीदने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

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