हिमालय भारतीय उपमहाद्वीप के जीवन का आधार है: सुंदरियाल

चमोली। हिमालय भारतीय उपमहाद्वीप के जीवन का आधार है। यहां से निकलने वाली नदियां देश के करोड़ों लोगों के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह बात विख्यात वनस्पति विज्ञानी प्रोफेसर आर सी सुंदरियाल ने चमोली में सर्व आलम सिंह बिष्ट पर्यावरण ब्याख्यान देते हुए कही।

हिमालय भारतीय उपमहाद्वीप के जीवन का आधार है: सुंदरियाल

चिपको आंदोलन के प्रमुख नेताओं में एक स्व आलम सिंह बिष्ट की स्मृति में हर साल पर्यावरण ब्याख्यान का आयोजन किया जाता है। इस बार वरिष्ठ विज्ञानी आर सी सुंदरियाल ने हिमालय और पर्यावरण पर सरल शब्दों में अपनी बात रखी।


चमोली के अलकापुरी के सभागार में अपनी बात रखते हुए प्रौफेसर सुंदरयाल ने कहा कहा कि हिमालय जैव विविधता का खजाना है। अभी भी इस दिशा में कार्य किए जाने की जरूरत है। यहां पारी जाने वाली वनस्पतियों के बारे में और अधिक शोध की जरूरत है।
इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्षमित्र पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित रा ई कालेज अल्कापुरी में ब्याख्यान से पूर्व प्रौफेसर सुंदरियाल को सम्मानित किया गया।


प्रौफे सुंदरियाल ने छात्र- छात्राओं को वन पर्यावरण एवं हिमालय के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि जल एवं जंगल हमारे जीवन के महत्वपूर्ण आधार है। वन जहाँ प्राण वायु के स्रोत है वही वातावरण से कार्बन के अवशोसक भी है।ये हमारी जल सहित लगभग अन्य सभी जरूरतों को पूरा करते है।

हिमालय हमारी सदानीरा नदियों के उद्गम स्रोत होने के साथ ही सदाबहार वनों का घर भी है। वन एवं जल के प्रति यदि हमें अभी से संवेदनशील होना ही होगा। यदि अभी हमने इनके प्रति संवेदंशीलता नही हुए तो भविष्य में हमें व आने वाली पीढ़ी को शुद्ध जल एवं वायु समस्याओं से दो चार होना पड़ेगा।इसी क्रम में उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि मेहनत से नही घबराने व ऊँचे ख्वाब देखने से से ही सपने साकार होते हैं।

गोष्ठी में कार्यक्रम के आयोजक सी पी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र के प्रबंध न्यासी ओम प्रकाश भट्ट ने कार्यक्रम में विकास केंद्र द्वारा संचालित गतिविधियों की जानकारी देने के साथ ही बताया की केंद्र प्रतिवर्ष व्याख्यान कार्यक्रमों के माध्यम से जहाँ एक ओर क्षेत्रीय स्तर पर वैश्विक छाप छोड़ने वाले सामाजिक सरकारों से जुड़े हमारे इन समाजसेवी पुरोधाओं को हमारी नयी वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराने का प्रयास है वही दूसरी उनमे पर्यावरणीय संचेतना विकसित करना तथा उन्हें अपने जल एवं जंगल के प्रति संवेदनशील बनाना है।

इस दौरान कार्यक्रम में डॉ अरविंद भट्ट ने छात्रों को आलम सिंह बिष्ट के जीवन परिचय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा सामाजिक क्षेत्र में किये गए उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी दी।

इसके अतिरिक्त ब्याख्यान गोष्ठी में गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए चिपको आंदोलनकारी तथा सर्वोदयी नेता मुरारी लाल द्वारा चिपको आंदोलन के दौरान के अपने संस्मरणो से अवगत कराया।
इससे पूर्व कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत मुख्य अथिति द्वारा दीप प्रज्वलन तथा विद्यालय की छात्राओं द्वारा स्वागतगान से हुई।कार्यक्रम में संस्थान द्वारा मुख्य अथिति को कलश , प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र भी भेंट किया गया।

विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम मे विद्यालय के प्रधानाचार्य, जड़ी बूटी शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ सी पी कुनियाल,महाविद्यालय के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ शिव चंद सिंह रावत, मंगला कोठियाल,हरिश्चंद्र डिमरी,मदन सिंह नेगी, हरिश्चंद् पंत, आलम चंद ,श्रीमती दीपा बिष्ट ,बीएन खाली, देशराज सिंह नेगी ,सच्चिदानंद सती माधव सिंह नेगी श्रीमती बीना भंडारी मनोरमा डिमरी सरिता वशिष्ठ अरविंद जगदीश राम सैलानी हीरालाल आर्य महिपाल अस्वाल सुरेंद्र सिंह रावत आदि शिक्षक एवं एनसीसी के कैडेट्स व समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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