महाविद्यालय मालदेवता में मनाया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

रिपोर्ट: डॉ दलीप बिष्ट

देहरादून: आज राजकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता, रायपुर , देहरादून के गणित विभाग द्वारा , विज्ञान के प्रति रुचि और जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया।

इस दिन देश के महान वैज्ञानिक डॉक्टर चंद्रशेखर वेंकट रमन ने 1928 में रमन प्रभाव’ की खोज की थी ,जिसके लिए भारत के पहले वैज्ञानिक को 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। रमन प्रभाव के अनुसार प्रकाश की प्रकृति और स्वभाव में तब परिवर्तन होता है, जब वह किसी पारदर्शी माध्यम से निकलता है। यह माध्यम ठोस, द्रव और गैसीय, कुछ भी हो सकता है। यह घटना तब घटती है, जब माध्यम के अणु प्रकाश ऊर्जा के कणों को फैला देते हैं। रमन प्रभाव रासायनिक यौगिकों की आंतरिक संरचना समझने के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) ने साल 1986 में 28 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के तौर पर मनाने हेतु केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था। पहला राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी 1987 को मनाया गया था।
गणित विभाग की प्रोफेसर अनीता तोमर ने बताया कि , इस साल राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम , “विज्ञान,तकनीक, नवाचार: शिक्षा, कौशल एवं कार्य पर प्रभाव ” विषय पर महाविद्यालय में निबंध व् पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गयी ताकि छात्रों के अंदर छिपे विज्ञानी को बाहर निकला जा सके ।

निबंध प्रतियोगिता में विनीता नेगी ने प्रथम व् श्रद्धा थापा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। पोस्टर प्रतियोगिता में विनीता नेगी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। ।डॉ श्रुति चौकियाल ने इस अवसर पर निर्याणक की भूमिका निभाई।
प्रोफेसर अनीता तोमर ने बताया कि विज्ञान दिवस की थीम काफी अच्छी हैं। इससे निश्चित ही छात्रों की रुचि विज्ञान विषय पर बढ़ेगी और वे आगे इस क्षेत्र में बेहतर काम कर पाएंगे। आम तौर पर विज्ञान बड़ा ही रोचक विषय है, लेकिन इस विषय से बच्चे की रुचि बढ़ती उम्र के साथ कम होती जाती है, क्योंकि यह एक ऐसा विषय है कि इसमें धैर्य के साथ काम करने की जरूरत होती है। छात्र अपनी शिक्षा को पूरा करते ही अच्छी नौकरी पाना चाहते हैं, जिसके लिए वे ऐसे क्षेत्र में जाना पसंद करते हैं। जहां उन्हें जल्दी ही अच्छी नौकरी मिल जाए। जिसके चलते वे अपने विज्ञान विषय को पीछे छोड़ देते हैं। शोध करने वालों की घटती संख्या का यह एक बड़ा कारण है।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सतपाल साहनी ने विजयी छात्रों को बधाई दी व् सर्टिफिकेट वितरित किए। प्रोफेसर साहनी ने छात्रों को सोशल डिस्टैन्सिंग बनाने का आवाहन किया तथा छात्रों को कहा कि वह भी अपने स्तर से लोगों को इसके लिए जागररूक करें ।

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