निर्विकार, सहिष्णुता की प्रति मूर्ति, लोकाचार व व्यवहार की बारीकियां समझने में प्रवीण थे भैरव दत्त बहुगुणा

Nirvikar, idol towards tolerance, was proficient in understanding the nuances of ethos and behavior Bhairav Dutt Bahuguna

प्रस्तुति: हर्षमणि बहुगुणा

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ।।

कर्म प्रधान है फल गौण‌ , यही सोच कर प्रत्येक व्यक्ति को कर्म करना चाहिए , शायद सावली की धरा पर कर्म की प्रधानता को मानने वालों ने सुयोग्य मानवता का पाठ पढ़ाने हेतु ही जन्म लिया , ऐसा मुझे विश्वास है व प्रतीत भी होता है । आज इस श्रृंखला में प्रात: स्मरणीय श्री भैरव दत्त बहुगुणा  सुपुत्र स्व० श्री श्रीराम बहुगुणा जी को याद करने का सुअवसर  प्राप्त हुआ है । निर्विकार, सहिष्णुता की प्रति मूर्ति, लोकाचार व व्यवहार की बारीकियां समझने में प्रवीण तथा सदाचार से युक्त सचमुच अपने सुख को दूर रख कर दूसरे के सुख से सुखी आपका व्यक्तित्व अनूठा था । विदुर की यह उक्ति आप पर खरी प्रतीत होती है ।

न स्वे सुखे वै कुरुते प्रहर्ष नान्यस्य दु:खे भवति प्रहृष्ट: ।

दत्त्वा न पश्चात्कुरुतेऽनुतापं स कथ्यते सत्पुरुषार्यशील: ।।

आपके दादा जी स्व० श्री ख्याली राम बहुगुणा जी के  दो सुपुत्रों में बड़े पुत्र स्व० श्री जीत राम बहुगुणा जी के तीन सुपुत्रों में बड़े पुत्र श्री मणि राम बहुगुणा जी सनातन धर्म प्रेमी सुयोग्य इतिहास कार , सहिष्णु  २६-६-१९२५ को इस धरा पर अवतरित हुए जो आज भी भगवत चिन्तन के साथ समाज हित में रत रहते हैं , हर वर्ष अपने जन्मोत्सव पर पुराण कथा करवाते रहते हैं । दूसरे सुपुत्र स्व० श्री पदम दत्त बहुगुणा जी पुलिस विभाग में सेवा प्रदान कर इस माटी को अलविदा कह गए हैं।

आपके तीन सुपुत्रों में बड़े पुत्र श्री कुशला नन्द बहुगुणा जी भारतीय सेना में शामिल होने के बाद सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हो कर अपने तीन बच्चों के साथ आनन्द मय जीवन यापन कर रहे हैं , दूसरे सुपुत्र स्व० श्री भाष्कर बहुगुणा पुलिस विभाग में कार्यरत थे किन्तु असामयिक निधन से घर परिवार को रोता बिलखता छोड़ इस संसार से विदा हुए । तीसरे सुपुत्र श्री रामानन्द बहुगुणा जी यशस्वी जीवन  ‘कथा वक्ता ज्योतिष व कर्मकाण्ड के रूप में’  व्यतीत कर रहे हैं । श्री जीत राम बहुगुणा जी के तीसरे सुपुत्र श्री देव दत्त बहुगुणा जी देहरादून में निवास कर रहे हैं । आपके पिताजी श्री श्री राम बहुगुणा जी के आप बड़े सुपुत्र थे ,  आपका व्यक्तित्व निश्चित रूप से अनुकरणीय रहा आज आप नहीं हैं यह पीड़ा सदैव सालती रहेगी ।

आपके छोटे भाई श्री तोता राम बहुगुणा जी भी आज हमारे बीच में नहीं है , उनके सुपुत्र श्री रोशन लाल बहुगुणा जी अपने पिता श्री के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। सबसे छोटे भाई श्री मोहन लाल बहुगुणा जी अपने सुपुत्र श्री शंकर बहुगुणा जी के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए भगवत् चिंतन कर  रहे हैं । आपके जाने के बाद आपके बड़े सुपुत्र श्री राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा जी जो घर से बाहर चले गए थे अब तो उनका किसी खास प्रयोजन पर ही गांव में आना होता है। दूसरे सुपुत्र जिनका जन्म २४ दिसम्बर सन् १९५५ को हुआ था , वे श्री वीरेन्द्र बहुगुणा जी भी अचानक असमय २१ जून सन् २००९ को अकाल कवलित होने से अपने परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ खड़ा कर गये उनके दो बच्चे श्री सुशील बहुगुणा व श्री अश्विनी बहुगुणा अपने दुःख को न देख कर परोपकार की भावना से ओत-प्रोत हो कर धैर्य पूर्वक कार्य कर रहे हैं । एसे परिवार के परिजनों के लिए इस जन की हार्दिक शुभकामनाएं । आपका जीवन अत्यधिक संघर्षमय रहा यह कहना शायद बहुत ठीक नहीं है क्योंकि समय का तकाजा तब उसी प्रकार का ताना-बाना बुन कर आया होगा या साधनों का अभाव तब अधिक था, फिर भी आप भारतीय सेना में सम्मिलित होने के बाद कर्मठता पूर्वक जीवन यापन करते हुए जो एक वास्तव में निश्चित रूप से चुनौती पूर्ण था उसका निर्वहन किया।

आज के भौतिकवादी युग में न साधनों का अभाव है न सुविधाओं की कमी । आज आपकी सौजन्यता , कर्मठता व पर‌दु:खकातरता भुलाये नहीं भूलती । पुस्तकों की दुकान खोली वहां जो भी जरूरत मन्द आता उसकी सहायता अवश्य करते थे। यथा सम्भव जो भी बन सकता था देने का पूरा प्रयास किया करते थे !  ऐसी दिवंगत विभूति को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कोटि-कोटि प्रणाम व नमन करता हूं तथा श्रद्धासुमन समर्पित करता हूं । आप सशरीर हमारे साथ नहीं हैं किन्तु आपका यश शरीर हमारे साथ है । आपके पास सांसारिक कोई कामना अवशिष्ट नहीं थी , अतः आप शान्त चित्त थे । सभी दिवंगत विभूतियों को कोटि-कोटि नमन व भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित। श्रीमद्भगवद्गीता की यह उक्ति आप पर चरितार्थ होती है ।

विहाय कामान्य: सर्वान्पुमांश्चरति नि:स्पृह: ।

निर्ममो निरहंकार: स शान्तिमधिगच्छति ।।

Print Friendly, PDF & Email
Share