अप्रैल फूल” किसी को कहने से पहले इसकी वास्तविक / सत्यता जरुर जान लें .!!

सोशल मीडिया के माध्यम से प्कुराय: कुछ न कुछ लिखने का प्रयास करता रहता हूं। केवल सुप्रभात या शुभ रात्रि या कोई चित्र भेजकर या किसी दूसरे द्वारा भेजा गया सन्देश अग्रसारित न कर कुछ न कुछ नया अपने मन से या कहीं से सादर, साभार लेकर/ लिखकर जानकारी पहुंचाने का एक लघु प्रयास कर रहा हूं । यह देखने के लिए कि सन्देश को कितने लोग पढ़ते हैं या पसंद करते हैं , उपकार फिल्म का गीत भेजा था । मेरी अवधारणा के अनुसार मात्र सात- आठ लोगों ने उसे पढ़ा, हो सकता है और अधिक लोगों ने पढ़ा हो ! व्यर्थ के चिन्तन से कुछ ज्ञान चर्चा श्रेयस्कर हो सकती है। उक्त फिल्म के विषयक यह जानकारी है । जिसने पढ़ा उन्होंने मेरा प्रयास सार्थक किया । अतः उन सबके लिए साधुवाद!

प्रस्तुति: हर्षमणि बहुगुणा,
आज से प्राय: नव वर्ष का प्रारम्भ माना जाता है , नया वित्त वर्ष प्रारम्भ हो रहा है। नया शिक्षा सत्र, हर व्यक्ति के अन्दर नयी उमंग, नव ऊर्जा का संचार सब नूतन नव – नव । अतः नूतनता का हार्दिक अभिनन्दन एवं स्वागत ।

पर शायद कुछ शरारती व्यक्तियों की देन का हम अनुकरण करते हैं! ? समझें पहली अप्रैल को ?

अप्रैल फूल” किसी को कहने से पहले इसकी वास्तविक / सत्यता जरुर जान लें .!!

पावन महीने की शुरुआत को मूर्खता दिवस कह रहे हो !!
*पता भी है क्यों कहते हैं , अप्रैल फूल (अप्रैल फुल का अर्थ है – हिन्दुओं की मूर्खता का दिवस).?
*ये नाम अंग्रेज ईसाईयों की देन है…–
*मूर्ख हिन्दू कैसे समझें “अप्रैल फूल” का मतलब बड़े दिनों से बिना सोचे समझे चल रहा है अप्रैल फूल,*
*अप्रैल फूल ??? इसका मतलब क्या है.? दरअसल जब ईसाइयत अंग्रेजों द्वारा हमें 1 जनवरी का नववर्ष

थोपा गया तो उस समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार 1अप्रैल से अपना नया साल मनाते थे, जो आज भी सच्चे हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है, आज भी हमारे बही खाते और बैंक 31 मार्च को बंद होते है और 1 अप्रैल से शुरू होते है नये बही – खाते पर उस समय जब भारत गुलाम था तो ईसाइयत ने विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते हुए एक अप्रैल को मूर्खता दिवस “अप्रैल फूल” का नाम दे दिया ताकि हमारी सभ्यता मूर्खता लगे अब आप ही सोचो अप्रैल फूल कहने वाले कितने सही हैं? यादरखो-

अप्रैल माह से जुड़े हुए ऐतिहासिक दिन और त्यौहार –
1. *हिन्दुओं का पावन महिना इस दिन से शुरू होता है (शुक्ल प्रतिपदा)* *चान्द्र मास के आगे पीछे होने से प्रतिपदा आगे पीछे हो जाती है* ।
2. *हिन्दुओ के रीति -रिवाज़ सब इस दिन के कलेण्डर के अनुसार बनाये जाते हैं।*
3. *आज का दिन दुनिया को दिशा देने वाला है। अंग्रेज ईसाई, हिन्दुओं के विरुद्ध थे इसलिए हिन्दूओं के त्यौहारों को मूर्खता का दिन कहते थे और आप हिन्दू भी बहुत शान से कह रहे हो.!! गुलाम मानसिकता का सुबूत ना दो अप्रैल फूल लिख के.!! अप्रैल फूल सिर्फ भारतीय सनातन कलेण्डर, जिसको पूरा विश्व फॉलो करता था उसको भुलाने और मजाक उड़ाने के लिए बनाया गया था। 1582 में पोप ग्रेगोरी ने नया कलेण्डर अपनाने का फरमान जारी कर दिया जिसमें 1 जनवरी को नया साल का प्रथम दिन बनाया गया ।

जिन लोगों ने इसको मानने से इंकार किया, उनका एक अप्रैल को मजाक उड़ाना शुरू कर दिया और धीरे- धीरे एक अप्रैल नया साल का नया दिन होने के बजाय मूर्ख दिवस बन गया।आज भारत के सभी लोग अपनी ही संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए अप्रैल फूल डे मना रहे है।*

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