March 7, 2021 - सरहद का साक्षी
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गौं ह्वेगीन परदेश

  डा. दलीपसिंह बिष्ट घर छोड़ी, घरवार छोड़ी अब त गौं भी छोड्याली। शहरू मां रैक अब त गौं परदेश ह्वे ग्याई।। धारा छोड़ी, पनेरा छोड़ीन पहाड़ भी छोड्याली। शहरू मा रैक अब त पहाड़ परेदश ह्वे ग्याई।। गौरू बाछुरा छोड़ी बण जाणू भी छोड्याली। भै-बन्द, गौं गळा सब्बी धाणी छोड्याली।। माल्या सारी, बेल्या सारी मल्छू फुलगी। बेटी-ब्वारी सब्बी परदेशू चलीगी।। गौं-गळा मा क्वी नी रैगी बांजा पड़या छन। खुद कैमा मिटौण अब क्वी रैया नी छन।। घौर गौं-गळा…

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