जाना था छाती गांव की शिवपुराण कथा में परन्तु पहुंच गया ओणेश्वर महादेव

रिपोर्ट: हर्षमणि बहुगुणा,
*यो धत्ते भुवनानि सप्त गुणवान् स्रष्टा रज: संश्रय: , संहर्ता तमसान्वितो गुणवतीं मायामतीत्य स्थित: ।*

*सत्यानन्दमनन्तबोध ममलं ब्रह्मादिसंज्ञास्पदं , नित्यं सत्वसमन्वयादधिगतं पूर्णं शिवं धीमहि ।।*

*उत्तराखंड की देवभूमि में भगवान आशुतोष का निवास सर्वत्र समग्र रूप से है । जहां भगवान शिव ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग के रूप में सब जनों पर कृपा दृष्टि बनाये रखते हैं , वहीं प्रत्येक उपत्यका में अपने भक्तों का उद्धार करने की कामना से शिवलिंग के रूप में स्वयंभू बन कर प्रकट हुए हैं ।

शिवरात्रि के महापर्व पर टिहरी जनपद के प्रतापनगर क्षेत्र में ओणेश्वर महादेव के दर्शन का सौभाग्य मिला , नाम सुना था महिमा भी जानता था ,पर स्थान अपरिचित था ।

लम्बगांव से प्रतापनगर मार्ग पर मात्र सात किलोमीटर दूर देवल गांव में भगवान ओणेश्वर महादेव का जो भव्य मंदिर बना है को देख कर देखता ही रह गया और विचार के लिए बिवस हुआ कि इस गांव के सम्मानित व्यक्तियों ने इतनी अधिक जगह उपलब्ध करवा कर कितना पुण्य अर्जित किया होगा ? । कहीं तो मन्दिर बनने ही नहीं देते हैं , और कहीं —-? सेवा टी यच डी सी ने बहुत सुंदर बड़ा टीन शेड बना कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

मन्दिर की भव्यता अलौकिक है , भीड़/ जनसैलाब उमड़ने से भगवान आशुतोष के शिवलिंग पर जलाभिषेक करना अत्यधिक दुर्लभ , जलाभिषेक हुआ ही नहीं ! पर किसी भी दर्शनार्थी की कुछ भी शिकायत नहीं ! लम्बी लम्बी कतार में खड़े होकर केवल मत्था टेकने के लिए प्रार्थना करते हुए भक्त, गर्भ गृह में प्रवेश वर्जित। प्राचीन तोंण के वृक्ष में प्रभू जिन पर अवतरित हुए हैं उनके दर्शनों हेतु अपार जनसमूह । क्या लीला है लीलाधारी की ?

संयोग से मुझे जाना था मखलोगी पट्टी के छाती गांव की शिवपुराण कथा में परन्तु पहुंच गया ओणेश्वर महादेव के श्रीचरणों में और पुजारी श्री सेमवाल जी के सहयोग से अर्चना हेतु बाहर बरामदे में स्थान भी मिल गया ।

सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों ने भी कोई रोक- टोक नहीं की, यह सब उसी भोले बाबा की कृपा ही तो थी । वर्ष में केवल दो दिन का मेला शिवरात्रि पर ही लगता है , शेष दिनों यदा -कदा ही धर्मप्राण जनता मन्दिर में जाती होगी ? प्रशासन की सुव्यवस्था , जिला पंचायत अध्यक्ष सहित विकास खण्ड प्रमुख श्री रमोला जी व पूर्व विधायक श्री विक्रम सिंह नेगी जी के अतिरिक्त प्रतापनगर क्षेत्र के संभ्रांत प्रतिनिधि व जन मानसों से ओणेश्वर महादेव का परिसर प्रफूल्लित था । सीखने के लिए बहुत कुछ था इस प्रांगण में ! पर यह जन भगवान भूतनाथ से यही प्रार्थना करता रहा कि इस तरह का वातावरण यदि हर क्षेत्र में सृजित हो तो यह देवभूमि वास्तव में स्वर्ग से भी बढ़कर हो सकती है । कुछ फोटो दर्शनार्थ प्रस्तुत हैं ।

प्रार्थना है कि एक बार भगवान ओणेश्वर महादेव का मन ही मन जयकारा अवश्य लगाइए व अपने क्षेत्र की खुशहाली की कामना कीजिए । ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ।

 

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