देव भूमि हिमालय योग व अध्यात्म की उदगम स्थली है: सुबोध

मुनिकीरेती (ऋषिकेश)। देव भूमि हिमालय योग व अध्यात्म की उदगम स्थली है। योग सकारात्मक सोच का निर्माण करता है , विश्व शांति केेे लिए भी कारगर साबित हो सकता है। उक्त विचार अन्तर्राश्ट्रीय योग महोत्सव के प्रथम दिवस उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने व्यक्त किये ।

उन्होनें कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड़ से योग का संदेश समूचे विश्व में प्रसारित हुआ है। योग व्यक्ति को व्यक्ति से जोडता है योग में अभिरूचि रखने वाले योग साधकों के लिये गंगा तट से योग की गंगा प्रवाहित हो रही है। उन्होने कहा कि आयोजक संस्था गढ़वाल मण्डल विकास निगम व उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग आम लोगों को योग से जोडने में अहम भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये गढ़वाल मण्डल विकास निगम के अध्यक्ष श्री महाबीर सिंह रागड ने कहा कि योग महोत्सव का आयोजन वर्श 1991 से गढ़वाल मण्डल विकास निगम व पर्यटन विभाग के सौजन्य से निरन्तर किया जा रहा है योग के इस तरह के आयोजनों से पूरी दुनिया में भारत का नाम रोषन हुआ है योग षरीर व मन मस्तिश्क को स्वस्थ रखता है और स्वस्थ व्यक्ति ही मानव कल्याण की चिंता कर सकता है।

उन्होने गढ़वाल मण्डल विकास निगम को बेहतर आयोजन के लिये बधाई देते हुये कार्यक्रम की सफलता की षुभकामनायें दी।
इस अवसर पर पंतजलि योग पीठ के आचार्य बाल कृश्ण ने अपने सम्बोधन में कहा कि कोरोना ने बता दिया कि योग का क्या महत्व है। योग मन और षरीर के विकारों को दूर करता है यही कारण है कि योग करने वालो पर कोरोना का प्रभाव न्यूनतम रहा अगर ब्याधियों से बचना है तो योग को अपने जीवन में आत्मसात करना होगा। उन्होने कहा कि योग कोई प्रवचन या कथा का विशय नहीं है दुनिया में सब कुछ छूट जाय पर हमारी जीवनचर्या से योग कभी छूटना नहीं चाहिये। आरोग्य ठीक रहेगा तो सब ठीक रहेगा जो कि योग से ही सम्भव है। आचार्य बाल कृश्ण ने कहा कि योग की इस धरती से पूरी दुनिया में सदेष्ंा जाना चाहिये कि स्वस्थ जीवन पद्वति के लिये योग कितना जरूरी है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिशद के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र गिरी जी महाराज ने कहा कि प्राचीन काल में ऋशि-महर्शि योग को भगवान प्राप्ति का साधन समझते थे जिसे बाबा राम देव ने जन जन तक पहुंचाकर लोकप्रिय बना दिया। इस मौके पर योगी सिदार्थ ने कहा की योग की गंगा जोड़ने का काम करती है। भारत की इस प्राचीन योग विधा को बी0के0एस0 आयंगर ने पूरे विष्व में फैलाया। उन्होने कहा कि योग युवा, बृद्ध, अतिबृद्ध व रोग ग्रस्त दुर्बल व्यक्ति के लिये जरूरी है योग से सारे रोगों का विनाष होता है।

नगर पालिका परिशद के अध्यक्ष श्री रोषन रतूडी ने कहा कि माँ गंगा की कृपा से मुनिकीरेती ऋशिकेष में करोना से किसी की भी मृत्यु नहंी हुयी उन्होनें मुनिकीरेती को अध्यात्म व योग का केन्द्र बताया।
गढ़वाल मण्डल विकास निगम के उपाध्यक्ष श्री कृश्ण कुमार सिंघल ने उद्घाटन समारोह में उपस्थित अतिथियों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि आज योग के कारण उत्तराखण्ड की देष व दुनिया में एक नई पहचान बनी है। इससे पूर्व प्रातकाल गंगाघाट पर हवन किया गया और योगासत्र में योगिनी उशा माता ने योग साधकों को योग क्रियाओं का अभ्यास करवाया जबकि सांयकालीन कार्यक्रमों में मेन हेगंर में ग्रेंड मास्टर अक्षर ने योग प्रणायाम के गुर सिखाये और सास्कृतिक कार्यक्रमों की षानदार प्रस्तुति हुयी।

महाप्रबन्धक (प0) जितेन्द्र कुमार) नेे बताया कि योग महोत्सव के पहले दिन लगभग 450 पंजीकरण हुये हैं कार्यक्रम में निगम के प्रबन्ध निदेषक डॉ0 आषीश चौहान, महाप्रबन्धक (पर्यटन) श्री जितेन्द्र कुमार, महाप्रबन्धक (प्रषासन) श्री अवधेष कुमार, महाप्रबन्धक (वित्त) श्री अभिशेक आनन्द एवं अपर निदेषक पर्यटन श्री विवेक चौहान आदि अधिकारी मौजूद रहे।

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